झाबुआ~धड़ल्ले से बिक रहे घटिया कोल्ड ड्रिंक, बिना बिल के सप्लाई- न निर्माता का पता न ही एक्सपायरी डेट~~
बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं बच्चों के लिए हर फ्लेवर में उपलब्ध हैं ऐसे कोल्ड ड्रिंक-छोटे दुकानदारों को की जाती है सप्लाई~~
झाबुआ। संजय जैन~~
शहर,गांव और छोटे कस्बों सहित में इन दिनों कोल्ड ड्रिंक के नाम पर ऐसे पेय बेचे जा रहे हैं, जो सेहत के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं। छोटे दुकानदारों के यहां इनकी सप्लाई बिना बिल के होती है। लोकल स्तर पर बनाए जा रहे इन कोल्ड ड्रिंक की बोतलों पर न तो निर्माता कंपनी का नाम लिखा होता है न ही बैच नंबर न एक्सपायरी डेट। 10 रुपए प्रति बोतल के हिसाब से इनकी बिक्री खूब हो रही है। इनके ज्यादातर खरीददार बच्चे होते हैं। ब्रांडेड कोल्ड ड्रिंक के मुकाबले कीमत आधी से भी कम होने की वजह से निम्न मध्यम और गरीब वर्ग के तबकों के बीच यह ड्रिंक्स धड़ल्ले से बिक रहे हैं।
* छोटे दुकानदार ही फंसेंगे
इस मामले में समस्या यह है कि अगर कार्रवाई करें तो छोटे दुकानदार ही फंसेंगे। यानि विभाग इन्हें बनाने वालों पर नकेल नहीं कस पा रहा है। गांवों और छोटे कस्बों में इस तरह के कोल्ड ड्रिंक सबसे ज्यादा बिक रहे हैं। एक बोतल में अलग-अलग फ्लेवर का पानी भरकर ऊपर से एक स्टीकर चिपका दिया जाता है। कोल्ड ड्रिंक प्रोडक्टस शीताश्री,शिवना,मोज़,डेन्क आदि नाम से बिक रहे हैं। बोतल पर बेस्ट बिफोर 30 डेज यानि 30 दिन के पहले इस्तेमाल करें,तो लिखा है,लेकिन प्रोडक्ट कब बनाया गया,इसका कोई उल्लेख नहीं। अंदर भरे हुए पेय पदार्थ में कचरा साफ देखा जा सकता है।
* दुकानों पर हर फ्लेवर में उपलब्ध है यह ड्रिंक्स
हैरानी की बात यह है कि यह ड्रिंक्स हर फ्लेवर में उपलब्ध हैं। कोला,लेमन,ऑरेंज और मैंगो,जो चाहें उसका फ्लेवर मिल जाएगा। बोतल पर बाकायदा सील युक्त ढक्कन भी रहता है। यानि पहली नजर में लगता है मानो यह बेहद सुरक्षित प्रोडक्ट है।बोतल पर बैच नंबर और अन्य कोई जानकारी नहीं दी जाती है।
* घर में ही बन जाते हैं ऐसे ड्रिंक्स,मशीन की जरूरत ही नहीं
जानकार बताते हैं कि इस तरह के ड्रिंक बनाने के लिए किसी तरह की मशीन या तकनीक की जरूरत नहीं पड़ती। बस पानी में रंग और संबंधित फ्लेवर डालो और ड्रिंक तैयार। बोतल बाजार में मिल ही जाती हैं। उसके साथ सील लगा ढक्कन अलग से आता है। बस बोतल भरकर ढक्कन को हाथ से ही दबाकर लगा दो,एक शानदार प्रोडक्ट तैयार।
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में धडल्ले से बिक रही कोल्ड ड्रिंक की बोतलें।
* बिना बिल के होता है लेन-देन
दरअसल,इस तरह के प्रोडक्ट कहां बनते हैं...? इसका पता लगाना मुश्किल होता है। हालांकि यह तय है कि यह सभी लोकल स्तर पर ही बनते हैं। इन ड्रिंक्स को किस फर्म से खरीदा जा रहा हैए इसका कोई रिकॉर्ड ही नहीं रहता है। ऐसे में सिर्फ दुकानदार पर ही कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि जानकारों का कहना है कि दुकानदारों को जवाबदेह बनाना चाहिए,क्योंकि वे जान बूझकर इस तरह के खतरनाक प्रोडक्ट खरीद रहे हैं। सख्त कार्रवाई होती है तो अन्य दुकानदार खुद ही सावधान हो जाएंगे।
* कानून के तहत दुकानदार भी उतना ही दोषी
नए फूड सेफ्टी एक्ट में किसी मिलावटी प्रोडक्ट का निर्माता ही नहीं बल्कि उसे बेचनेवाला भी उतना ही जवाबदेह व दोषी माना जाता है। कानून के तहत जेल की सजा व तगड़े जुर्माने का प्रावधान है। इसमें कोई दुकानदार यह कहकर नहीं बच सकता है कि उसे प्रोडक्ट की जानकारी नहीं थी। हाल ही में जब मैगी को लेकर कार्रवाई हुई तो उसे बेचने वाले दुकानदार भी घेरे में आए थे।
-करेंगे कार्रवाई...
प्रोडक्ट का निर्माता ही नहीं बल्कि उसे बेचनेवाला भी उतना ही दोषी माना जाता है। कानून के तहत जेल की सजा व जुर्माने का प्रावधान है। हम कार्रवाई करेंगे,अभी छोटे दुकानदार ही घेरे में आ पाते हैं।
.........पंकज अंचल -खाद्य अधिकारी

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