झाबुआ~15 अगस्त को भी पुरानी यूनिफार्म और कलरफुल कपड़े में आये छात्र - महिलाओं से ड्रेस तैयार का सिर्फ दिखावा, कपड़े उपलब्ध कराने के नाम पर कमा रहे फायदा.......................
रैगिंग रोकने सरकारी स्कूलों में नहीं लगी हैं शिकायत पेटी - साथ ही कई आदेश के बाद भी नहीं लगा टिप्पी टैप भी ~~
झाबुआ। ब्यूरो चीफ -संजय जैन~~
सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 80 फीसदी छात्र-छात्राएं पुरानी यूनिफॉर्म में ही स्कूल जाने को मजबूर हैं।कल 15 अगस्त भी आकर चली गयी जबकि जिले के कई स्कूलों में पिछले दो वर्षों से बच्चों को गणवेश ही नहीं मिली है। इससे स्वतंत्रता दिवस के अहम दिन भी विद्यार्थियों को पुरानी यूनिफार्म और कलरफुल कपड़े पहनकर ही स्कूल जाना पड़ा। नए शिक्षा सत्र को शुरू हुए करीब सवा महीने का समय निकल गया है। लेकिन शासकीय प्राथमिक व माध्यमिक शालाओं में शासन से बच्चों को मिलने वाली गणवेश अब तक नहीं दी गई है। अभी जो स्थति है,उसके मुताबिक कुछ विद्यार्थी यूनिफार्म न होने के कारण कलरफुल कपड़े पहनकर स्कूल आ रहे हैं। साथ हीं रैगिंग रोकने सरकारी स्कूलों में शिकायत पेटी नहीं हैं। कई आदेश के बाद भी स्कूलों में टिप्पी टैप नहीं लगा हैं।
स्कूलों में यूनिफॉर्म के लिए बच्चों के खातों दो जोड़ी गणवेश खरीदने के लिए में राशि डाली गई है। पहली से आठवीं तक के छात्र-छात्राओं को यूनिफॉर्म के लिए 400 रुपए दिए हैं। यूनिफार्म की राशि राज्य शिक्षा केन्द्र स्कूल मैनेजमेंट कमेटी को उपलब्ध कराता है और बाद में 400 रुपए प्रति छात्र-छात्रा के हिसाब से इसे बच्चों के खाते में ट्रांसफर किया जाता है। इस राशि से वे यूनिफार्म खरीदते हैं। कक्षा 8वीं में पढ़ने वाले बच्चों के खातों में गणवेश की राशि जमा कराने का दावा किया जा रहा है। जो राशि बच्चों के पालकों के खाते में डाल दी गई है। लेकिन पालकों को मिली या नहीं मिली इसकी जानकारी किसी को नहीं है। प्रशासन का दावा है की हमने राशि जारी कर दी है। जिले के कई स्कूलों में पिछले दो वर्षों से बच्चों को गणवेश ही नहीं मिली है। वहीं कई स्कूलों में वर्ष 2022-23 की ड्रेस पिछले 8 दिनों पहले ही बांटी गई है। जिले की प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय में 2022-23 में 2 लाख 33 हजार 544 बच्चे दर्ज थे। वहीं 2023-24 में 2 लाख 22 हजार 624 बच्चे दर्ज हैं। जिन्हें दो-दो गणवेश स्व सहायता समूह द्वारा सील कर दी जानी है। शिक्षकों का कहना है कि विभाग द्वारा मांगी गई सारी जानकारियां पूरी कर भेज दी गई है। अब ड्रेस कब आएगी इसका हमें पता नहीं।
स्कूलों में एंटी रैगिंग कमेटी बनाना अनिवार्य किया गया था। यह पुराना आदेश था जो पहले भी लोक शिक्षण संचालनालय जारी कर चुका था,परंतु उसका सख्ती से पालन नहीं हो पाया है। चौथी बार भी आदेश का पालन करने के लिए आदेश जारी हुए थे। स्कूलों में एक शिकायत पेटी लगाने का कहा गया था,ताकि पीड़ित छात्र-छात्राएं उसमें अपनी गुप्त शिकायत डाल सकें। हर साल स्कूलों में कोई न कोई घटनाएं रैगिंग से संबंधित आती ही हैं। जिसमें सीनियर छात्र,जूनियर के साथ ऐसी हरकतें करते हैं,जो रैगिंग के दायरे में आती हैं। लेकिन कानून नहीं होने से उचित कार्रवाई नहीं हो पाती थी। लोक शिक्षण आयुक्त के आदेश में साफ है कि रैगिंग में दोषी पाए जाने पर छात्रों को स्कूल से भी निष्कासित किया जा सकता है। शिक्षा आयुक्त के आदेश के मुताबिक रैगिंग पर नियंत्रण रखने के लिए दो सीनियर लेक्चरर,दो उत्कृष्ट छात्र और प्राचार्य की अध्यक्षता में अनुशासन समिति बनेगी,जो स्कूल की हर गतिविधि पर नजर रखेगी।
सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों में साबुन से हाथ धोने की आदत विकसित करने के लिए राज्य शिक्षा केन्द्र ने टिप्पी टैपं-ढलकी-पलटी सुराही लगाने के आदेश पहले जारी किए थे। स्वच्छ विद्यालय अभियान के अंतर्गत यह व्यवस्था करने का निर्णय शासन का था,परंतु अब तक स्कूलों ने टिप्पी टैपं नहीं लगाया है। कई आदेशो की सरासर अवहेलना हो रही है। विभाग के अधिकारियों का मानना है कि भोजन के पहले और टॉयलेट जाने के बाद साबुन से हाथ धोना व्यवहार में शामिल होना चाहिए। अगर स्कूल से ही उनमें यह आदत डाली जाए,तो वे जीवन भर उसका पालन करगे। राज्य शिक्षा केन्द्र ने कई बार निर्देश जारी कर कहा था कि स्थानीय सामग्री का उपयोग कर टिप्पी टैप आसानी से बनाया जा सकता है,जो स्कूल शिक्षकों के मार्गदर्शन में तैयार किया जाए। इसे कैसे बनाना है, उसका तरीका भी बताया गया था।
असल खेल ये- समूहों से फायदा कमा रही बड़ी फर्में.......................
