झाबुआ~विधानसभा-चुनाव 2023--भूरियाओ का है बोलबाला,तीनो विधानसभा में शायद आएगा तो भूरिया ही-बागियो के अलावा इस बार भारत आदिवासी पार्टी (बाप पार्टी )भी बिगाड़ सकती है समीकरण....................
दोनो दलों के बड़े स्टार प्रचारको की चुनावी सभा मे आने की अटकलें हुई तेज,जिसमे सबसे बड़ा नाम प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का~~
पलायन ने बढ़ा दिया प्रत्याशियों का प्रेशर-अब निगाहें इसाई व मुस्लिम मतदाताओं पर~~
झाबुआ। संजय जैन~~
झाबुआ विधानसभा चुनाव में इस बार कांग्रेस और भाजपा प्रत्याशी में सीधा मुकाबला,थांदला विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी को एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ सकता है। पेटलावद विधानसभा की बात करे तो कांग्रेस प्रत्याशी को एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ सकता है। बागी प्रत्याशी जहां समीकरण को बदलने पर आमादा है,वहीं दूसरी ओर तीनो विधानसभा में बाप पार्टी के प्रत्याशी भी समीकरण बिगाड़ सकते है। साथ ही पलायन ने भी सभी दलों के प्रत्याशियों की दिल की धड़कन बढ़ा दी है। तीनो विधानसभा चुनाव में सीधा मुकाबला है।
ऊंट किस करवट बैठता है....
वर्तमान स्थिति में झाबुआ विधानसभा की सीट पर कांग्रेस हाईकमान की नजरे गड़ी हुई है। कांग्रेस बागी गुटबाजी के बाद उपजी स्थिति ने कार्यकर्ताओं को पसोपेश में डाल दिया था। अब कांग्रेस आलाकमान के वरिष्ठ यह देखना चाहते है कि ऊंट किस करवट बैठता है....? जानकारों की माने तो कांग्रेस से बगावत कर मोर्चा संभालने वाले बागी जेवियर मेड़ा को कांग्रेस पार्टी अपनी कुशल रणनीति से अपने खेमे में लाने में सफल तो हो गयी है,लेकिन पहली बार बाप पार्टी की उपस्थिति से,अब भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला होना तय है। इस चुनाव में विजयश्री का ताज कौन पहनेगा....? पलायन के कारण इस मुकाबले में ईसाई और मुस्लिम मतदाताओं का योगदान अहम होगा।
दमखम से दंभ भरती हुई नजर आ रही बाप पार्टी ...................
झाबुआ विधानसभा सीट पर काफी कशमकश दिखाई दे रही है। इसकी वजह यह कि यहां ईसाई मतदाताओं की संख्या 25 हजार से अधिक है। इसी कारण 2008 के चुनाव में कांग्रेस ने ट्रप कार्ड खेलते हुए तमाम विरोध के बाद भी जेवियर मेड़ा को मैदान में उतारा था। नतीजन कांग्रेस का दांव खरा उतरा और जेवियर मेड़ा ने विजय हासिल कर सीट कांग्रेस की झोली में डाल दी थी। इस बार कांग्रेस ने डा. विक्रांत भूरिया को मैदान में उतारा है। लेकिन इस बार स्थिति 2008 जैसी नहीं है,इसाई व मुस्लिम समुदाय के एक धड़े ने यह कहकर चांैका दिया है कि जेवियर मेड़ा ने 2008 चुनाव के दौरान उनसे जो वादे किए थे,उन्हे पूरा नहीं किया था। हालांकि वर्तमान स्थिति को देखते हुए इस दावे को ठीक नहीं कहा जा सकता है क्योंकि इस बार बाप पार्टी भी बड़े ही दमखम से दम्भ भरती हुई नजर आ रही है।
पलायन बिगाड़ रहा गणित-जिला निर्वाचन अधिकारी व कलेक्टर चिंतित .............................
