झाबुआ~~जिले के कई स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या 20 भी नहीं, कुछ में तो उससे भी कम-~~

बच्चों के नहीं आने से अधिकांश स्कूलों में लगे रहते हैं ताले- विभाग कब लेगा निर्णय~~

झाबुआ। संजय जैन~~

जिले में कई स्कूल ऐसे हैं जिनमें पढऩे वाले बच्चों की संख्या 19 तक है। इनमें कुछ तो ऐसे हैं जहां बच्चों की संख्या 9 या उससे कम हैं। कागजों में चल रहे आधे से ज्यादा स्कूलों में तो अधिकांश दिनों में ताले ही लटके रहते हैं। इसकी जानकारी शिक्षा विभाग के अधिकारियों को है। लेकिन इस मामले में उनको क्या करना है....? कब करना है.....? अब यह निर्णय तो अधिकारियों को ही लेना है।
शिक्षा विभाग के लिए सिरदर्द
ऐसे स्कूल शिक्षा विभाग के लिए सिरदर्द बने हैं। इन पर हर साल लाखों रुपए पढ़ाई के नाम पर खर्च हो रहे हैं लेकिन इसका फायदा ग्रामीणों को नहीं मिल रहा है। इन स्कूलों में पढऩे वाले दर्जनों ऐसे बच्चे मिलेंगे जहां कक्षा चार और पांच में पढऩे वाले छात्र-छात्राएं पुस्तक ही नहीं पढ़ पाते। शिक्षक अपनी पदस्थी को कायम रखने हर साल बिना पढ़ाए ही वार्षिक परीक्षा में पास करते रहते हैं। इन बच्चों के सामने उस समय समस्या आती है जब आगे की पढ़ाई के लिए दूसरे स्कूलों में पहुंचते हैं। या तो वे फेल होते हैं या पढ़ाई बंद कर देते हैं। संपन्न और मध्यमवर्गीय किसान और ग्रामीणों का भरोसा इन स्कूलों से उठ चुका है। वे बच्चों को किसी पास के स्कूल या फिर प्राइवेट स्कूल में दाखिला दिलाकर शिक्षा दिला रहे हैं।
शिक्षा स्तर सुधारने के प्रयास
जांच और सर्वे के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे स्कूलों की स्थिति सामने आने के बाद शिक्षा विभाग लगातार शिक्षा स्तर ठीक करने की योजनाएं बनता रहा है। इससे इन स्कूलों में पढ़ाई का स्तर कितना ठीक होगा यह समय दर्शाएगा....?
शिक्षा का स्तर देख नहीं पढ़ाते ग्रामीण
शालाओं और शिक्षा के स्तर को देख ग्रामीण भी बच्चों को बाहर या किसी प्राइवेट स्कूल में पढ़ाने मजबूर रहते हैं। पहले शालाओं में बच्चों की संख्या को लेकर फर्जीवाड़ा चलता था लेकिन शिक्षा विभाग ने जब से ऑनलाइन व्यवस्था और आधार लागू किया है गड़बड़ी पर विराम लगा है। स्कूलों में पढऩे वाले बच्चों की संख्या का पता चला है।
कई स्कूलों में ताला पड़ा रहता है
जिले में कई ऐसे स्कूल हैं जहां ताले लगे रहते हैं । कई प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों के स्थान पर कोई गांव का या आसपास का युवक स्कूल खोलता और बंद करता है,वहीं पढ़ता है। शिक्षक तो सिर्फ  चक्कर लगाने जाते हैं। उपस्थिति दर्ज करने पहुंचते हैं। स्कूलों का शिक्षा स्तर कैसा है,यह कई बार अधिकारियों की जांच में सामने आ चुका है।

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