झाबुआ~डॉ चंचल की "अकेला होना" ने
रचा इतिहास,बनी कालजयी कविता~~

झाबुआ। झाबुआ के साहित्य साधक डॉ रामशंकर चंचल की नई कविता ने इतिहास रच दिया है। अभी तक चालीस हजार लोगो द्वारा सुनी गई और उन सभी ने चालीस हजार और लोगो को सुनाई।

आज देश ही नहीं, पुरे विश्व पटल पर अद्भुत रूप से बहुत ही सुनी और सराही गई यह रचना के बारे में डॉ चंचल का कहना है कि यह मेरे जीवन के बहुत करीब है में इसी तरह का हूँ। यह सच है मेरे जीवन का यह मोक्ष दर्शन का अध्यात्म दर्शन, मेरी मन और आत्मा से निकल कागज पर उतर आयी यह रचना है। यह लिखी गई रचना नहीं,बनाई गई रचना नहीं, बल्कि ईश्वर से मिला आशीर्वाद है,जो खुद मन से निकल कागज पर चला आया और आज सभी के दिलों को रास भी आ रहा है। 
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