झाबुआ~चुनाव से पहले लाड़ली बहनों के खाते में डाली थी गैस की सब्सिडी,उसके बाद पता नहीं-बढ़ रही लाडलियों में नाराजगी ~~
450 रु.में मिलना था सिलेंडर,खाते में सब्सिडी खंगाल रहीं लाड़ली बहना~~
उज्जवला को भी महंगा मिल रहा सिलेंडर~~
झाबुआ। ब्यूरो चीफ -संजय जैन~~
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना योजना का मुख्य उद्देश्य गांव एवं शहरों में गरीब परिवारों को गैस नेक्शन देकर उन्हें लकड़ी और कंडे के धुएं से निजात दिलाना रहा है,लेकिन उज्ज्वला योजना के कनेक्शन लेने में कमीशन और फिर सिलेंडर रिफिल कराने में रुपए लगने,सिलेंडर भराने के लिए गांव से दूरे जाने जैसे कारणों के चलते उज्ज्वला के कनेक्शन शोपीस बन गए हैं। 2011 की जनगणना के आधार जिले को 2 लाख 31 हजार 319 उज्जवला गैस कनेक्शन का लक्ष्य दिया गया था। खाद्य विभाग ने लक्ष्य के आधार पर अब तक 1 लाख 74 हजार 446 कनेक्शन, पात्र उपभोक्ताओं का उपलब्ध करा दिए गए।
शामिल किया था भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में ..........................
शामिल किया था भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में ..........................
लाड़ली बहनों को शिवराज सिंह चौहान सरकार ने 450 रुपए में गैस सिलेंडर देने का वादा किया था। इस योजना की शुरुआत राज्य स्तर पर 15 सितंबर को हुई थी। चुनाव के दौरान भाजपा ने इसे अपने संकल्प पत्र में शामिल किया था। इसकी पहली किस्त आचार संहिता लगने से पहले 6 अक्टूबर को तो डली,लेकिन इसके बाद से लेकर अब तक एक भी किस्त लाडलियों के खाते में नहीं आई है,इसका मतलब ये है कि लाड़ली बहनों को गैस सिलेंडर 450 रुपए में मिलना था वह नहीं मिल पा रहा है। किस्त दो महीने से खाते में नहीं आ रही है। ऐसे में पता नहीं लग रहा है कि योजना बंद कर दी गयी है या चल रही है।
बढ़ रही लाडलियों में नाराजगी .....................
विधानसभा चुनाव से पहले लाडली बहनों के खाते में गैस टंकी की सब्सिडी मिली थी। तब से अब तक इंतजार हो रहा है,लेकिन सब्सिडी आना बंद हो गई है। इससे लाडलियों में नाराजगी बढ़ रही है। इधर आधार कार्ड को गैस कनेक्शन से लिंक कराने सहित सत्यापन का काम मात्र 10 से 12 प्रतिशत ही हो पाया हैै। 31 दिसंबर तक सत्यापन जिन्होंने नहीं करवाया है उनको अगली बार इसके अभाव में किसी योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
एक बार ही किस्त खाते में आई .......................
इस योजना को लेकर लाडलियों से बात की तो कहा कि जब योजना की शुरूआत हुई,बस तब एक बार ही किस्त खाते में आई है। इन महिलाओं को केंद्र सरकार से मिलने वाली 300 रुपए की सब्सिडी तो मिल रही हैं,लेकिन राज्य सरकार से मिलने वाली सब्सिडी की राशि नहीं मिलने से उन्हें भी महंगे में सिलेंडर खरीदना पड़ रहा है। उज्जवला महिला हितग्राहियों को 630 रुपए में सिलेंडर मिल रहा है। गैस एजेंसी संचालकों का कहना है कि प्रशासन स्तर पर पता करे की गैस सब्सिडी की राशि खाते में क्यों नहीं आ रही है....? राज्य सरकार की ओर से कोई सब्सिडी प्रदान नहीं की जा रही है।
लकड़ी सस्ती पड़ने से रिफिल में रुचि नहीं,सब्सिडी में बढ़ा रुझान...................
उज्ज्वला योजना के तहत जिले के ग्रामीणों ने कनेक्शन तो ले लिए,लेकिन एक बार सिलेंडर खाली हो जाने के बाद दोबारा रिफिल नहीं कराए। गैस की तुलना में लकड़ी सस्ती पडऩे और गांव में ही उपलब्ध होने के कारण ग्रामीण गैस का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। वहीं खाने के स्वाद को लेकर ग्रामीण गैस का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। सब्सिडी नहीं मिलने से बाजार दर पर गैस भरवाने से भी गरीब हितग्राही पीछे हट गए। हालांकि अब 500 रुपए में उज्जवला की रिफलिंग होने से रुचि बढ़ी है क्योंकि 250 रुपए सब्सिडी मिलने लगी है।
बड़ी मुश्किल से होता है परिवार का भरण पोषण .............................
उज्ज्वला कनेक्शन लेने वाले ग्रामीण भी जानते हैं,कि खाना बनाते समय चूल्हे से निकलने वाले धुएं से उनकी आखोंए फेंफड़ों में कई प्रकार की बीमारियां हो जाती हैए इसके अलावा और भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए ग्रामीणों ने गैस कनेक्शन तो ले लिए लेकिन एक बार सिलेंडर खत्म हो जाने के बाद दोबारा रिफिल नहीं कराए। गैस मंहगी है जिसके कारण उसको भराना मुश्किल होता है,सब्सिडी मिलती भी है तो बाद में,पहले तो रुपए लगाने पड़ते हैं। नीलम मेडा ने बताया की पति मजदूरी करते है,मजदूरी में इतना पैसा ही मिल पता है जिसमें परिवार का भरण पोषण बड़ी मुश्किल से होता है। गैस के लिए पैसे ही नहीं बचते इसलिए मजबूर होकर कंडे एवं लकड़ी जला कर चूल्हे से खाना बनाना पड़ता है।
खाना का स्वाद भी बढ़ी वजह......................
महिलाओं ने बताया कि गैस से खाना बनाने पर खाना का स्वाद लकड़ी जैसा नहीं रहता है। इसके अलावा पेट में गैस की शिकायत होने लगी थी,इसलिए भी गैस सिलेंडर दोबारा नहीं भरवाए। लकड़ी गांव में आसानी से मिल जाती है। हमारे खेतों में लगे पेड़ों से निकली जलावन हमें फ्री में ही मिलती है। जबकि गैस के लिए रुपए देने होते हैं। इन्ही कारणों से हमने गैस का इस्तेमाल बंद कर दिया है।
ये थी लाभ लेने की शर्त.............
योजना की शुरुआत में प्रदेश सरकार ने शर्त रखी थी कि जिन भी महिला का लाड़ली बहना योजना में नाम है उसके नाम पर गैस कनेक्शन है तो उस महिला को हर माह 450 रुपए माह में गैस की टंकी दी जाएगी। यदि गैस कनेक्शन उसके पति के नाम पर है तो उसे महिला के नाम पर कराना होगा। तब इस योजना का लाभ मिलेगा,जिसके बाद लाड़ली बहनों की लंबी-लंबी लाइन लग गई थी।
फैक्ट फाइल.......................
कुल गैस सिलेंडर कनेक्शन
37,999
उज्जवला योजना के कनेक्शन
1,74,446
बगैर उज्जवला योजना के कनेक्शन का डाटा विभाग में उपलब्ध नहीं है।
एक बार ही किस्त खाते में आई ..............................
जब योजना की शुरूआत हुई,बस तब एक बार ही किस्त खाते में आई है। इसलिए मजबूर होकर कंडे एवं लकड़ी जला कर चूल्हे से खाना बनाना पड़ता है।
...................सरोजबाई खपेड़-गृहणी
समाधान नहीं हुआ..................
लाड़ली बहनाओं को 450 रुपए में गैस सिलेंडर मिले इसके लिए हमने घंटों लाइन में खड़े रहकर योजना का फार्म भरा थाए,लेकिन एक बार ही इसकी राशि मिली। कई बार गैस एजेंसी पर गए,लेकिन समाधान नहीं हुआ।
.............. विद्या प्रजापत -गृहिणी
हमें नहीं है जानकारी.......................
गैस सिलेंडर में सब्सिडी की राशि पेट्रोलियम कंपनियों के द्वारा हितग्राहियों के खातों में डाली जाती है। हितग्राहियों को सब्सिडी की राशि पूरी मिल रही है या नहीं इसकी जानकारी हमें नहीं है।
..........एलएस राठौर-प्रबंधक जिला उपभोक्ता भंडार,झाबुआ
हमारे पास नहीं जानकारी.......................
हमारे पास इस बात की जानकारी नहीं है कि लाडली बहनों को सब्सिडी एक बार ही क्यों आई...? ये शासन स्तर का निर्णय है। जिन पात्र हितग्राहियों का उज्ज्वला का गैस कनेक्शन नहीं मिल पाया है। चालू वित्तीय वर्ष में उनकी केवाईसी कराकर योजना का लाभ प्रदान किया जाएगा।
.................संजय पाटिल-सहायक आपूर्ति अधिकारी-डीएसओ,झाबुआ


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