बैतूल /शाहपुर~~मनुष्य अहंकार रहित हो जाता है उसे ईश्वर की प्राप्ति होती है - पं नारायण आचार्य~~
सचिन शुक्ला बैतूल /शाहपुर~~
शाहपुर -ग्राम पहावाडी में चल रही भागवत कथा के छटवे दिन कथा वाचक पं आचार्य नारायण जी ने भगवान कृष्ण के जनम की कथा सुनाई। उन्होंने गजेन्द्र मोछ की कथा को विस्तार से समझाते हुए कहा कि गजेन्द्र मोछ स्तोत्र के पहले श्लोक से हमे यह शिक्षा मिलती है कि प्रभु का स्मरण, भक्ती कभी व्यर्थ नहीं जाती। क्योंकि गजेन्द्र ने जो प्रार्थना पिछले जन्म में सीखी उसी के कारण उसका कल्याण हुआ। वह भी जब उसका देह अहंकर मिट गया। जो मनुष्य अहंकर रहित हो जाता है उसे भगवत प्राप्ती हो जाती है।वामन अवतार की कथा सुनाते हुए कहा कि जब मानव दान में पूर्णता आ जाती है, तब भगवान स्वयं याचक बन कर आ जाते हैं और चरण कमल से कल्याण करते हैं। द्वारपाल बन कर उसकी रछा करते हैंं। कथा में ग्राम के भक्त पहले दिन से ही आनंद में डूबकर भजनो में झूमते एवं नाचते नजर आ रहे हैं।
कृष्ण जन्म पर मनाया जश्न
जैसे ही कथा के दौरान भगवान कृष्ण का जन्म हुआ पूरा पांडाल जयकारों से गूंज गया। आचार्य ने कहा कि प्रभू के आते ही माया मोह के बन्धन टूट जाते हैं और संसार रूपी कारागार से मुक्त हो जाता है। भक्ती रूप जमना में आकंठ निमग्न हो जाता है। कथा के दौरान कृष्ण जन्म उत्सव और भजनों पर श्रद्धालु जमकर नाचे। भगवान को माखन मिश्री का भोग लगाकर प्रसाद वितरण किया गया ।महाराज भीष्म अपनी पुत्री रुक्मिणी का विवाह श्रीकृष्ण से करना चाहते थे, लेकिन महराज भीष्म का पुत्र राजी नहीं था। वह रुक्मिणी का विवाह शिशुपाल से करना चाहता था। रुक्मिणी इसके लिए राजी नहीं थीं। विवाह की रस्म के अनुसार जब रुक्मिणी माता पूजन के लिए आईं तब श्रीकृष्णजी उन्हें अपने रथ में बिठा कर ले गए। तत्पश्चात रुक्मिणी का विवाह श्रीकृष्ण के साथ हुआ। ऐसी लीला भगवान के सिवाय दुनिया में कोई नहीं कर सकता। यह कथा दिन रविवार को ग्राम पहावाड़ी में चल रही भागवत कथा पंडित नारायण आचार्य ने कही। उन्होंने कहा कि भागवत कथा एेसा शास्त्र है। जिसके प्रत्येक पद से रस की वर्षा होती है। इस शास्त्र को शुकदेव मुनि राजा परीक्षित को सुनाते हैं। राजा परीक्षित इसे सुनकर मरते नहीं बल्कि अमर हो जाते हैं। प्रभु की प्रत्येक लीला रास है। हमारे अंदर प्रति क्षण रास हो रहा है, सांस चल रही है तो रास भी चल रहा है, यही रास महारास है इसके द्वारा रस स्वरूप परमात्मा को नचाने के लिए एवं स्वयं नाचने के लिए प्रस्तुत करना पड़ेगा, उसके लिए परीक्षित होना पड़ेगा। जैसे गोपियां परीक्षित हो गईं। इस दौरान कृष्ण-रुक्मिणी की आकर्षक झांकी बनाई गई। भागवत कथा में आचार्य ने बताया कि कृष्ण ने तोड़ा था इंद्र का घमंड , घमंड जो अहंकार पतन का कारण बनता है। मनुष्य काे अहंकार नहीं करना चाहिए। श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत एक अंगुली से उठाकर देवताओं के राजा इंद्र का घमंड चकनाचूर कर दिया भागवत कथा में छटवे दिन कथा के दौरान आचार्य नारायण जी ने कहा वृंदावन में जब बारिश नहीं हुई तो लोग इंद्र की पूजा करने लगे। श्रीकृष्ण ने गांव वालों को इंद्र की पूजा करने से रोक दिया। इस पर इंद्र को क्रोध आ गया। उसने तेज बारिश शुरू कर दी। इससे वृंदावनवासी घबरा गए। उसके बाद लोगो को इंद्र के प्रकोप से बचाने के लिए श्रीकृष्ण ने एक अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया। गांव के सभी लोग उसके नीचे बारिश से बचने के लिए आ गए। इससे इंद्र का घमंड टूट गया। कंस के वध का कारण भी उसका अहंकार बना। संगीतमय कथा के दौरान भजनों की धुन पर भक्त मंत्रमुग्ध हो गए। वहीं सोमवार को कथा में सुदामा और भगवान श्रीकृष्ण की कथा का वर्णन कर कथा विश्राम पूर्णाहुति ,भंडारा प्रसादी का कार्यक्रम किया जावेगा । कथा समाप्ति के दिन सोमवार को ग्राम पहावाडी के ग्रामीणों ने कथा स्थल पर पहुंच कर भंडारा प्रसादी लेने के लिए अपील की है

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