बड़वानी~~दया अब किसी के दया की मोहताज नही~~
सद्दाम हाशमी बड़वानी~~
बड़वानी /विकलांगता को हराकर दया अब किसी की दया की मोहताज नही है। ग्राम पोखल्या की 24 वर्षीय सुश्री दया ने 2012 में सरस्वती आजीविका स्वसहायता समूह बनाया और अपनी आवश्यकता की पूर्ति हेतु समूह से कुछ लेन-देन शुरू किया । 10वी तक शिक्षित होने से दया ने समूह का लेखा संधारण का कार्य करने लगी साथ ही गांव के दूसरे स्वसहायता समूह का भी लेखा संधारण का कार्य सम्भाल लिया ।
समूह से जुड़ने के कुछ महिनों बाद ही समूह ने उसे सबसे पहले 3 हजार रूपये का लोन दिया । इस राशि से दया ने बहुत की उत्साह से कटलरी का समान लेकर ग्राम में ही लगने वाले साप्ताहिक बाजार में अपनी दुकान लगाने लगी । उससे उसे प्रति सप्ताह हाट बाजार में 450-500 तक का शुद्ध लाभ होता था ।
इससे उत्साहित दया ने अपनी दुकान और समान बढ़ाने के लिये मिशन के माध्यम से मुख्यमंत्री आर्थिक कल्याण योजना से 1.50 लाख रूपये का ऋण लेकर अपनी स्वयं की स्थाई दुकान ही ग्राम में खोल ली । आज उसे हाट बाजार के अतिरिक्त दिनो में भी प्रतिदिन 150 से 200 रूपये की आमदनी प्राप्त होने लगी है। जिसके कारण दिव्यांग दया आज पूरी तरह आत्मनिर्भर होकर अपना गुंजर - बसर कर रही है।

Post A Comment: