बड़वानी~ अनिता को पुनः मिला जीवन साथी अक्षय का साथ~~
बड़वानी / कुष्ठ रोग अभिश्राप नहीं है बल्कि अन्य शारीरिक व्याधियों की भांति ही एक बीमारी है, जिसका समय पर उपचार हो जाने पर कुष्ठ रोग से मुक्ति पाई जा सकती है। किन्तु दुर्भाग्यवश अशिक्षा के कारण ग्रामीण अंचल में आज भी रोग होने पर मरीज का उपचार कराने के बजाय उसे घर में ही छुपा कर रखने से यह रोग गंभीर शारीरिक विकृति पैदा कर देता है ।
ऐसा ही एक वाकिया महाराष्ट्र के जलगांव जिले के ग्रामीण क्षेत्र की रहवासी श्रीमती अनिता बारेला के जीवन में तीन वर्ष पूर्व घटित हुआ। जब उसे कुष्ठ रोग की शुरूवात हुई थी किन्तु पति एवं ससुराल वालों के छिपाने से यह रोग धीरे-धीरे शारीरिक विकृति की सीमा तक पहुंच गया । ऐसे में जब अनिता के ससुराल वालो को यह जानकारी मिली की म.प्र. के बड़वानी जिले में राज्य शासन के सहयोग से आशाग्राम, कुष्ठ रोगियो को अपने यहाॅ रखकर निःशुल्क उपचार, रहवास, भोजन की व्यवस्था करवाता है। इस जानकारी के आधार पर अनिता का पति एवं ससुर उसे आज से डेढ माह पूर्व अपने साथ लाकर आशाग्राम छोड़ गये थे ।
आशाग्राम संस्था के जनसम्पर्क अधिकारी एवं पैरालीगल वांलेटियर श्री सचिन दुबे ने इस परिस्थिति से संस्था के सचिव श्री एसएन यादव एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं न्यायाधीश श्री हेमन्त जोशी को अवगत करवाया । जिस पर से जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री रामेश्वर कोठे के मार्गदर्शन एवं निर्देश पर श्रीमती अनिता को संस्था के रेन बसेरा में रखकर नियमित उपचार प्रारंभ किया गया । शासकीय जिला कुष्ठ विभाग से प्रतिमाह दी जाने वाली निःशुल्क मेडिसिन का सुखद परिणाम प्राप्त होने लगा । और एक माह के उपचार से ही अनिता की विकृतियो में सुधार दिखाई देने लगा । बिमारी के कारण आई अपनी शारीरिक विकृतियो में हो रहे सुधार से उत्साहित अनिता अब अपने नन्हें चार बच्चों को यादकर व्याकुल हो उठी । उसने संस्था के पदाधिकारियो से अपने बच्चो एवं परिवार के सदस्यो से एक बार पुनः मिलने की इच्छा व्यक्त की । इस पर से संस्था के पदाधिकारियो ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के न्यायाधीशो के माध्यम से अनिता के पति को संस्था में बुलाया । संस्था में आये पति श्री अक्षय ने जब अपनी पत्नि की बिमारी में सुधार देखा तो उन्हें अपने अंधविश्वास के चलते इलाज न करवाने पर रंज होने लगा । उन्होने संस्था एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के न्यायाधीशो से अनुरोध किया कि वे अपनी पत्नि अनिता को पुनः अपने घर ले जाना चाहते है। इस पर संस्था एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के न्यायाधीशो ने अनिता के पुर्नवास को ध्यान में रखते हुये पति को इस आश्वासन पर की वे अपनी पत्नि का नियमित उपचार प्रारंभ रखेंगे । इस पर उन्हें अपनी पत्नि को साथ ले जाने की अनुमति प्रदान की । साथ में उन्हें दो माह की समुचित दवाईयाॅ भी निःशुल्क प्रदान करवाई ।

Post A Comment: