खंडवा~अन्नपूर्णा कंपनी पर इतने क्यों मेहरबान अधिकारी~~

अपने ही सरकारी कोष को लाखों रुपए का चूना लगा रहे अधिकारी बन ठेकेदार ~~

रवि कुमार खंडवा~~



संत सिंगाजी पांवर परियोजना में  रेलवे मेंटेनेंस का काम कर रही है अन्नपूर्णा कंपनी की लापरवाही  लगातार बडती जा रही है  मिली जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है कि जैसे कार्य के दौरान  लगने वाली सामग्री औजार(  टूलबॉक्स) मटेरियल मौके पर पूर्ण रूप से मौजूद नहीं रहते है फिर भी आपसी मिलीभगत के चलते सब कुछ कागजों पर बराबर तरिके से  चल रहा है इतने मेहरबान अधिकारी हैं कि अपने ही बोर्ड के लाखो रूप ए रेलवे मेटनेस कार्य में खर्च की जा रहे हैं  पर बडी  विडंबना है कि काम कराने वाले जिम्मेदार अधिकारी  की मिलीभगत से लाखो रुप ए का अपने ही विभाग को चुना लगा कर खुलेआम काम कर रही कंपनी को फायदा पहुंचाया जा रहा है जो कि देखा जा सकता है पूरा मामला जांच को दस्तक दे रहा है पर उचच अधिकारी के कानो तक जुं तक नही रेग पा रही है कभी जिममेदार औचक निरीक्षण करे तो देखा भी जा सकता है।  पर जिम्मेदार आंखें मूंदे बैठे हैं कागजों पर सब कुछ सही तरिके से पेश कर वरिष्ठ अधिकारी से वाह-वाह लूट लेते हैं  और कंपनी को भरपुर  फायदा देकर अपनी डिमांड भी रख दी जाती है  जो अपने निजी स्वार्थ पूरे करने के  लिए किया जा रहा  हैं और परियोजना  की रेलवे  लाईन  जिस पर  प्रतिदिन कोयले  की गाड़ियां वेगन  चलती है उस मामले  पर इतनी बड़ी अनदेखी  लापरवाही करना गैर जिम्मेदाराना कार्य है मामले को गंभीरता से  देखते हुए  जांच कराना चाहिए .  सरेआम प्रतिमाह सरकारी कोष को चुना लगाने से नहीं चूक रहे हैं , बताते हैं कि यह सब खेल बदस्तूर कई समय से जारी है काम कर रही कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए  अधिकारी बिल बनाने से लेकर पास कराने तक का जिम्मा ले लेते हैं सूत्र बताते हैं यह सब कारगुजारियों के लिए  प्रतिमाह बंधा  हुआ है बताते हैं कि पक्की सेटिंग होने के चलते  कपनी ठेकेदार को  कोई फिक्र करने की जरूरत नहीं हैजिम्मेदार अधिकारी सब कुछ   अपना  काम समझ कर अपना  दायित्व निभाता हैं।  बताते हैं कि वह मोटी रकम  के लेन देन चलते काम कर रही कंपनी को काम  की देखरेख  करने की  जरूरत ही होती  है । पूरा ठेका अधिकारी के पास ही है  बिल बनने  से लेकर बिल पास कराने से लेकर तक संचालन करना जो बारीकी से दिनचर्या में देखा जा सकता है । बताते हैं सरकारी वेतन को लेने के बावजूद भी सरकारी कामो की फिक  ना कर प्राइवेट पर  ज्यादा दिलचस्पी दिखाई जाती है जो क ई सवालों को जन्म देता है, जिसे देखा भी जा सकता है कि जब हिस्सेदारी बराबर की तो कार्य भी बराबर का करना होता है  

आय की जांच 

रेलवे  मेंटेनेंस के कार्य में रिश्वतखोरी  भ्रष्ट अधिकारी को बढ़ावा देकर अपने ही विभाग के सरकारी कोष को भी चुना लगाने  से नहीं चूक रहे ओर  अपने निजी स्वार्थों की पूर्ति के चलते कंपनी से सांठगांठ कर  मिलीभगत कर उसे फायदा पहुंचाने वाले सरकारी अधिकारी की आवक जावक  क्या होना चाहिए पूरा मामला आयकर विभाग की जांच को भी दस्तक दे रहा है, ऐसे  जिम्मेदार सरकारी अधिकारियों की चल अचल संपत्ति की जांच भी होना चाहिए। कितनी संपत्ति अर्जित कर ली है ,  पूरा मामला  शीघ्र ही आयकर विभाग मे भी दस्तक देगा ।


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