झाबुआ~क्यू मैनेजमेंट सिस्टम मशीन के इंजीनियर के इंतजार में स्वास्थ्य विभाग खुद लगा हुआ है क्यू में ...........

क्यू मैनेजमेंट सिस्टम फेल,दो माह बाद भी उपकरण चालू नहीं,लाइन में लग रहे मरीज

सुविधाओं के नाम पर सिर्फ बजट खर्च करने का ही काम-आई थी 3 टोकन मशीन,9 रिमोट कंट्रोल,4 बड़ी एलईडी.............................

झाबुआ। संजय जैन~~


सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं के नाम पर स्वास्थ्य विभाग सिर्फ बजट खर्च करने का ही काम कर रहा है। इससे आम लोगों को फायदा हो रहा है या नही,इस पर किसी का ध्यान नहीं है। 2 माह पहले जिला मुख्यालय पर क्यू मैनेजमेंट सिस्टम यानि टोकन सुविधा शुरू की थी। दावा था कि मशीन से टोकन लेने के बाद मरीज को पर्चा बनवाने से लेकर डॉक्टर को दिखाने और दवा लेने के लिए क्यू-कतार में खड़ा नहीं होना पड़ेगा,लेकिन हकीकत में ये सिर्फ बातें ही बनकर रह गईं।एक ओर तो मरीजों को कतार में खड़े होकर ही अपना इलाज करवाना पड़ रहा है,वही दूसरी ओर क्यू मैनेजमेंट सिस्टम मशीन के इंजीनियर के इंतजार में स्वास्थ्य विभाग खुद क्यू में लगा हुआ है।


खा रहे इक्विपमेंट धूल ..........................
सरकारी अस्पताल में प्रतिदिन ओपीडी 400 से 500 मरीजों तक पहुंचती है। इससे लोगों को पर्चा बनवाने से लेकर डॉक्टर को दिखाने तक लंबी कतारों से जूझना पड़ रहा है। 2 माह पहले जब क्यू मैनेजमेंट सिस्टम शुरू हुआ था, जिसके लिए बकायदा 3 टोकन मशीन,डॉक्टरों के नाम आदि दिखाने के लिए 4 बड़ी एलईडी टोकन नंबर दिखाने के लिए डिस्प्ले सहित करीब 9 रिमोट कंट्रोल दिए थे,जो डॉक्टरों के पास रखे गए थे,जो पर्चा आते ही मरीज के टोकन का नंबर दबा कर उसे बुलाएं,लेकिन तब से ही ये इक्विपमेंट धूल खा रहे हैं। उपरोक्त आयी तीन क्यू मैनेजमेंट सिस्टम मशीनो में से एक नेत्र चिकित्सालय,एक जिला अस्पताल और एक महिला मैटरनिटी वार्ड पर लगाई गयी है। यह तीनो टोकन मशीन अपनी अपनी जगह पड़ी पड़ी धूल खा रही हैं। आज भी मरीजों को कतार में लगकर अपना इलाज करवाना पड़ रहा है।

सॉफ्टवेयर के इंतजार में इंजीनियर के भरोसे स्वास्थ्य विभाग.................
सरकारी अस्पताल में धूल खा रहे उपकरणों को चलाने के लिए 2 माह बीतने के बाद भी इंजीनियर नहीं आया है। साथ ही न ही कोई ट्रेंड स्टाफ है। अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि एक बार प्रशिक्षण हो चुका है। इसके बाद भी मशीन चालू नहीं हो पाई हैं। सॉफ्टवेयर अपडेट में कोई प्रॉब्लम है। पहले चालू करवाया था,चलाने के लिए भी प्रशिक्षण दिया था,लेकिन अब लेकिन अब तो सिर्फ इंजीनियर के आने के बाद ही पता चलेगा की मशीन कैसे चलाना है। गौरतलब है की ये मशीनें नयी ही आयी है,फिर इंजीनियर का इंतजार क्यो करना पड़ रहा है।यदि वेंडर के पास पर्याप्त संख्या में इंजीनियर नही थे,तो उसने एक साथ मशीनो की सप्लाई दी ही क्यो....? यह प्रश्न तो शासन को खड़ा करना चाहिए और तुरंत नोटिस जारी कर दंड का प्रावधान भी करना चाहिए।

तत्कालीन कलेक्टर के निर्देश का भी अब तक पालन नहीं.............
2 माह पहले उपकरण आने के बाद भी इस क्यू मैनेजमेंट सिस्टम मशीन का फायदा लोगों को नहीं मिल पा रहा है। तत्कालीन कलेक्टर रजनी सिंह ने वीसी में इस सिस्टम को चालू कराए जाने के निर्देश दिए थे,लेकिन अब तक न तो इंजीनियर आया न ही इस सिस्टम को चालू कराया गया। जिसके चलते मरीजों को अब भी इलाज के लिए कतार में खड़े होना पड़ रहा है। अफसरों को दिखाने के लिए सिर्फ एलईडी कभी कभार चालू की जाती है,लेकिन उसमें भी न तो डॉक्टरों के नाम दिखाए जाते न ही इलाज से संबंधित कोई जानकारी।

क्यू सिस्टम चालू करने इंजीनियर को बोला है,5-6 दिन में आएगा ..................
इंजीनियर को क्यू मैनेजमेंट सिस्टम मशीन चालू करने के लिए बोला है। इंजीनियर अभी बाहर है,उसने 5 से 6 दिन का बोला था। 2 दिन बाद उससे फिर बात करूंगा। टोकन सिस्टम को लगे हुए 2 माह हो चुके हैं।
...........................डॉ.आरएस बघेल-सिविल सर्जन-जिला अस्पताल





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