झाबुआ~कही सीएम राइज स्कूल बन ना जाय सीएम अस्त स्कूल-जिले में एक वर्ष पहले शुरू किए गए थे,सात सीएम राइज स्कूल~~`

सामान्य स्कूलों की तरह ही चल रहे हैं सीएम राइज स्कूल-न भवन न बस की सुविधा~~

भुगतान पर भरोसा नहीं इसलिए सीएम राइज स्कूल में कोई ऑपरेटर नहीं लगाना चाहता बस~~

झाबुआ। ब्यूरो चीफ -संजय जैन~~



जिले में एक साल पहले शुरू किए गए सीएम राइज स्कूल आज भी सामान्य स्कूलों की तरह ही चल रहे हैं। क्योंकि इनमें से एक भी स्कूल के पास अब तक खुद का सर्वांगीण भवन ही नहीं है। सभी को दूसरे स्कूल की बिल्डिंगों में ही संचालित किया जा रहा है। इस वजह से यहां अब तक सीएम राइज की सुविधाओं को ही विकसित नहीं किया गया है। बच्चों को घर से लाने और ले जाने के लिए निशुल्क बस सुविधा की बात कही गई थी,मगर यह भी जिले में बंद ही पड़ी है। कुछ बस संचालकों से बात भी की लेकिन नियमों में जटिलता के चलते कोई नहीं आ रहा। इसी तरह अधिकांश जगह नर्सरी-केजी की कक्षाएं भी नहीं लग पा रहीं। इनका असर यह है कि इस वर्ष जिले में सभी सीएम राइज स्कूलों का रिजल्ट कोई विशेष नहीं रहा।

जिले में यहां चल रहे सीएम राइज स्कूल...............



जिले में निजी स्कूलों की तरह बेहतर सुविधा देने के लिए सीएम राइज स्कूलों की शुरुआत की गई है, सरकार का इन स्कूलों पर साल भर फोकस भी रहा, लेकिन हकीकत कुछ और ही निकली। पूरे सालभर बच्चों को शिक्षकों की कमी से जूझना पड़ा। जबकि जब ये स्कूल खोले गए थे,तो बेहतर सुविधाएं इनमें दिए जाने के दावे किए गए थे। जिले में सात सीएम राइज स्कूल झाबुआ,रजला राणापुर,मेघनगर,थांदला,खवासा व पेटलावद में संचालित हो रहे हैं,लेकिन परीक्षा परिणाम ने इन दावों की पोल खोल कर रख दी है।

सबसे खराब परिणाम खवासा सीएम राइज स्कूल का रहा था.............................

जिले की सातों उमावि स्कूल को सीएम राइज स्कूल बनाया गया है। लेकिन किसी भी सीएम राइज स्कूल का परीक्षा परिणाम ऐसा नहीं रहा था कि उसकी चर्चा हों। हालांकि मेघनगर, राणापुर और झाबुआ के सीएम राइज स्कूलो ने अन्य चार स्कूलों से बेहतर रिजल्ट दिया था। सबसे खराब परिणाम खवासा सीएम राइज स्कूल का दसवीं में मात्र 15.07 फीसदी और बारहवीं का मात्र 11 फीसदी ही रहा था।

बच्चों को अपने साधन से या पैदल ही जाना होगा स्कूल ......................

इस शिक्षण सत्र में बच्चों को अपने साधन से या पैदल ही स्कूल जाना होगा। सीएम राइज स्कूलों में प्राइवेट की तर्ज पर बच्चों को बस से स्कूल लाने व ले जाने के लिए निशुल्क सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। नियमों की जटिलता के चलते टेंडर बुलाने पर भी किसी बस संचालक ने रुचि नहीं दिखाई। बस संचालकों का कहना है कि बस का रजिस्ट्रेशन स्कूल के नाम पर हो रहा है। इसके लिए 2 से 3 करोड़ रुपए का निवेश करने के बाद भी सरकारी प्रणाली में समय पर भुगतान का विश्वास नहीं है। ऐसे में इस शिक्षण सत्र में बच्चों को अपने साधन से या पैदल ही स्कूल जाना होगा।

सरकार बदल गई या योजना बंद कर दी तो बसों का क्या होगा....