जिला प्रशासन,भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों के सामने पलायन एक बड़ी चुनौती बन कर उभरा है। जिला निर्वाचन अधिकारी व कलेक्टर सतत इस बात से चिंतित है कि किस प्रकार मतदान का प्रतिशत बढ़ाया जाए...? इसके लिए काफी प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा है। जिला प्रशासन के प्रयासों को बौना बताते हुए रोजाना सैकड़ों आदिवासी परिवार मजदूरी के लिए गुजरात,राजस्थान,महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों में है। पलायन के कारण सभी दलों के प्रत्याशियों की सांसे फूली हुयी है। पलायन कर सैकड़ों किमी दूर गए हजारों मजदूर परिवारों को सिर्फ मतदान के लिए वापस लाना असंभव सा नजर आ रहा है,लेकिन दीपावली पर्व के साथ चुनाव होने के कारण प्रशासन और दोनो ही प्रमुख दलों को पलायन की समस्या से छुटकारा पाने में कुछ राहत मिलती नजर भी आ रही है। इससे साफ जाहिर होता है कि मतदान का प्रतिशत शायद ही बढ़ने वाला है। जानकारों की माने तो शायद इस बार करीब 64 से 68 प्रतिशत के लगभग ही मतदान होगा। ऐसे में ईसाई व मुस्लिम वोट बैंक कहां मतदान करता है....? यह बात बहुत अहम होगी।
**** देखने को मिल रहा तीनो विधानसभा में भूरियाओ का बोलबाला ****
जिले की तीनो विधानसभा में भूरियाओ का बोलबाला देखने को मिल रहा है। जिले की तीनो विधानसभा में भूरियाओ को बोलबाला तो है ही,वही दूसरी ओर पहली बार बाप पार्टी द्वारा इस बार तीनो विधानसभा में अपने प्रत्याशी उतारने पर राजनैतिक पंडितों का गणित गड़बड़ा गया है। झाबुआ विधानसभा की बात करे तो यहाँ कांग्रेस का एक भूरिया तो दूसरा भूरिया भाजपा प्रत्याशी चुनाव के मैदान में है। थांदला विधानसभा की बात करे तो यहाँ कांग्रेस का एक भूरिया प्रत्याशी मैदान में है। पेटलावद विधानसभा की बात करे तो यहाँ से भाजपा की एक भूरिया प्रत्याशी मैदान में है। तीनो विधानसभा की बात करे तो कूल 4 भूरिया 1 मेड़ा और 1 भाबर प्रत्याशी चुनाव के दंगल में अपना जौहर दिखाने के लिए खड़े है।
दोनो दलों के बड़े स्टार प्रचारको की चुनावी सभा मे आने की अटकलें हुई तेज,जिसमे सबसे बड़ा नाम प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का...................
बात करे भाजपा की तो उनके कई स्टार प्रचारक जिसमे प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी,यूपी के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी व गुजरात के मुख्यमंत्री नितिन पटेल आदि की चुनावी सभा में झाबुआ आने की अटकलें काफी तेजी से चल रही है। वही इसी कड़ी में कांग्रेस की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह आज झाबुआ की तीनों विधानसभा में चुनावी सभा को संबोधित करंगे।
दोनो ही प्रमुख दलों की साख दांव पर लगी हुई है................
स्टार प्रचारकों के झाबुआ आने के अटकलों के दौर से तो यह साफ जाहिर होता है कि इस बार के चुनाव में दोनों ही प्रमुख दलों की साख दांव पर लगी हुई है। यदि उपरोक्त स्टार प्रचारकों के झाबुआ आने की अटकलें सही साबित हो जाती है,तो यह देखना काफी दिलचस्प हो जाएगा कि आदिवासी जनजाति और सामान्य वर्ग के मतदाताओं के बीच इनकी चुनावी सभाएं कितना रंग लाएगी या कहे तो उनका आना कितना सार्थक साबित होगा...? जिसका असर आगामी आने वाले वक्त में चुनाव परिणाम आने के बाद पता चल ही जायेगा ..........
