झाबुआ~सूर्य होंगे उत्तरायण-दिनभर कब-कौन सा योग रहेगा~~

17 जनवरी से मांगलिक कार्य आरंभ होंगे~~

झाबुआ। ब्यूरो चीफ -संजय जैन~~




 सूर्य की आराधना का पर्व मकर संक्रांति लगातार दूसरी बार 15 जनवरी को मनाया जाएगा। इसके पूर्व 2022 में यह 14 जनवरी को मनाया गया था। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर मकर संक्रांति मनाई जाती है। इस दिन पौष माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी,कुंभ राशि का चंद्रमा रहेगा। मकर संक्रांति पर सूर्य देव के साथ भगवान शिव और आदिशक्ति मां पार्वती की भी आराधना होगी।

कर संक्रांति पर व्यतिपात योग रात 11.11 बजे तक .........................

शहर के मोहित पंडित ने बताया कि 15 जनवरी को मकर संक्रांति पर व्यतिपात योग रात 11.11 बजे तक है। रवि योग सुबह 7.15 से 8.07 बजे तक है। इस योग में पूजा-पाठ और दान-पुण्य से आरोग्य जीवन का वरदान मिलता है। सोमवार को भगवान शिव और पार्वती के साथ का भी योग बन रहा है। यह योग शाम 7.45 बजे तक रहेगा। मां गौरी के साथ भगवान शिव के रहने पर रुद्राभिषेक करने से साधक के घर में सुख और समृद्धि आती है।


इसे कहते हैं उत्तरायण......................

उत्तरायण और दक्षिणायन दोनों की अवधि छह-छह महीने की होती है। जब सूर्य उत्तर दिशा की ओर गमन करते हुए मकर राशि से मिथुन राशि तक भ्रमण करता है तो इसे उत्तरायण कहते हैं। जब दक्षिण दिशा की ओर कर्क राशि से धनु राशि तक का भ्रमण करता है, तो इसे दक्षिणायण कहा जाता है। इस बार सूर्य उत्तरायण 15 जनवरी से होंगे।

 17 जनवरी से मांगलिक कार्य आरंभ होंगे.........................

दरअसल पांच साल बाद यह सोमवार को पड़ रही है,जो विशेष फलदायी रहेगी। मकर संक्रांति पर व्यतिपात-रवि योग का भी संयोग रहेगा। शहर के पंडित व ज्योतिषाचार्य जेमिनी शुक्ल के मुताबिक 14 जनवरी को सूर्य रात 2.44 बजे धनु से मकर राशि में प्रवेश करेंगे। ऐसे में सूर्यास्त के बाद राशि परिवर्तन करने से इस साल मकर संक्रांति का पुण्यकाल 15 जनवरी को रहेगा। इस बार संक्रांति का वाहन अश्व है। खरमास समाप्ति के साथ 17 जनवरी से मांगलिक कार्य आरंभ होंगे।


तिल निर्मित वस्तुओं के दान का विशेष महत्व.......................

मकर संक्रांति के दिन तिल निर्मित वस्तुओं के दान का विशेष महत्व है। इसके साथ ही इस दिन तिल से बने व्यंजन खाए जाते हैं। मकर संक्रांति से पूर्व ही शहर के बाजारों में हर ओर तिल से बने व्यंजनों की दुकानें सज चुकी हैं। गजक कारोबारी रूपश्री मिठाई के संचालक दीपक जैन ने बताया कि वैसे तो सर्दी के मौसम में तिल से बने व्यंजनों-गजक आदि की खास डिमांड रहती है,लेकिन मकर संक्रांति पर इनकी बिक्री काफी बढ़ जाती है। इस वर्ष बाजार में गजक के दाम 300 से 340 रुपए किलो हैं। गजक के साथ ही तिल से बने दूसरे व्यंजनों से भी बाजार महक रहे हैं।
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