कुक्षी~~देश की एकजुटता को तार तार न कर दे सोशल मीडिया का गलत प्रयोग~~
पुर्णतः प्रतिबंध से ही संभव है देश की शांती~~
हाजी ईकबाल कुरैशी कुक्षी~~
कुक्षी । अनेकता मे एकता की विश्व प्रसिद्ध छवी वाले हमारे इस वतन मे विकास की रफ्तार अत्यंत ही तीव्र गति से बड़ी है। युवाओ के इस देश मे पिछले कई सालो मे उन्नति को कई नये आयाम मिले है जिसमें महत्वपूर्ण है इंटरनेट आधरित सोशल मीडिया जिसने हमारी जीवनशैली को बदलकर रख दिया है। हमारी हर जरूरतें, हमारी हर कार्य प्रणालियां, हमारी रुचियां-अभिरुचियां और यहां तक कि हमारे सामाजिक मेल-मिलाप, वैवाहिक संबंधों का सूत्रधार भी किसी हद तक सोशल मीडिया ही है। हमारे सामाजिक संबंधों के ताने-बाने को रचने में सोशल मीडिया की भूमिका काफी महत्वपूर्ण बन गई है। इसके जरिये हम घर बैठे दुनिया भर के अनजान और अपरिचित लोगों से अनुठा रिश्ता बना रहे हैं। ऐसे लोगों से हम अपनत्व से जुड़ रहे है जिनसे हमारी वास्तविक जीवन में कभी मुलाकात ही नहीं हुई है। इतना ही नहीं, हम इसके माध्यम से अपने स्कूल-कालेज के उन पुराने दोस्तों को भी खोज निकाल रहे हैं, जिनके साथ हम कभी पढ़े-लिखे, बड़े हुए और फिर वे धीरे-धीरे दुनिया की भीड़ में कहीं खो गए। निश्चित ही यह सोशल मीडिया हमे अंर्तमन से खुशी प्रदान कर रही है । किन्तु आज इसका उपयोग हमारे कुछ युवा देश की अखंडता को खंडित करने के साथ सभी समुदाय व धर्मो के समावेश वाले इस देश की धार्मिक सहिष्णुता व एकजुटता को तार तार करने मे लगे हुवे है । मंदिर व मस्जिद की कभी कधार सिढ़ीया चढ़ने वाले अधिकांश युवा सोशल मीडिया के जरिये से ही अपनी धर्मभक्ति का प्रचार करने लग गये है । आजकल सोशल मीडिया पर देश के विकास को प्रगति प्रदान करने वाले संदेश पुरी तरह से विलुप्त होकर एक दुसरे की जातिगत भावनाओ को ठेस पहुंचाने वाले संदेशो का ही अंबार लगा हुआ है । अपने वर्ग को श्रैष्ठ बताने मे दुसरे वर्ग का अपमान करने वाले संदेशो का प्रसार करने मे देश के युवा जरा भी संकोच नही कर रहे है जिसके फलस्वरूप देश मे वर्गीय तनाव का वातावरण बना हुआ है । देश मे होने वाली हिंसाओ की अधिकांश वजह सोशल मीडिया पर प्रसारित विरोधी संदेश ही रहे है । जबकि हर समुदाय के व्यक्ति को अपने अपने धर्म व मजहब धार्मिक आस्था, भक्ति व ईबादत करने का मात्र एक पवित्र जरिया है जिससे दौड़ धुप वाली जिंदगी से कुछ पल सुकुन से बिताने और जिवन मे नवीन उर्जा का प्रवाह होता है । आज देश के कुछ तथाकथित लोगो ने देश के सभी वर्गो को तमाशा बनाकर रख दिया है । वर्गवाद को सोशल मीडिया के हासिये पर मात्र विवादास्पद विषय वस्तु बनाकर रख दिया है । जबकि कोई भी वर्ग न तो कीसी दुसरे वर्ग से श्रेष्ठ होता है न ही निचे सभी वर्ग समान होते है तो फिर हम कौन होते है एक दुसरे के वर्गो के प्रति दुष्प्रचार कर उसकी श्रैष्ठता को कम करने वाले । हम सभी जानते है कि कीसी भी वर्ग को ठेस पहुंचाने वाले संदेशो से वर्गवाद को तो बढ़ावा मिलेगा ही देश की अखंडता भी खण्डित होगी । सोशल मीडिया पर वर्ग विरोधी टिप्पणीयो की चिंगारी से लगी आग मे देश की शांती जलकर राख हो रही है, अगर शिघ्र ही सोशल मीडिया पर धाराप्रवाह रुप से प्रसारित हो रहे वर्ग विरोधी संदेशो पर पुर्ण रुप से प्रतिबंध नही लगाया गया तो देश मे चारो और भड़क रही दलित व सवर्ण मतभेद की आग पर काबु नही पाया जा सकता । देश मे शांती कायम करने हेतु शासन तो सराहनीय प्रयास कर ही रहा है निश्चित ही इस और ठोस व दण्डात्मक कदम भी उठाने पड़ेंगे । सोशल मीडिया की नजर से देश को देखा जाये तो हिंदुओं को लग रहा है कि आने वाले कुछ वर्षों में भारत मुस्लिम राष्ट्र बन जाएगा और भारत में मुस्लिम शासन स्थापित हो जाएगा । वही मुस्लिमों को लग रहा है कि सम्पुर्ण देश को हिंदु राष्ट्र बना दिया जावेगा और मुस्लिमो को देश से बाहर कर दिया जाएगा । साथ ही दलितों को लग रहा कि जल्द ही नये संविधान का गठन करके उनके अधिकारो का हनन कर दिया जाएगा एवं सामान्य वर्गो के लोगो को लग रहा है कि देश मे उनका ही शोषण हो रहा है । ये सभी अफवाहे असल में सिर्फ और सिर्फ सोशल मीडिया पर अंधाधुंध तरीके फैलाए जा रहे है जबकि हम सोशल मीडिया की छद्म दुनिया से निकलकर अपने आसपास लोगों को देखें तो यकीनन एक सौहार्दपूर्ण भारत नज़र आएगा । अगर हम अभी भी जागृत नहीं हुए और इन्हीं बगैर हाथ पैर की पोस्ट के आधार पर एक दूसरें के लिए अपनी गलत अवधारणाएं बनाते रहे तो निश्चित ही इस देश की अनेकताओ मे एकता वाली अनुठी संस्कृति को खो देंगे ।

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