धार/डही~इलाज के नाम पर तांत्रिक ने महिला को तलवार से किया चोटिल, प्रकरण दर्ज~~
आरोपित तांत्रित के पास हाथ-पैर दुखने की समस्या पर पहुंची थी पीड़िता, हवा का चक्कर बता दिया~~
धार~( डॉ. अशोक शास्त्री )
डही-धार। जिले में छोटे-मोटे रोगों के निदान के लिए बड़वों (तांत्रिक) के पास जाने का चलन अभी भी है। इसके कारण कई मर्तबा बड़ी-बड़ घटनाएं सामने आ जाती है। टीबी रोग हो या सर्पदंश या सामान्य बुखार। अभी भी बड़ी संख्या में अंदरूनी इलाके के ग्रामीण पुराने चलन के अनुसार बड़वों पर अधिक भरोसा करते है। मान्यता है कि बड़वे झाड़-फूंक के माध्यम से बीमारी को भगा देते है। समस्या का निदान कर देते है। इस तरह की मान्यता के चक्कर में 30 वर्षीय महिला को तांत्रिक की क्रिया के दौरान चोटिल होना पड़ा है। बमुुश्किल तांत्रिक के चंगुल से छूटकर महिला ने घटना अपने पति को बताई। जिसके बाद डही थाने में बड़वे के विरूद्ध प्रकरण दर्ज किया है। मामला डही थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बड़वान्या का है। जहां हाथ-पैर दर्द होने पर महिला ने नजदीक रहने वाले तांत्रिक अनिल को समस्या बताई थी।
शरीर पर तलवार के निशान बना दिए
प्राप्त जानकारी के अनुुसार पीड़िता के देवउठनी एकादशी के दिन हाथ-पैर दर्द हो रहे थे। शाम 6 बजे के लगभग मोहल्ले के बड़वे अनिल पिता छप्पन भिलाला के पास गई। अनिल को उसने समस्या बताई, किंतु अनिल ने कहा तुझे हवा का चक्कर हो गया है। मैं तंत्र-मंत्र से इलाज कर दूंगा। पीड़िता ने डॉक्टर से इलाज कराने की बात कही। इस पर तांत्रिक ने उसे बाल से पकड़कर जमीन पर बैठा दिया। जिसके बाद बड़वे अनिल ने उसके भाई जितेन्द्र और एक अन्य को बोला इसे पकड़ो। मैं इलाज करता हूं। दोनों ने पीड़िता को पकड़ लिया। इसके बाद अनिल ने मंत्र पढ़कर पीड़िता के शरीर पर तलवार घीसने लगा। जिसके कारण पीड़िता की हाथ की कलाई, घूठने, हथेली, कांधे पर चोंट आ गई और चमड़ी घीसने से खून बहने लगा। इसके बाद पति उसे लेने पहुंचा और वह घर आ गए। घटना पति को बताई जिसके बाद दूसरे दिन डही थाने में प्रकरण दर्ज कराया गया है।
यह शर्मनाक घटना है
यह शर्मनाक स्थिति है। मामले की जानकारी लगने के बाद पीड़िता को एम्बुलैंस के माध्यम से स्वास्थ्य केन्द्र लाकर उपचार दिया है। समस्त ग्रामीणों से निवेदन है कि बड़वे से इलाज न करवाएं। मैंने सीएचओ हेल्थ वेलनेस सेंटर पर प्रात: 9 से 4 बजे तक प्रतिदिन ओपीडी देखेने के लिए निर्देशित किया है। स्वास्थ्य विभाग की मैदानी टीम को भी निर्देश दिए है कि वे अंधविश्वास में फंसने की बजाय अस्पतालों में इलाज करवाने के लिए ग्रामीणों को जागरूक करें।
डॉ विजय अहरवाल, बीएमओ डही


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