लागत बहुत अधिक आ रही जिलें के सीएम राइज स्कूल में करीब 17 से 21 बसों की आवश्यकता है। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति नई बसें खरीदता है तो उसे 20 बसों के लिए 7 करोड़ रुपए का इन्वेस्टमेंट करना होगा। लोन पर इतना बड़ा इन्वेस्टमेंट कर भी दें तो यह गारंटी नहीं है कि सरकारी तंत्र में उसे समय पर भुगतान हो जाएगा। इसके अलावा टेंडर में शासन ने नई स्कूल बसों की शर्त रखी है। नई बस स्कूल के नाम से ही पंजीकृत होगी। यात्री व प्राइवेट बस नहीं लगाई जा सकेगी। यदि कोई इस तरह बस लगाता भी है तो उसे यात्री बस के मान से 200 रुपए प्रति सीट का टैक्स देना होगा। इस तरह करीब 50 सीटर बस का हर माह का टैक्स ही 10 हजार तक पहुंच जाएगा। शर्त में बस के अंदर महिला कंडक्टर को अनिवार्य किया है। ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में महिला कंडक्टर मिलना भी मुश्किल है। बस संचालक को सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन का पालन करना होगा। इन सब के बाद यह डर है कि सरकार बदल गई या योजना बंद कर दी तो बसों का क्या होगा....?

शिक्षकों की व्यवस्था करना बहुत जरूरी.......................

सीएम राइज स्कूलों का रिजल्ट बिगड़ने का सबसे बड़ा कारण ट्रांसफर नीति के तहत शिक्षकों का आना जाना रहा था। इसके चलते शिक्षकों की कमी साल भर इन स्कूलों में रही थी। ऐसे में थोड़ी बहुत व्यवस्था अतिथि शिक्षकों ने संभाली थी। हालांकि अभी भी शिक्षकों की शत-प्रतिशत एवं अन्य स्टाफ की क मी इन स्कूलों में है। अगर निजी स्कूलों से बेहतर पढ़ाई करवाना है तो शिक्षकों की व्यवस्था करना बहुत जरूरी है।

नहीं बन पाई बिल्डिंग पूरे साल........................


अभी तक जिले के सातो सीएम राइज स्कूलों की बिल्डिंग नहीं बन पाई है। ऐसे में जगह की कमी भी भरपूर रही। इस साल भी बैठक व्यवस्था परेशानी का कारण बनेगी। इसे देखते हुए जितनी सीट इन स्कूलों में होंगी उतने ही बच्चों को अब एडमिशन दिया जाएगा। गत वर्ष प्रदेश में सीएम राइज स्कूल शुरू किए गए थे। दावा था कि इनमें बच्चों को निजी स्कूल की तर्ज पर सुविधाएं दी जाएंगीं और उसी के अनुसार पढ़ाई होगी। इन स्कूलों के लिए सर्व सुविधायुक्त भवन बनने थे, मगर एक दम से बिल्डिंग न होने के कारण सभी स्कूलों को दूसरे शासकीय स्कूल भवनों में संचालित कर दिया गया और कहा गया था कि जब सीएम राइज स्कूल की बिल्डिंग बन जाएंगीं, तो फिर नए भवनों में शिफ्ट करेंगे।

                
              *** बॉक्स ख़बर ***

उमावि को अस्त कर बनाये जा रहे सीएम राइज स्कूल,लेकिन किसके निर्देश से जिम्मेदारों को नही है पता....



