झाबुआ~शहर में अब ऐसी कोई जगह नहीं बची,जहा गुमटियों और ठेलो का साम्राज्य नहीं फैला हुआ है -लगभग हजार गुमटियों के साथ इतने ही ठेले शहर में हर दिन व्यवस्था को बता रहे ठेंगा~~

गुमटी व ठेलों को रोक-टोक के अभाव में शहर में बढ़ता जा रहा साम्राज्य-अतिक्रमण और बदहाल ट्रैफिक की वजह बन रहे ठेले व गुमटियां~~

झाबुआ। ब्यूरो चीफ -संजय जैन~~




गुमटी व ठेले वालों के लिए नपा ने कोई नियम शहर की सीमा में तय नहीं कर रखा है। बस गुमटी व ठेला लगाओ और अपना काम शुरु कर दो। पूरे शहर में मनमानी के कारण व्यवस्थाएं बदहाल हो रही है। अब गुमटियां व ठेले व्यवस्थाओं को मुंह चिढ़ाते हुए ट्रैफिक की बदहाली और बढ़ते अतिक्रमण की बड़ी वजह बन रही है। दीपावली पर्व के चलते हालात बहुत ही बुरे है,इस पर उचित कार्ययोजना बनाने की बेहद आवश्यकता भी है। शहर में हर दिन ठेलों पर व्यवसाय करने वाले ठेले व्यवसायी व गुमटी धारी लोगों से नपा हर दिन वसूली करती है। फिर भी इनके लिए नियमों की कोई सीमा नहीं है। मजेदार बात तो यह है की अभी कुछ माह पूर्व बस स्टैंड स्थित साँची पॉइंट के पीछे प्रशासन द्वारा पार्किंग की व्यवथा की गयी थी,वहाँ पर भी ढेरो गुमटियों का मकड़जाल फ़ैल चुका है और जिम्मेदार कुम्भ कर्णीय निद्रा में मजे से सो रहे है।

नपा को यह भी नहीं पता कि कितने ठेले व गुमटी ........................



मुख्यमंत्री ने घोषणा की तो इन लोगों को आस बंधी की अब वसूली बंद होगी,लेकिन वह वसूली हर दिन की बंद हुई। अब इन्हें छह माह में देना होगी। आचार संहिता लगने से पहले नपा को निकाय विभाग ने इसे लेकर निर्देश जारी किए थे,तो नपा ने परिषद में प्रस्ताव रख लिया था। लेकिन अब तक नपा को यह भी नहीं पता कि कितने ठेले व गुमटी है और इससे वसूली हर साल कितनी होती है। वसूली करने फील्ड में जाने वाले अमले ने जानकारी के नाम पर अब तक नपा को गुमराह कर रखा है। इधर शहर में मनमर्जी से हर चौराहे से लेकर सडक़ो पर गुमटी व ठेलों का साम्राज्य बढ़ता जा रहा है।

अब शहर में ऐसी कोई जगह नहीं बची,जहा गुमटियों और ठेलो का साम्राज्य नहीं ..........................


शहर में ऐसी कोई जगह अब नहीं बची जहा गुमटियों और ठेलो का साम्राज्य नहीं फैला हुआ है। गौरतलब है की अभी हाल में ही एक सामाजिक संगठन ने सिर्फ चर्चा में आने के उदेश्य से महिलाओ को ठेले गाड़ी मुफ्त में वितरित की, जिसकी अनुमति प्रशासन से शायद ही ली गयी है। जब सामाजिक संगठन को ही शहर की चिंता नहीं है तो,औरों से क्या उम्मीद की जा सकती है..............?

वसूली के लिए नियम बनना भी जरूरी..................


शहर के ट्रैफिक में सबसे अधिक समस्या ठेले व गुमटियों के कारण होती है। वसूली नपा हर दिन करती है लेकिन फील्ड के अमले से नपा आज तक सही आंकड़े ही नहीं जुटा पाई। ऐसे में पंजीयन से लेकर सड़कों से निश्चित दूरी पर व्यवसाय करने के लिए नियम भी तय होना जरूरी है। तो जगह भी चिन्हित करना जरूरी है। वर्तमान में नियम व व्यवस्था के अभाव में मनमर्जी से ठेले वे गुमटियां पूरे शहर में लगी है। सामान्य जानकारी के अनुसार नपा को प्रतिदिन इनसे आय होती है,लेकिन असल में जितने ठेलों व गुमटियों से वसूली होती है उससे दोगुना ठेले व गुमटियां शहर में स्थापित है।

पूर्व बाजार बैठक के ठेकेदार से भी नपा आज तक नहीं कर पायी वसूली ...........................


