झाबुआ~~खुलेआम ताडी की बिक्री पर नही रोक पा रहा प्रषासन~~
सरकारी कार्यालय के भीतर ही किया जा रहा संचालन~~
झाबुआ। जिले में फैल रहे नशीले पेय पदार्थो ने अपने कदम मानों यु जमा लिए जैसे की इनकों किसी का भय नही रहा। नगर में खुलेआम बिक रहे नशिले पदार्थो पर प्रशासन द्वारा रोक लगाने के किये जा रहे प्रयास विफल दिखाई देते नजर आ रहे है। यहि नही अब तो इन लोगो के द्वारा सरकारी कार्यालय नगर पालिका के आंगन में ही अपनी दुकाने संचालित करना शुरू कर दिया है। लेकिन इन लोगो पर आबकारी विभाग की कार्यवाही कुछ ही समय के लिये होती है उसके बाद इन लोगो के द्वारा ताडी का व्यवसाय पुनः शुरू कर दिया जाता है।
नगर में स्थित कई जगहों पर नशिले पदार्थो को खुलेआम बैचा जा रहा है। किन्तु इस ओर प्रशासन एवं पुलिस विभाग का कोई ध्यान नही दे रही है। नगर में स्थित एक निजी शैक्षणिक संस्थान बस स्टैण्ड़ के समिप रोजाना बिक रहे नशिले पदार्थो(ताड़ी व कुछ रासायनिक पदार्थ) को खुलेआम लोगो को बैचा जा रहा है। लेकिन प्रशासन ने इस ओर अपनी ऑखों को क्यों मुंद रखा है। आए दिन इस जगह पर अल सुबह से ही लोगो जमावड़ा देखने को मिल ही जाता है, ओर शाम होते होते इनकी तादात बढ़ती जाती है। स्कुल के सामने बिक रहे इस नशिले पदार्थ को न जाने किसकी अनुमती से बैखोफ बैचा जा रहा है। ये पदार्थो को बेचने वाले ग्रामिण लोग है जिन्हें शायद प्रशासन या पुलिस विभाग का कोई डर नही है। यें लोगे धडल्लें से इस नशिलें पदार्थ का व्यवसाय करते है। इन पदार्थो से बेचारे गा्रमिण लोगो के साथ नगरीय लोग भी इस नशिले पदार्थ के सेवन में जकडे जा रहे है। जिससें उन्हें नशें की आदात तो होती ही है और साथ ही इनके स्वास्थ्य खराब होने की भी संभावना पैदा हो जाती है। नशिले पदार्थो के सेवन के लिए कई लोगो में आपसी मतभेद को देखा जा सकता है। ये नशिले पदार्थो के सेवन से आमजन कई तरह के अपराध जैसे कृत्य करने को भी मजबुर हो जाता है।
नही कर रहा आबकारी विभाग कार्यवाही
पूर्व में कई बार प्रशासन की सिर्फ खानापूर्ति की कार्यवाही से इन लोगो में कोई डर का माहौल निर्मित नही हुआ है। इन ग्रामिणों में नशिले पदार्थो का व्यवसाय करने वाली सभी महिलाएं होती है जो अपने महिलाएं होने का फायदा उठाकर निःसंकोच बैचती है। इस नशिलें पदार्थ को पीकर लोगो में कई बार विवाद होने जैसी संभावनाएं भी देखी जा चुकी है। जिससें करीब ही बने निजी शैक्षणिक संस्थान को प्रभावित होना पड़ता है। निजी शैक्षणिक संस्थान द्वारा पहले भी कई बार शिकायते की जा चुकी है। लेकिन उन्हें भी यही लगता है कि प्रशासन इस ओर कोई सख्त कार्यवाही नही करता है ओर बुराई में शैक्षणिक संस्थान को आना पड़ता है। जिसके अब उन्होने तो अब इस परेशानी को झेलना अपनी मजबुरी ही समझ लिया है। प्रशासन की इस ओर ध्यान न देना कहा तक सही है इसे समझना मुश्किल है। पास ही बने नगर पालिका कार्यालय से भी कोई कार्यवाही नही की जा रही है। अधिकारीयों के पहले भी इस बारें में अवगत कराया जा चुका है। लेकिन उनके द्वारा काई कठोर कार्यवाही नही हो पाई है। इस तरह से इस अव्यवस्था को अगर इसी तरह नजरअंदाज किया गया तो इन नशिले पदार्थो के व्यवसाइयों के हौसले बुलंद होते जाएगे। इस अव्यवस्था को हटाना प्रशासन की जिम्मेदारी है और वह ही इस और ध्यान नही दे रही है। आखिर कब तक इसी महौल में आसपास का वातावरण दुषित होता रहेगा इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा ?
आबकारी विभाग की कार्यवाही में कुछ ही लोगो पर कार्यवाही कर कागजी खानापूर्ती कर ली जाती है। उसके बाद कार्यवाही का क्या हुआ यह कोई भी नही जानता। अब तो इन लोगो को पुलिस प्रशासन का भी कोई डर नही रह गया है। आये दिन होने वाली कार्यवाही से ये लोग बिल्कुल परिचित हो गये है। पास ही बने निजी शैक्षणिक संस्थान के होने के कारण यहा पिने वाले से कई बार पढने वाली छात्राओ के साथ भी छेडखानीयां की जाती है। लेकिन छात्राओ के द्वारा डर के मारे शिकायत करने में भी कतराती है। लेकिन पुलिस विभाग की टीम के द्वारा आज तक इन ताडी व्यवसायियो पर कडी कार्यवाही नही हो पा रही है। ऐसे में आये दिन यहा आने वाले गांव वालो के झगडे होते रहते है जिससे आसपास के दुकानदारो को कई बार अपनी दुकान जल्दी बंद कर जाना पडता है।

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