गौरतलब है कि जिले की सातों उमावि को अस्त या यूं कहें कि खत्म करके सीएम राइज स्कूल बनाये जा रहे है। यदि हम बात करे तो झाबुआ उमावि की जो एस्टेट टाइम से हायर सेकेंडरी स्कूल थी जिसे फिर नियमों को ताक में रखकर उमावि बना दिया गया,जबकि नियमानुसार उमावि के लिए अलग से बिल्डिंग का निर्माण करना था। खैर,अब जिले की सातों उमावि को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है और उस पर सीएम राइज स्कूल ताने जा रहे है। इस संबंध में जब हमारी टीम ने सहायक आयुक्त निशा मेहरा से चर्चा कर उनसे पूछा की जिले की सातो उमावि स्कूलों को खत्म करके सीएम राइज स्कूल बनाने हेतु प्रशासन ने कोई लिखित में आदेश जारी किया है क्या और क्या पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा इसके लिए कोई एनओसी जारी की है .........? इस पर उन्होंने बताया कि उपरोक्त बातों की मुझे कोई भी जानकारी नही है। यह निर्माण तो शासन द्वारा तय की गयी प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है। जब हमने तय प्रक्रिया के बारे में उनसे पूछा तो उन्होंने गोल-मोल जवाब दिया की मुझे इसे देखना पड़ेगा,प्रक्रिया के बारे में मुझे कोई जानकारी नही है। अब हमारा प्रशासन से सवाल है कि आखिर उमावि स्कूलों को खत्म कर,सीएम राइज स्कूल बनाने हेतु किसी के पास लिखित में निर्देश है क्या...? यदि है तो किसके पास...? कृपया हमें सूचित करने का सहयोग प्रदान करे। यदि निर्देश नही है तो इसकी बारीकी से जांच कर दोषियों पर तुरंत कार्रवाई करने की दरकार है।

                                                                                    *** बॉक्स खबर ***

इन सुविधाओं का था दावा......................
-इन स्कूल में विश्व स्तरीय बुनियादी संरचना
-केजी से 12वीं तक की कक्षाएं
-व्यावसायिक शिक्षा युक्त पाठ्यक्रम
-स्टाफ का क्षमता संवर्धन
-संसाधन युक्त प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय और पाठ्येतर गतिविधियां
-शत-प्रतिशत शिक्षक एवं अन्य स्टाफ
-सभी स्कूल में स्मार्ट कक्षाएं और डिजिटल लर्निंग

अभी इस तरह हो रही है पढ़ाई..................
-जिले के एक भी स्कूल में बच्चों के लिए परिवहन सुविधा नहीं है।
-स्कूलों में केजी की कक्षाएं नहीं लग रहीं। कक्षा 1 से पढ़ाई कराई जा रही है।
-भवन न होने से स्कूलों में संसाधनयुक्त प्रयोगशालाएं और पुस्तकालय का अभाव है।
-स्कूलों में शत प्रतिशत शिक्षक का अभाव है। 

बसें स्कूल के नाम पर रजिस्टर्ड होती हैं ..............

आजकल बसें स्कूल के नाम पर रजिस्टर्ड होती हैं लेकिन कोई अपने नाम से पंजीयन कराता है तो उसे स्कूल को लीज पर देना होगा। इसके लिए लीज फीस व अन्य प्रक्रिया रहती है। स्कूल बस का टैक्स 13 सीटर से अधिक पर 1 रुपए प्रति सीट प्रति माह लगता है। 13 सीटर से कम के वाहन पर लाइफ टाइम टैक्स लगता है।
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जिला परिवहन अधिकारी-कृतिका मोहटा

काम पीआईयू को दिया गया है.......................

जिले के सभी सीएम राइज स्कूलों की बिल्डिंग निर्माण के लिए बजट आ चुका है। यह काम पीआईयू को दिया गया है। अभी स्कूलों की क्षमता के हिसाब सुविधाएं शुरू की हैं। जैसे ही इनके भवन बन जाएंगे,तो पूरी सुविधाएं बच्चों को मिलेंगी। यह बात सही है कि इस बार सीएम राइज स्कूलों का बोर्ड का रिजल्ट भी सामान्य स्कूलों की तरह रहा है। कुछ बस संचालकों से बात भी की लेकिन नियमों में जटिलता के चलते कोई नहीं आ रहा।
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निशा मेहरा-सहायक आयुक्त-आदिवासी विभाग,झाबुआ




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