झाबुआ ~मावा खरीदने से पहले थोड़ा हथेली पर लेकर रगड़िए और चखकर देखिए-घी,सोया तेल और आलू का स्वाद आए तो मावा मिलावटी~~
दुकान में मिठाई बनाने के दौरान नहीं सफाई का ध्यान-गंदगी में बैठकर तैयार कर रहे मिठाई~~
झाबुआ। संजय जैन~~
त्योहारों पर बाजार में मिठाई और मावे की बिक्री बढ़ जाती है। दूध,मावे और मिठाई की शुद्धता जानने में हमेशा बड़ी चूक होती है। दिवाली पर मांग की तुलना में आपूर्ति नहीं होती है,ऐसे में कारोबारी मिलावट करके फायदा उठाते हैं। मिलावटी खाद्य सामग्री बिकने लगती है। खाद्य एवं औषधि नियंत्रण विभाग सैंपल लेता है,लेकिन लैब से जांच रिपोर्ट आने में 15 दिन लग जाते हैं,तब तक त्योहार खत्म हो जाता है। इसलिए आम लोगों को स्वयं भी जागरूक होने की जरूरत है।
खाद्य विभाग द्वारा अब तक सैंपल नहीं लिए गए.........................
दीपावली के दौरान भारी मिठाई की खपत होती है,इसके लिए शहर सहित मिठाई की दुकानों में मावा की मात्रा भी अधिक मात्रा में जरूरत थी। जिसके लिए अधिकतर मिठाई के दुकानदार सिंथेटिक मावा का उपयोग कर रहे हैं। जो लोगों की सेहत को बिगाड़ रहा है। ऐसे मामलों में खाद्य एवं सुरक्षा विभाग की ओर से पहले से तैयारी नहीं की जा रही है। लेकिन खाद्य विभाग के अधिकारियों द्वारा अब तक सैंपल नहीं लिए गए हैं।
तैयार की जा रहीं गुणवत्ता को नजरअंदाज कर मिठाई ......................
आगामी त्योहार दीपावली पर उपहार के लिए तैयार हो रही मिठाइयों में भारी मात्रा में गोलमाल किया जा रहा है। शहर के नामचीन मिष्ठान भंडार के संचालक भी इससे पीछे नहीं हैं। उनके द्वारा भी भारी मात्रा में मिलावटी और अमानक सिंथेटिक मावा से मिठाई तैयार कराई जा रही है। जो स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदायक हो सकती है। यहां पर मावा के साथ साथ बूंदी,बेसन,तेल और घी की भी गुणवत्ता को नजरअंदाज कर मिठाई तैयार की जा रहीं हैं।
लागत से कम पर मिठाई,शुद्धता का सवाल........................
बूंदी का लड्डू बनाने के लिए एक किलो बेसन के साथ डेढ़ किलो चीनी,एक किलो घी या रिफाइन के अनुपात के साथ ही रसोई गैस और करीब 70 रुपए लेबर चार्ज लग रहा है। तब जाकर लगभग साढ़े 3 किलो लड्डू तैयार होते हैं। इसकी लागत बेसन के 100,घी के 170 चीनी के 80 और लेबर के 70 रुपए के हिसाब से करीब 4 सौ 20 बैठ रही है,जो प्रति किलो 140 है। ऐसे में 180 से 200 रुपए किलो बूंदी का लड्डू मार्केट में बेच पाना संभव नहीं है।
मिलावट खोर ऐसे कर रहे गड़बड़....................
ड्राई फ्रूट,बेसन,घी,रिफाइन,चीनी,दूध.खोया आदि से मिठाई तैयार की जाती है,लेकिन त्योहारों पर मांग बढ़ने और सामानों की उपलब्धता कम होने पर मुनाफाखोर शुद्धता से समझौता करने से नहीं चूकते। वह चने के बेसन में घटिया किस्म की सूजी, मैदा की मिलावट करते हैं। मैदा से सोनपापड़ी और लोबिया की दाल से इमरती व मैदा से जलेबी बनाई जा रही है। इमरती को असली जैसा बनाने के लिए आरारोट का भी इस्तेमाल करते हैं।
मावा,दूध व घी की ऐसे करें पहचान....................
