धार~चुनाव ने शहर के विकास कार्यों की गति की धीमी 1 सप्ताह बाद कछुआ चाल से फिर शुरू हुआ बस स्टैंड कार्य~~

नपा ने कई प्रोजेक्ट बनाए, छोटे-छोटे कामों के लिए निकाय में पैसा नहीं~~

धार~( डॉ. अशोक शास्त्री )




धार। विधानसभा चुनाव भले ही विकास के मुद्दे पर लड़ा गया हो, किंतु शहर में विकास की गति थम गई है। नगरपालिका क्षेत्र में प्रचलित काम भी बंद पड़े हुए है। यह वह काम है जो चुुनाव आचार संहिता लगने के पूर्व स्वीकृत होकर प्रारंभ भी हो गए थे। इनमें सबसे महत्वपूर्ण काम धार शहर के आधुनिक बस स्टैंड निर्माण का काम था। आचार संहिता लगने के बाद से ही औपचारिक रूप से काम चल रहा है। फिलहाल काम पूरी तरीके से बंद पड़ा है। इस तरह की स्थिति अन्य प्रभावशाली प्रोजेक्ट में देखी जा रही है। वेटलैंड प्रोजेक्ट के लिए फर्म तय नहीं हो पाई है। इसके अतिरिक्त शॉपिंग कॉम्पलेक्स सहित दुकान निर्माण के प्रोजेक्ट कागजों में तो दिखाई दे रहे है, लेकिन अभी दूर-दूर तक इनके काम शुरू नहीं होने की संभावनाएं नहीं दिख रही है। इस तरह की स्थिति का मुख्य कारण नगरपालिका की आर्थिक स्थिति कमजोर होना बताया जा रहा है।
वार्डों में पार्षद परेशान
चुुनाव के पहले नगरपालिका ने शहर में विकास को गतिमान दिखाने के लिए कई बड़े प्रोजेक्ट बनाए थे। इन प्रोजेक्ट के कारण शहर को विकासशील शहर के तौर पर तब्दील होने की स्थिति दिख रही थी। अब हालात यह है कि बीते एक महीने में विकास की गति रूक गई है। बड़े प्रोजेक्ट ही नहीं छोटे-छोटे काम भी प्रभावित हो रहे हैं। वार्डों में नवनिर्वाचित पार्षदों के कार्य अनुशंसा के पत्र आकार नहीं ले पाए है। निर्वाचित होने के बाद पार्षदों ने वार्ड में क्या किया, इस बात का जवाब वह जनता को देने की स्थिति में नहीं है। इन स्थितियों के कारण एक माह पूर्व पार्षद प्रतिनिधि और इंजीनियर में हाथापाई तक भी हो चुकी है। वर्तमान में कई पार्षद वार्ड में कार्यों के प्रारंभ ना होने के कारण नाराज चल रहे हैं।
पैसे बिना सब सूना
नगरपालिका में जहां राशि ना होने के कारण काम काज प्रभावित हो रहे हैं। वहीं निकाय को अभी तक करीब 1 करोड़ की राशि प्राप्त नहीं हुई है। यह राशि स्ट्रीट वेंडर्स झोन लिंक रोड को हटाने से होने वाले नुकसान के तौर पर प्राप्त होने वाली थी। इसमें रिटर्निंग वॉल का नुकसान भी शामिल था। निकाय ने तत्परता के साथ डिपो के पिछले भाग में स्थित करीब 184 नवनिर्मित पतरा-पोश दुकानों का नामोनिशान मिटा दिया। इसके बावजूद निकाय के हाथ खाली है। वहीं ठेकेदार भी भुगतान के लिए परेशान है।
अमृत 2.0 का काम भी बंद
अमृत 2.0 के तहत शहर के कई सप्लाय लाईनविहीन क्षेत्रों में पेयजल लाईन बिछाई जाना थी। इसी कार्यों में टंकियों के निर्माण सहित नर्मदा जल को संग्रहित करने के लिए तालाब विस्तारीकरण कार्य भी होना है। हालांकि नर्मदा का जल धार में पंचवर्षीय प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन के तहत आना है, किंतु उसके पूर्व के होने वाले कामों की भी शुरूआत नहीं हो पाई है। शहर के विकास के बखान में अमृत 2.0 को भी प्रचारित-प्रसारित किया गया था। इसमें कार्य के लिए फर्म चयन अभी तक नहीं हो पाया है। यह शहर के लिहाज से महत्वपूर्ण कार्य है।
आय बढ़ाने की दरकार
निकाय की चूंगी राशि में भी कटौती हो गई है। वहीं जलकर वसूली में निकाय काफी कमजोर है। संपत्तिकर वसूली में तेजी लाई गई है, लेकिन पुराना बकाया और विद्यमान कर की कुल वसूली में आंकड़े बाजी में शत प्रतिशत की वसूली का लक्ष्य अभी भी सपना ही है। निकाय में राशि का अभाव का असर कर्मचारियों के वेतन वितरण पर भी हो रहा है। सर्वाधिक परेशान आऊटसोर्स के तहत काम करने वाले कर्मचारी हो रहे है।  
परिणामों से पड़ेगा असर
शहर में फिलहाल विकास कार्य के नाम पर सब कुछ ठप्प है। निकाय का अमला आचार संहिता लगने के पूर्व करीब 1 पखवाड़े से अधिक समय तक शासकीय योजनाओं लाड़ली बहना, पट्टा वितरण, गैस कनेक्शन फार्म जमा करने जैसे अनेकों कार्यक्रमों के लगातार क्रियान्वयन में व्यस्त रहने एवं सीएम के लगातार एक के बाद लाईव कार्यक्रमों की व्यवस्था में मशगुल रहा। इसके बाद चुनावी तैयारियों में जुट गया। इस तरह बीते डेढ़-दो महीने से सबकुछ चलने के बावजूद ठप्प पड़ा है। 3 दिसंबर चुनाव परिणामों तक स्थिति सुधरने की स्थिति नहीं दिख रही है।
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