झाबुआ~सरकार का आदेश-समर्थन मूल्य से कम में न खरीदें उपज,यहां मनमाने दाम-किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है,आदेश का ठीक ढंग से पालन न होने से

33 साल बाद मई में जुलाई जैसी बारिश के चलते,शायद 10 मई बाद भी खरीदी रहेगी जारी............

झाबुआ। संजय जैन~~


 जिले की मंडियों में गेहूं और सरसों की समर्थन मूल्य से कम बोली लगाई जा रही है। जबकि मंडी प्रशासन सिर्फ सैंपल लेने की औपचारिकता निभा रहा है। वहीं मजबूरन किसान को कम दाम में अपनी उपज व्यापारियों को बेचना पड़ रही है। जिले में अब तक करीब 49 हजार मीट्रिक टन गेहूं किसान व्यापारियों के बेच चुके हैं। जो कि समर्थन मूल्य पर खरीदी गई मात्रा से तीन गुना ज्यादा है। समर्थन मूल्य पर अब तक 16 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया है।

उठाना पड़ रहा है किसानों को नुकसान ................................
सरकार ने भले ही समर्थन मूल्य से कम में किसानों की उपज न खरीदने का आदेश निकाल दिया है,लेकिन इस आदेश का ठीक ढंग से पालन न होने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। आलम यह है कि जिले की मंडियों में गेहूं और सरसों की समर्थन मूल्य से कम बोली लगाई जा रही है। लेकिन मंडी प्रशासन की ओर से कम बोली लगाने वाले व्यापारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। इस साल सरकार ने गेहूं 2125 रुपए प्रति क्विंटल तय किया है। जबकि मंडी में व्यापारी दो हजार से लेकर 2100 रुपए प्रति क्विंटल तक गेहूं की बोली लगा रहे हैं। मजबूरन किसान को भी कम दाम में अपनी उपज बेचना पड़ रही है और घाटा उठाना पड़ रहा है।

बेचना पड़ रही है किसानों को कम दाम में अपनी उपज..............................
गेहूं का समर्थन मूल्य 2125 रुपए,मंडी में दाम 2000 से 2100 रुपए तक,सरसों का समर्थन मूल्य 5450 रुपए मंडी में दाम 4500 से 4750 रुपये 750 से 900 रुपए तक कम लगा रहे सरसों का भाव जिले की मंडियों में सरसों का भाव इस साल 4500 से 4750 रुपए प्रति क्विंटल चल रहा है। जबकि सरसों का समर्थन मूल्य 5450 रुपए प्रति क्विंटल है। व्यापारी सरसों की गुणवत्ता हल्की बताकर किसानों की उपज की 750 से 900 रुपए तक कम में बोली लगा रहे हैं। वहीं किसानों को मजबूरी में कम दाम में भी अपनी उपज बेचना पड़ रही है।

औपचारिकता-सैंपल लिए, लेकिन जांच करने कोई नहीं पहुंचा........................
प्रशासन ने जिले की सभी मंडी सचिवों को आदेश दिया है कि मंडियों में गेहूं, सरसों,चना और मसूर की समर्थन मूल्य से कम बोली नहीं लगना चाहिए। लेकिन इसमें शर्त यह है कि उक्त उपज की गुणवत्ता एफएक्यू के मापदंडों पर खरी उतरना चाहिए। ऐसे में मंडी में समर्थन मूल्य से कम दाम में जो उपज बिक रही है, उसके सैंपल लेने की औपचारिकता तो सोसाइटी,मंडी प्रशासन निभा रहा है। लेकिन उसकी गुणवत्ता जांचने के लिए अब तक कोई भी अधिकारी नहीं पहुंचा है, जिससे अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि व्यापारियों ने किसानों की जो उपज खरीदी है,उसकी गुणवत्ता में कोई कमी थी या नहीं।

व्यापारियों पर नहीं की जा रही कार्रवाई...................
किसानों का कहना है कि जिले के व्यापारी समर्थन मूल्य से कम में किसानों की फसल खरीद रहे हैं। जबकि प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा हैं। उनका कहना है कि जिले के व्यापारियों को आदेश दिया जाए कि वे समर्थन मूल्य से कम बोली नहीं लगाई जाएगी।

33 साल बाद मई में जुलाई जैसी बारिश........................
मई माह की शुरुआत होते से बारिश का रिकॉर्ड टूट गया। सन् 1990 के बाद मई माह में इतनी अधिक बारिश दर्ज हुई। मई माह भीषण गर्मी के लिए जाना जाता है। बावजूद इसके 15 साल में सबसे कम तापमान के साथ इसकी शुरूआत होने की संभावना है। मई माह में बेमौसम हो रही बारिश के चलते यह संभावना साफ नजर आ रही है कि सरकार 10 मई के बाद भी उपज की ख़रीदी जारी रखेगी।

इस बार नहीं तपेगा मई..........
मान्यता है कि मई माह में सूर्य पृथ्वी के सबसे निकट होता है,भू-मध्य रेखा से कर्क रेखा की ओर बढ़ता है,इसीलिए मई माह में भीषण गर्मी पड़ती है। राजस्थान से आने वाली गर्म हवा लू चलाती है। लेकिन इस बार साल 2021 जैसी स्थिति बनने की संभावना है। कारण लगातार सिस्टम सक्रिय हो रहे है। बूंदाबांदी व हवा का दौर चल रहा है। ऐसे में मई में इस बार तापमान अधिक चढ़ने की संभावना नहीं है। माह की शुरूआत भी राहत भरी रहेगी। मौसम वैज्ञानिक का कहना है कि मई में भी लगातार सिस्टम सक्रिय रहने से इस बार लू नहीं चलेगी। तापमान भी सामान्य या सामान्य से नीचे रहने की उम्मीद है।

*** बॉक्स खबर ***
10 मई बाद भी शायद खरीदी रहेगी जारी............
33 साल बाद मई में जुलाई जैसी बेमौसम बारिश की वजह से प्रदेश की कई मंडियों में गेहूं गीला होने के कारण उपज को काफी नुकसान हुआ है। वैसे तो समर्थन मूल्य पर उपज खरीदने की अंतिम तिथि10 मई है,लेकिन मई माह में बेमौसम हो रही बारिश के चलते यह संभावना साफ नजर आ रही है कि सरकार 10 मई के बाद भी उपज की ख़रीदी जारी रखेगी। ऐसे में उपज की ख़रीदी का निर्णय आगे अब शायद जिले लेवल पर ही लिया जाएगा।
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बोली कम लगाई होगी...........
समर्थन मूल्य से कम दाम में गेहूं,सरसों की बोली न लगाए जाने को लेकर आदेश निकला है। लेकिन उसमें यह है कि उपज एफएक्यू के मापदंडों पर खरी होना चाहिए। यदि गुणवत्ता हल्की है तो व्यापारी कम बोली लगा रहे होंगे।
.......................संजय पाटिल,डीएसओ-झाबुआ

सैंपल की जांच नहीं हुई...............
जो व्यापारी अपनी उपज लाते हैं,उसकी व्यापारी बोली लगाते हैं। समर्थन मूल्य से कम दाम में किसान अपनी मर्जी से उपज बेचते हैं। सोसाइटी उनकी उपज का सैंपल लेकर रख लेते हैं। हालांकि इन सैंपल को जांचने के लिए कोई नहीं आया है।
.........................नब्बूसिंह मेडा,प्रभारी सचिव कृषि उपज मंडी-झाबुआ


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