झाबुआ~महिलाओं को होती है ज्यादा परेशानी ,आए दिन यात्रियों से की जाती है अभद्रता-बसों में किराया सूची नहीं लगी हैं-~~
आरटीओ फ़ोन ही रिसीव नही करती, तो आमजन किससे और कैसे शिकायत करें .....................
नगर से भोपाल-इंदौर के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में चलने वाली अधिकांश बसों में कई सुविधाओं का अभाव है। बस में न तो दुर्व्यवहार होने पर शिकायत करने के लिए हेल्प लाइन नंबर लिखे गए हैं और न ही अन्य सुविधाएं हैं। इससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा आरटीओ ने जो यात्री बसों में किराया सूची नहीं लगवाई है।
महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं ..........................
शहर से संचालित बसें,मैजिक आदि यात्री वाहन महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं हैं। इन वाहनों में ड्राइवर, कंडक्टर का पुलिस वेरिफिकेशन भी नहीं है। इसी तरह महिलाओं के लिए सुरक्षित सीट भी नहीं है। वहीं किसी बस में सीट है भी तो कंडेक्टर रुपए के लालच में लंबी दूरी की सवारी को पहले सीट पर बैठाता है। बस में यदि किसी यात्री के साथ दुर्व्यवहार होता है तो उसकी शिकायत करने के लिए हेल्पलाइन नंबर भी नहीं लिखे हैं। सीसीटीवी कैमरे तो किसी भी बस में लगे ही नहीं हैं। इसी तरह सवारियों को बिठाने के लिए हर कहीं बीच सड़क पर ही बस रोक दी जाती है। इससे पीछे चलने वाले राहगीरों को परेशानी होती है।
महिलाओं के लिए सुविधाओं का अभाव .....................
विभिन्न रूटों पर चलने वाली बसों में महिलाओं के लिए सुविधाओं का अभाव है। आमतौर पर बसों में महिलाओं के लिए सीट आरक्षित रखने का भी नियम है, लेकिन अधिकांश बसों में ऐसी सुविधा नहीं है। महिलाओं को यात्रा करने में सबसे ज्यादा दिक्कत होती है। मैजिक में चालक खचाखच सवारियां भर लेते हैं। कई गांवों में यात्रियों के लिए यही वाहन सहारा हैं। इससे भी यात्रियों को मजबूरन इनमें यात्रा करना पड़ती है।
नहीं लिखे हेल्पलाइन ............................
शासन ने बसों में हेल्पलाइन लिखने के निर्देश दिए हैं, लेकिन परिवहन विभाग व पुलिस प्रशासन का हेल्पलाइन नंबर नहीं लिखा गया है। ऐसे में यदि किसी यात्री को अव्यवस्था या दुर्व्यवहार को लेकर शिकायत करनी हो तो वह किसी तरह की शिकायत नहीं कर सकते हैं। आरटीओ ने हुए अभी तक संचालकों को नोटिस तक नहीं दिए हैं।
बसों में यह होना चाहिए इंतजाम ......................
जीपीआरएस सिस्टम से सभी वाहन जुड़े होने चाहिए। ड्राइवर, कंडेक्टर का पुलिस वेरिफिकेशन तथा उसकी पूरी जानकारी होनी चाहिए। यह जानकारी पुलिस के अलावा वाहन मालिकों के पास भी होना चाहिए। इसके अलावा यह जानकारी ड्राइवर सीट के पीछे भी दर्ज होना चाहिए। इसमें नाम के साथ मोबाइल नंबर भी दर्ज होना चाहिए। यात्री बस की तर्ज पर पूरे रूट की जानकारी का उल्लेख होना चाहिए। वाहन मालिक के पास भी यात्री की पूरी जानकारी होना चाहिए।
ड्राइवर की न नेम प्लेट, न वर्दी ...................
प्रशासन के निर्देश हैं कि बस वाहनों के ड्राइवर व कंडक्टर को वर्दी पहनना अनिवार्य है। साथ ही वर्दी में नेम प्लेट भी लगी होना चाहिए। इससे यात्री उनका नाम जान सकते हैं। इससे वह नाम सहित शिकायत कर सकें। इसका भी पालन नहीं हो रहा है। गौरतलब है कि यात्रियों को आपात स्थिति से निपटने के लिए सफर के दौरान नजदीकी पुलिस स्टेशन व हेल्पलाइन नंबरों को अपने साथ रखना चाहिए। इससे काफी हद तक असुविधा से बचा जा सकता है।
बसों में नहीं लगी किराया सूची .......................
जिला परिवहन अधिकारी के निर्देश के बाद भोपाल-इंदौर तथा ग्रामीण रूटों पर चलने वाली बसों में किराया सूची लगानी थी। अभी तक बसों में किराया सूची चस्पा नहीं की गई हैं। अभी यात्रियों से मनमाने हिसाब से ही किराया वसूला जा रहा है।
निर्देश दिए जाते हैं ...........................................
बस चालकों को नियमों का पालन करने समय-समय पर निर्देश दिए जाते हैं। हालांकि यह काम आरटीओ का है। अभी कंडेक्टर व क्लीनर किसी का भी पुलिस वेरिफिकेशन नहीं है।
.............................सुरेंद्र गड़रिया-टीआई,झाबुआ
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इस मामले जब आरटीओ कृतिका मोहता से उनके मोबाइल पर चर्चा करनी चाही,तो हर बार की तरह उन्होंने फ़ोन ही रिसीव नहीं किया। इस रवैये की शिकायत पत्रकारों ने पहले भी कलेक्टर से की थी। बावजूद इसके उनके बर्ताव में कोई भी फर्क अभी तक देखने में नहीं आया है।
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