गौरतलब है कि पूर्व के बाजार बैठक के ठेकेदार से नपा आज तक वसूली नहीं कर पायी है,ऐसा क्यों है यह तो नपा ही जाने....? जबकि नियमानुसार ठेकेदार यदि राशि जमा नहीं करता है,तो वसूली उसकी अचल संपत्ति से अर्जित करने का नियम है,लेकिन नपा ऐसा क्यो नही कर पा रही है यह तो वही जान....? प्रशासन को इस और ध्यान देने की आवश्यकता है।

अब हर दिन नहीं छह माह में होगी वसूली..............................


शहर में सड़कों पर ठेलें-गुमटी लगाकर अपनी रोजी-रोटी कमाने वाले विक्रेताओं से नगरपालिका अभी प्रतिदिन वसूली करती थी। लेकिन अब इन विक्रेताओं से एक साथ छह माह या पूरे साल की वसूली नपा द्वारा ली जाएगी। राशि जमा करवाने पर ठेला-गुमटी संचालक का कार्ड भी बनाया जा रहा है। नगरपालिका ने नपा की बैठक में इस प्रस्ताव को पास कर लिया गया था। अब नगरपालिका का राजस्व अमला इस पर अमल करने में जुटा है। हालांकि गुमटी धारी व ठेले व्यवसायियों को इस काम के लिए नपा में पंजीयन की अनिवार्यता के मुद्दे पर नपा ने निर्णय नहीं किया है।यह भी देखा जा रहा है कि नपा को एक साथ वसूली में राजस्व की कितनी हानि या लाभ होगा....? वहीं कांग्रेस पहले से यह कह रही है कि सीएम ने हाथ ठेला गुमटी विक्रेताओं से वसूली नहीं करने की बात कहीं थी और अब एक साथ छह माह एवं पूरे साल की राशि वसूली का प्रस्ताव लाया गया है। ऐसे में लोगों को गुमराह किया गया।

इन मार्ग पर ठेले व गुमटियां अधिक........................

शहर में बस स्टैंड,चैतन्य मार्ग,छतरी चौराहा,अस्पताल रोड,दिलीप गेट ,सिद्देश्वर मंदिर रोड,पावर हाउस,थांदला गेट,अटल काम्प्लेक्स,राजवाड़ा चौक ,कॉलेज मार्ग, हनुमान वाडी मंदिर रोड व राजगढ़ नाका सहित पूरे शहर में सब्जी,फल एवं अन्य सामग्री विक्रय के लिए लोगों ने ठेले लगाए है। इसके अलावा अस्थायी गुमटियां भी रखी हुई है। इस तरह शहरभर में लगभग हजार ठेलों के अलावा इतनी ही गुमटियां व अन्य है,लेकिन नपा के रिकॉर्ड में कम है। बावजूद नपा ने इन्हें चिन्हित करने के लिए ना तो पंजीयन की व्यवस्था कर रखी है और ना ही शहर में इनकी सीमा और हदें तय कर रखी है। ऐसे में सड़कों तक यह फैली हुई है। अभी नगरपालिका प्रतिदिन 10 रुपए वसूल रही है। इसके अलावा गुमटी एवं चलित वाहनों की राशि अलग-अलग है। लेकिन इस नगरपालिका प्रतिदिन की वसूली के बजाए अब 6 माह में वसूली करेगी।

जल्द ही व्यवस्था पर अमल होगा........................

शहर में गुमटी व हाथ ठेला विक्रेताओं से प्रतिदिन होने वाली वसूली बंद हो गयी है। अब 6 माह या 12 माह की वसूली एक साथ होगी। इनके कार्ड भी बनाए जाएंगे तो जगह भी तय की जाएगी। प्रतिदिन की वसूली से होने वाली परेशानी भी बंद हो जाएगी। इस पर मंथन चल रहा है। जल्द ही व्यवस्था पर अमल होगा।
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जाबिर खान-सीएमओ-झाबुआ।

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