धार~सवा महीना बीता, फूटे तालाबों के सुधार को लेकर कोई काम नहीं~~

्रहिम्मतगढ़ तालाब की पाल फूटने से तालाब खाली, सिंचाई के उपयोग में आता है पानी~~

नगरपालिका क्षेत्र के लैंडिया तालाब कर पाल ढही, सुधार की बजाय नपा ने कहा हमारा नहीं है तालाब~~

धार( डॉ. अशोक शास्त्री )


धार। अक्टूबर माह की बारिश में ग्रामीण क्षेत्रों में काफी नुुकसानी हुई थी। इस बारिश ने शहर के लैंडिया तालाब और नजदीक के हिम्मतगढ़ तालाब को नुकसान पहुंचाया था। इन दोनों तालाबों की पाल का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था। करीब सवा महीन बीत गए है। इन दोनों तालाबों को सुधारने को लेकर कोई प्रशासनिक कवायद शुरू नहीं हुई है। तालाबों से जुड़े विभागों के अमले चुनाव में जुटे होने की बात कहकर मामले से पल्ला झाड़ रहे है। हकीकत यह है कि अभी तालाब के सुधार की जिम्मेदारी कौन सा विभाग लें, यह भी तय नहीं हो पा रहा है। नतीजे में तालाब फूटने के बाद सूखे पड़े है। ग्रामीण सुधरने का इंतजार कर रहे हैं।
सिंचाई के काम आता है पानी
अक्टूबर माह की आकस्मिक बारिश ने शहर के नजदीक ग्राम पंचायत हिम्मतगढ़ के तालाब को लबालब कर दिया था। इस तालाब को चौसठ जोगिनी तालाब के नाम से भी पहचाना जाता है। प्रकृति इस कदर मेहरबान रही कि तालाब का पानी माता मंदिर के आधे हिस्से को डूबो गया था। लबालब तालाब के बढ़ते पानी के दबाव ने तालाब की पाल को एक और से क्षतिग्रस्त कर दिया था। यह क्षति करीब 15 फीट चौड़ाई से और करीब 30 फीट लंबाई की पाल ढ़हने से हुई थी। इस तालाब का पानी आसपास के कृषकों की सिंचाई के काम आता है। पंचायत ने जनपद को पत्र लिखा। जनपद ने इंजीनियर भेजे। सुधारे कौन यह तय नहीं हो पा रहा है। दरअसल इसमें अनुमानित रूप से 30 से 40 लाख रूपए खर्च होना है। हर विभाग जिम्मेदारी से बच रहा है।
नालों का पानी होता है एकत्रित
बारिश में धार नगरपालिका क्षेत्र के लैंडिया तालाब जिसे खारिया तालाब के नाम से भी पुकारा जाता है। इसको क्षतिग्रस्त कर दिया था। यहां पर तालाब के दूसरे छोर तक पहुंचने के लिए बना हुआ पाल के ऊपर के मार्ग का बड़ा हिस्सा ढह गया। जिसके कारण तालाब सूख चुका है। इस तालाब में शहर के गंदे नालों का पानी एकत्रित होता है। नगरपालिका यहां पर सिवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने के लिए तैयारी कर रही थी। इस तालाब के संरक्षण को लेकर अन्य काम होना थे। अब हालात यह है कि नपा इस तालाब के सुधार की जिम्मेदारी लेने से बच रहा है।
खारिया के बहाव से टूटा हिम्मतगढ़
हिम्मतगढ़ तालाब के फूटने का मुख्य कारण खारिया तालाब रहा है। बारिश में इस तालाब की पाल पर पानी का दबाव बढ़ा। जिसके बाद पाल फूटते ही हिम्मत गढ़ के लबालब तालाब पर दबाव बना दिया था। अब हालत यह है कि हिम्मतगढ़ तालाब को सुधारने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों को महीने भर पहले पत्र दिया गया था, लेकिन तालाब निर्माण से जुड़े प्रमुख विभाग आरईएस और जल संसाधन जैसे विभाग में किसी ने भी सुधार को लेकर कोई कवायद नहीं की है।
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