*** घी *****
-देसी घी में आलू,अरारोट और रिफाइंड तेल मिलाया जाता है। इससे स्वाद बदल जाता है।
-१० एमएल घी में कुछ बूंदें हाइड्रोक्लोरिक एसिड की मिलाएं। थोड़ी देर बाद इसे हिलाएं। यदि घी का रंग लाल या गुलाबी हो जाए तो यह मिलावटी है।
-घी में आयोडीन सॉल्यूशन की थोड़ी सी मात्रा डालें। रंग नीला हो जाएगा। नीला रंग घी में स्टार्च की मात्रा साबित करेगा। यानी आलू की मिलावट की गई है।
*** दूध ***
-दूध में डिटर्जेंट,पानी,सिंथेटिक दूध मिलाते है। डिटर्जेंट और सिंथेटिक दूध सेहत के लिए घातक हैं।
-आधा कप दूध में उतना ही पानी मिलाएं। झाग निकले तो समझ लें कि डिटर्जेंट है।
-सिंथेटिक दूध का स्वाद अच्छा नहीं होता। दूध उंगलियों के बीच रगड़े । साबुन जैसा लगे तो सिंथेटिक दूध हो सकता है।
-दूध की थोड़ी मात्रा किसी सतह पर डालें यदि दूध लकीर बनाते हुए फैले तो समझ जाएं,सिंथेटिक दूध हो सकता है।
*** मावा ***
-मावे में अक्सर सिंथेटिक दूध,मैदा,वनस्पति घी,आलू और अरारोट की मिलावट की जाती है।
-मावे पर फिल्टर आयोडीन की दो-तीन बूंदें डालें। यदि मावा काला पड़ जाए तो समझ लें कि मिलावटी है।
-मावा चखने पर थोड़ा कड़वा और रवेदार महसूस हो तो वनस्पति घी की मिलावट है।
-मावा लेते समय उंगलियों से मसलकर देखें। यदि दानेदार है तो मिलावटी हो सकता है।
कैसे पता करें कि मिठाई मिलावटी है या शुद्ध.......................
1- मिठाई में कलर की मिलावट खूब की जाती है,इसलिए रंग बिरंगी मिठाई खरीदने से बचें। कलर वाली मिठाई को हाथ में लेकर चेक करें। अगर हाथ में रंग नहीं लग रहा तो रंग की मिलावट नहीं है।
2-अगर खोया बहुत दानेदार है तो समझो इसमें किसी तरह की मिलावट की गई है। शुद्ध खोया एकदम चिकना होता है।
3-मिठाई पर लगे चांदी के वर्क में मिलावट की जाती है। आप वर्क को जलाकर चेक कर ले,असली वर्क जलने पर छोटी गोली नुमा बन जाएगा और नकली वर्क ग्रे कलर का जला हुआ कागज जैसा लगेगा।
4-मिठाई खरीदने से पहले चख लें,इससे बासी और ताजी का पता चल जाएगा। अगर मिठाई थोड़ी कड़ी और सूखी है तो पुरानी हो सकती है।
5-अगर केसर वाली मिठाई खरीद रहे हैं तो उसे पानी में डालकर चेक कर लें,अगर रंग निकल रहा है तो समझो केसर नहीं कलर मिलाया है। अगर रंग नहीं निकल रहा तो समझो असली केसर है।
जांच आम लोग खुद कर सकते हैं.....................
हम जल्द ही जिले में निरिक्षण प्रारम्भ करेंगे,जनता से अनुरोध है की वे दुकानदार से बिल अवश्य लेवे। मावे में मिलावट की जांच आम लोग खुद कर सकते हैं। खरीदते समय थोड़ा सा मावा हथेली पर मसलकर और चखकर जांच कर सकते हैं। स्वाद मीठा लगे तो मावा शुद्ध है। यदि रिफाइंड ऑइल,आलू,गुलकंद या वनस्पति घी जैसा स्वाद आए तो समझें मिलावटी है।
..................राहुल अलावा-खाद्य सुरक्षा अधिकारी,झाबुआ
हो सकता है लीवर खराब ...........................
मिलावटी मावा और सिंथेटिक दूध के सेवन से फूड पॉइजनिंग हो सकती है। उल्टी दस्त की शिकायत हो सकती है। किडनी और लीवर पर बुरा असर पड़ सकता है। अधिक मात्रा में नकली मावे से बनी मिठाई खाने से लीवर खराब हो सकता है। कैंसर की आशंका भी बढ़ जाती है।
सूचित करें......
आपके आसपास कहीं मिलावट हो रही हो,तो जिला प्रतिनिधि संजय जैन के इस नंबर 942510-1357 /8839107012 पर सूचना दें।





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