*** एक नजर*** विधानसभा-चुनाव 2018 पर ***
********* झाबुआ विधानसभा
कांग्रेस के निर्दलीय जेवियर मेडा ने 35 हजार 462 वोट कांग्रेस के काटने में कामयाबी हासिल की थी। वही भाजपा के पैराशूट उम्मीदवार के रूप में प्रचलित किये गये एक माह पूर्व ही झाबुआ विधानसभा में दस्तक देने वाले इंजीनियर गुमानसिंह डामोर ने 65 हजार 725 से अधिक मत 26 वे राउंड तक हासिल कर लिये थे तथा कांग्रेस के उम्मीदवार एवं कांतिलाल भूरिया के पुत्र डॉ. विक्रांत भूरिया जिन्हे कांतिलाल ने पुरे समय यही रहकर विजयी बनाने के लिये दिन रात मेहनत की थी,को मात्र 55 हजार 600 मत मिले थे ओर 26 वे राउंड में गुमान सिंह डामोर भाजपा प्रत्याशी के रूप में 10 हजार 125 मतो से डॉ.भूरिया को मैदाने जंग में हराने में कामयाब रहे थे। जिले में भाजपा की नाक बचाने में गुमान सिंह डामोर की अहम भूमिका रही थी।
यदि कांग्रेस के बागी जेवियर मेडा बगावत नही करते तो,कांग्रेस निश्चित रूप से 80 हजार के करीब वोट हासिल करके झाबुआ सीट को भी फतैह कर सकती थी। कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष कांतीलाल भूरीया के गृह नगर झाबुआ विधानसभा में ही कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया था। पहली बार विधायक का चुनाव लड़े भाजपा के अधिकृत प्रत्यााशी इंजीनियर जीएस डामोर ने अपने निकटतम प्रतिद्धंदी झाबुआ की राजनीति के चाणक्य कांतिलाल भूरिया के पुत्र कांग्रेस के डॉ.विक्रांत भूरिया को 10 हजार 125 मतो मतों के अंतर से पराजित कर,भाजपाई विजय पताका लहरायी थी।
यदि कांग्रेस के बागी जेवियर मेडा बगावत नही करते तो,कांग्रेस निश्चित रूप से 80 हजार के करीब वोट हासिल करके झाबुआ सीट को भी फतैह कर सकती थी। कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष कांतीलाल भूरीया के गृह नगर झाबुआ विधानसभा में ही कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया था। पहली बार विधायक का चुनाव लड़े भाजपा के अधिकृत प्रत्यााशी इंजीनियर जीएस डामोर ने अपने निकटतम प्रतिद्धंदी झाबुआ की राजनीति के चाणक्य कांतिलाल भूरिया के पुत्र कांग्रेस के डॉ.विक्रांत भूरिया को 10 हजार 125 मतो मतों के अंतर से पराजित कर,भाजपाई विजय पताका लहरायी थी।
********* थांदला
झाबुआ से ठीक उलट थांदला में भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी कलसिंह भाबर के विरोध में भाजपा के दिलीप कटारा ने 25 हजार 500 के करीब वोट हासिल करके कलसिंह को मात देने के चक्कर में इस क्षेत्र के कांग्रेस के लोकप्रिय उम्मीदवार वीर सिंह भूरिया जो गांधीवादी व्यक्तित्व माने जाते है ने 22 राउंड में 93 हजार 264 वोट हासिल करके भाजपा के कलसिंह भाबर जिन्हे 62 हजार 930 मत मिले थे को करीब 30 हजार 850 से अधिक मतो से चुनावी मैदान में पराजित किया था। यहा बागी दिलीप कटारा,अन्य निर्दलीयो एवं पार्टी के प्रत्याशियों ने भी वोट काटे थे और भाजपा का यह गढ ढह गया था। परिवर्तित भाजपा विधायक कलसिंह भाभर एवं भाजपा बागी निर्दलीय प्रत्याशी दिलीप कटारा दोनों को ही मूहं की खानी पड़ी थी। कांग्रेस के पूर्व विधायक वीरसिंह भूरिया ने नामांकन पत्र दाखिल कर अपने दम पर चुनाव लड़ा था। दोनों प्रत्याशियों को झटका देते हुवें अपने निकटतम प्रतिद्धंदी परिवर्तित भाजपा के कलसिंह भाभर को 30 हजार 850 मतों के भारी अंतराल से पराजित कर कांग्रेस का परचम लहरा दिया था।
********* पेटलावद
पेटलावद विधानसभा की बात करे तो यहा मुख्य मुकाबला 6 बार से इस क्षेत्र की विधायक रही भाजपा की सुश्री निर्मला भूरिया,जिन्हें पूर्व सांसद स्वर्गीय दिलीप सिंह भूरिया की राजनीतिक उत्तराधिकारी माना जाता है तथा हवा का रुख भी निर्मला के पक्ष में बताया जा रहा था। उन्हे कांग्रेस के पूर्व विधायक रहे,वालसिंह मेडा ने अंतिम 24 वे राउंड तक 5 हजार 7 से अधिक मतो की लीड से चुनावी मैदान मे मात देने में कसर बाकी नहीं रखी। सुश्री भूरिया को 23 वे राउंड तक 87 हजार 237 मत मिले थे वही इनके प्रतिद्धंदी कांग्रेस के वालसिंह मेडा को 92 हजार 244 मत मिले थे ओर कांग्रेस ने भाजपा से पेटलावद सीट भी झटक ली थी। विधानसभा निर्वाचन पेटलावद मे कांग्रेस के पूर्व विधायक एंव प्रत्याशी वालसिंह मेड़ा ने 5,007 मतों से विजय हासिल कर कांग्रेस का परचम लहरा दिया था।






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