बड़वानी~पुस्तकालय विशेषज्ञ कार्यकर्ता प्रीति गुलवानिया ने सुझाव दिया~~
बच्चों की कहानियों से सीखें अंग्रेजी, जल्दी होगी प्रगति~~
बड़वानी / किसी भी भाषा को सीखने के चार चरण होते हैं। ये हैं- लिसनिंग, स्पीकिंग, रीडिंग एंड राइटिंग। इसे संक्षेप में एलएसआरआर मेथड कहा जाता है। यही बात अंग्रेजी सीखने के संबंध में भी लागू होती है। इंग्लिश लिसिनिंग के लिए आप यू-ट्यूब चैनल और न्यूज चैनल्स का सहारा लीजिये। स्पीकिंग के लिए आप अपने मित्रों का समूह बनाइये। रीडिंग के लिए प्रारंभ में आप सरल अंग्रेजी वाली किताबें पढ़िये। इस मामले में बच्चों की कहानियों की किताबें और बाल पत्रिकाएं बहुत उपयोगी सिद्ध होंगी। चंपक नाम बाल पत्रिका हिन्दी और अंग्रेजी दोनों में प्रकाशित होती है, जिनमें प्रायः समान कहानियां रहती हैं। आप पहले हिन्दी की कहानियां पढ़ें और फिर अंग्रेजी की कहानियां पढें़गे तो आपको समझने में आसानी होगी। इससे डिक्शनरी कंसल्ट करने की समस्या से आप बच जायेंगे।
इसी तरह अकबर-बीरबल, तेनालीराम, विक्रम बेताल की कहानियां भी अंग्रेजी में प्रकाशित हुई हैं। ये बातें शहीद भीमा नायक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय बड़वानी के स्वामी विवेकानंद कॅरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ द्वारा संचालित कार्यशाल ‘वेरियस वेज़ आॅफ लर्निंग लेंगुएजेस’ विषय पर हुई परिचर्चा में पुस्तकालय विशेषज्ञ कार्यकर्ता प्रीति गुलवानिया ने कहीं। उन्होंने ऐसी अनेक पुस्तकों के उदाहरण दिये, जिन्हें पढ़कर सामान्य ज्ञान और अंग्रेजी भाषा का कौशल भी बहुत अधिक बढ़ सकता है। यह आयोजन प्राचार्य डाॅ. आर. एन. शुक्ल मार्गदर्शन में किया गया। परिचर्चा का संचालन किरण वर्मा ने किया। इस अवसर पर डाॅ. महेशलाल गर्ग और कॅरियर काउंसलर डाॅ. मधुसूदन चैबे भी उपस्थित थे। आभार ग्यानारायण शर्मा, अंशुल सुलिया ने व्यक्त किया।
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