प्रदेश सरकार ने भले ही स्व-सहायता समूह की महिलाओं को फायदा दिलाने के लिए उन्हें स्कूल ड्रेस सिलाई का काम देने का निर्णय लिया हो,लेकिन हकीकत इससे बिलकुल अलग है। समूहों के नाम पर अफसर और इंदौर-भोपाल में बैठी कपड़े की फर्मों का बड़ा खेल है। पिछले साल भी इदौर-भोपाल की फार्मों ने अच्छी क्वालिटी का कपड़ा बताकर समूह सदस्यों को घटिया क्वालिटी के कपड़े उपलब्ध कराएं। कपड़े के साथ उन्होंने इसमें कटिंग करने के नाम पर भी समूह सदस्यों से अलग से पैसे लिए। कटे हुए कपड़े पर मशीन लगाकर समूह की महिलाओं ने स्कूलों को उपलब्ध करा दिए। इस पर उन्हें प्रत्येक यूनिफॉर्म पर बमुश्किल 10 रुपए का मुनाफा हो पाया है।
जिन को अपात्र बताया, उन्हीं को जिम्मा सौंपा.........................
स्कूल ड्रेस तैयार करने में मुख्यालय स्तर से लेकर बड़ी फर्मों तक सबकी सेंटिंग का बड़ा खेल चल रहा है। साल 2021-22 में पहली बार समूहों से तैयार कराए गए यूनिफार्म की रिपोर्ट ठीक नहीं रही। इसको देखते हुए शिक्षा सत्र 2022-23 में कक्षा 1 से 8वी तक पढ़ने वाले बच्चों को प्रशासन ने यूनिफार्म की राशि सीधे खाते में जमा कराने का प्रस्ताव भेजा। जिसमें पिछले साल सामने आई गड़बडिय़ों का हवाला भी दिया गया। इसको लेकर नगद भुगतान की प्रकिया भी शुरू हुई और कुछ बच्चों को नगद भुगतान भी किया। लेकिन इसके बाद सेटिंग का ऐसा खेल शुरू हुआ की जिन समूहों को पहले स्कूल ड्रेस सिलाई में अयोग्य माना,उन्हीं को बाद में स्कूल ड्रेस तैयार करने का काम दे दिया गया। नतीजा यह हुआ कि एक साल बीत जाने के बाद भी हजारो बच्चों को अब तक स्कूल ड्रेस नहीं मिली।
शिक्षा विभाग का मैनेजमेंट फेल ...................
स्कूल ड्रेस से लेकर बच्चों को दी जाने वाली साइकिलों तक हर मामले में शिक्षा विभाग का मैनेजमेंट फेल हो गया। बच्चों को एक-एक साल बाद नया शिक्षा सत्र शुरू हो जाने के तक योजना का लाभ नहीं मिल पाता। पिछले साल सत्र 2022-23 में 6टी और 9वी कक्षा में एडमिशन लेने हजारों बच्चों को अब तक साइकिल ही नहीं मिल सकी। वहीं कक्षा 1 से 8 के हजारों बच्चे स्कूल ड्रेस से वंचित हो गए। ये सारे बच्चे अब अगली कक्षा में चले गए है और पढ़ाई करते हुए एक माह बीत गया। लेकिन पिछले साल दी जाने वाली साइकिल और यूनिफार्म उन्हें कब मिलेगी....? इसको लेकर कोई भी जिम्मेदार जवाब देने की स्थिति में नहीं है।
है यूनिफार्म का इंतजार बच्चों को अब तक ....................
खासकर शिक्षा विभाग के अधिकारी मुख्यालय स्तर से हुए टेंडर व बाहर की फर्मा का हवाला देकर साइकिल की बात टाल देते है। इधर, स्व-सहायता समूह भी अब तक कक्षा 1वी से 8 वी तक के बच्चों की स्कूल यूनिफार्म तैयार नहीं कर सके। हजारों बच्चे स्कूल ड्रेस के इंतजार में ही फटे पुराने कपड़े पहनकर स्कूल जाते हुए परीक्षा देकर अगली कक्षा में पहुंच गए। परीक्षा के दौरान कक्षा 5वी और 8वी के बच्चों सहित सीएम राइज स्कूल के बच्चों को स्कूल ड्रेस के लिए नगद राशि खाते में जमा करा दी। बाकी बच्चों को अब तक यूनिफार्म का इंतजार है।
जानकारी भेज दी है........................
स्कूलों में शिकायत पेटी लगाने का कहा गया था,ताकि पीड़ित छात्र-छात्राएं उसमें अपनी गुप्त शिकायत डाल सकें। स्थानीय सामग्री का उपयोग कर टिप्पी टैपं आसानी से बनाया जा सकता है।यदि ऐसा नही किया गया है तो इसे मैं दिखवाता हु। स्कूल ड्रेस में हमारी ओर से आजीविका मिशन को सारी जानकारी भेज दी गई है। स्कूलों में ड्रेस कब तक बटेगी यह पता करके बताता हूं। पिछले साल पांचवीं और आठवीं के बच्चों की ड्रेस के राशि खातों में डाल दी गई है।






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