झाबुआ~शुरू नहीं हुई है सीएम के निर्देश के बाद अब भी लाइसेंस की प्रक्रिया~~
मीट व मछली दुकानों को शहर से हटाने की कार्रवाई के बीच यह भी बड़ी समस्या-जानवरों का एंटी मार्टम जरूरी~~
झाबुआ। ब्यूरो चीफ -संजय जैन~~
विशेषज्ञों के अनुसार भैंस,बकरा या अन्य जानवर काटने से पहले उनका एंटीमार्टम कराना जरूरी है। ताकि कोई बीमार जानवर काटकर उसका मीट बाजार में न बेचा जाए। ऐसा मीट खाने से लोग फूड पाइजनिंग सहित अन्य गंभीर बीमारियों के शिकार हो सकते हैं लेकिन नगरपालिका ऐसे दुकानदारों के खिलाफ कोई कार्रवाई न कर हाथ पर हाथ धरा बैठा है,जबकि एंटीमार्टम के लिए बकाया फीस भी निर्धारित की गई है।
एंटीमार्टम को लेकर एक्सपर्ट व्यूज.........................
विशेषज्ञों का कहना है कि जानवरों को जेनेटिक डिजीज जानवरों में होने वाली बीमारी होती है। ये सभी बीमारियां उसका मीट खाने वाले इंसान को हो सकती हैं। इसलिए जानवरों का एंटीमार्टम जरूरी है। जिला प्रशासन को चाहिए कि शहर में इस तरह की दुकानें सुनिश्चित की जाए, जहां एंटीमार्टम के बाद निकला मांस ही बिके।
एक को भी जारी नहीं हुई एनओसी.............
शहर में मांस-मटन की दुकानों की संख्या 40 से अधिक है। हैरानी की बात यह है कि इनमें से एक को भी नपा ने अभी तक एनओसी नहीं दी है। इसके अलावा बस स्टैंड व शहर के दर्जन भर इलाकों में बगैर पंजीयन के मीट की बिक्री हो रही है।
हो सकती हैं ये बीमारियां......................
बीमार जानवरों के मीट के सेवन से लोगों को पेट में कीड़े,डायरिया,टीबी,कोलाईटिस-पीलिया आदि रोग हो सकते हैं।
नियमों का पालन कैसे....
-कच्चे मीट की जांच के लिए प्रदेश में नहीं है सरकारी लैब।
-बिकने से पहले एंटीमार्टम की नहीं कोई व्यवस्था।
-जानवरों के अवशेषों को फेंका जा रहा यहां से वहां।
-संक्रमण की रोकथाम के लिए प्रशासन नहीं दे रहा ध्यान।
फैक्ट फाइल...........
-शहर में 40 से अधिक दुकानें शहर में चल रहीं हैं।
-सीएम के निर्देश के बाद अब भी लाइसेंस की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई हैं।
-खाद्य एवं औषधि प्रशासन के रिकार्ड में किसी के नहीं पंजीयन।
-एक भी दुकानदार के पास उचित संसाधन नहीं हैं।
-दुकानों से प्रतिदिन बिक रहा कई किलो मीट।
नहीं है जांच के लिए कोई सरकारी लैब .........................
कच्चे मीट की सैंपलिंग के लिए हम तैयार हैं, लेकिन जांच के लिए कोई सरकारी लैब नहीं है। निजी लैब में चार्ज ज्यादा है। वैसे शासन स्तर से निजी लैब के बीच अनुबंध होने की बात चल रही है।
...........................राहुल अलावा-खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग



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