झाबुआ~जिले की स्कूल बसे दौड़ रही राम भरोसे- गाइड लाइन बनकर रह गयी,सिर्फ साइड लाइन.. ..........
स्कूल बसों की चेकिंग और सुरक्षा के इंतजाम बेहद जरूरी....
कब होगा सर्वोच्च न्यायालय की गाइड लाइन पर स्कूल बसों का संचालन .......
सुप्रीम कोर्ट ने स्कूली बच्चों की बसों में सुरक्षित आवागमन के लिए गाइडलाइन जारी की थी। सुप्रीम कोर्ट के गाइड लाइन के तहत केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड एवं अन्य संस्थाओं ने स्कूल बसों के संबंध में कई मापदंड तय किए हैं। इन मापदंडों का स्कूली बसों में कही से कही तक पालन ही नही किया जा रहा है या यह भी कह सकते है की हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी निर्धारित गाइड लाइन बनकर रह गयी है, सिर्फ साइड लाइन।
स्थिति जस की तस बन जाती ............
सड़क सुरक्षा के लिए बातें तो बड़ी बड़ी होती है,लेकिन अमल नहीं किया जाता। जब तक अभियान चलता हैए तब तक ही सुधार दिखता है। इसके बाद स्थिति जस की तस बन जाती है। अनफिट स्कूली बसें दौड़ती दिखाई देती हैं, तो टेंपो और रिक्शा में क्षमता से अधिक बच्चे बैठे होते हैं। नियमों की अनदेखी अलग से की जाती है। स्कूली बच्चे भी दो पहिया वाहन से आते-जाते दिखाई देते हैं। घर से शुरू हुई लापरवाही सड़क और स्कूल के भीतर तक दिखाई देती है। यानी ना तो अभिभावक ध्यान दे रहे हैं और ना ही पुलिस सख्ती कर रही है। स्कूल भी कुछ नहीं कर रहे हैं। सड़क सुरक्षा के लिए बातें तो बड़ी बड़ी होती हैं, लेकिन अमल नहीं किया जाता। जब तक अभियान चलता है,तब तक ही सुधार दिखता है। इसके बाद स्थिति जस की तस बन जाती है।
साल में एक बार भी जिस चालक पर हुआ जुर्माना उसे नहीं रखा जाए.................
स्कूल बसों में जीपीएस सिस्टम एवं सीसीटीवी कैमरे लगना अनिवार्य है। जिन स्कूल बसों में छात्राएं होती हैं वहां पर एक शिक्षित परिचालिका,स्कूल स्टाफ होना चाहिए। चालक के पास भारी वाहन का कम से कम 5 वर्ष का अनुभव होना चाहिए। ऐसा चालक नहीं रखा जाएगा जिस पर एक वर्ष में दो बार से अधिक लाल बत्ती सिग्नल के उल्लंघन,निर्धारित गति सीमा से तेज वाहन चलाने,शराब पीकर वाहन चलाने चलाने के लिए एक वर्ष में एक बार भी जुर्माना हुआ हो।
बस में एंट्री और एग्जिट के लिए दो अलग-अलग दरवाजे हों.................
स्कूल बस का रंग पीला होना चाहिए। स्कूल बस के आगे एवं पीछे पर स्कूल बस लिखा होना चाहिए। यदि अनुबंधित बस पर ऑन स्कूल ड्यूटी लिखा होना चाहिए। प्राथमिक उपचार के लिए फर्स्ट एड बॉक्स,निर्धारित मानक के अनुसार गति नियंत्रक यंत्र,खिड़कियों पर समानांतर ग्रिल,अग्निशमन यंत्र की सुविधा होना चाहिए।
जिम्मेदारों का ध्यान ही नही....................
अधिकतर स्कूलों की बसों में क्षमता से कई अधिक छात्र और छात्राओ को-ठूस ठूस कर बैठाया जा रहा है। बसों के संचालन में गाइड लाइन का पालन तो ठीक, हर चार पांच दिन बाद कोई नया ड्राइवर बसों को अपनी मनमर्जी से सड़कों पर दौड़ा भी रहा है, जिस पर जिम्मेदारों का ध्यान ही नही है।
की जा रही है संचालन कराने की तैयारी ........................
सर्वोच्च न्यायालय की गाइड लाइन पर स्कूल बसों का संचालन कराने की तैयारी की जा रही है। जिले में स्कूल बसों की चेकिंग की की जाएगी,निर्धारित मापदंडों एवं नियमों का पालन न होने पर उनके विरुद्ध कार्रवाई होगी।
.....................कृतिका मोहटा-आरटीओ,झाबुआ।
सुप्रीम कोर्ट के गाइड लाइन के तहत स्कूल बसों के संबंध में यह है तय मापदंड......
1-स्कूल,कॉलेज बसों को पीले रंग से पेंट किया जाना चाहिए।
2-बसों के आगे और पीछे बड़े अक्षरों में स्कूल बस लिखा जाए।
3-विद्यालय,कॉलेज के लिए उपयोग में लायी जाने वाली किसी भी बस में निर्धारित सीटों से अधिक संख्या में बच्चे नही बिठाए जाएं।
4-बसों में अनिवार्य रूप से ष्फर्स्ट एड बॉक्स की व्यवस्था हो।
5-बस की खिड़कियों में आड़ी पटिटयां अनिवार्य रूप से फिट करवाई जाएं।
6-प्रत्येक बस में अग्निशमन यंत्र की व्यवस्था हो।
7-बस पर स्कूल का नाम और टेलीफोन नम्बर अवश्य लिखा हुआ होना चाहिए।
8-बस के दरवाजे पर सुरक्षित चिटकनी लगी हो।
9-बच्चों के बैग रखने के लिए सीटो के नीचे जगह की व्यवस्था होनी चाहिए।
10-सुरक्षा की दृष्टि से लाते-े जाते समय एस्कॉर्ट के रूप में बस में एक व्यक्ति होना चाहिए। यह यथासंभव स्कूल का एक शिक्षक होना चाहिए। यदि बस में छात्राएं हों तो महिला शिक्षिका की उपस्थिति हो।
11-सुरक्षा की दृष्टि से बच्चों के माता.पिता या स्कूल के शिक्षक को भी बस मे यात्रा कर सुरक्षा मापदंडों को जांचना चाहिए।
12-वाहन चालक को भारी वाहन चलाने का कम से कम पांच वर्ष का अनुभव होना चाहिए।
13-यदि कोई ड्राइवर वर्ष में दो बार से अधिक लेन जंपिंग या सिग्नल जंपिंग जैसे नियमों का उल्लंघन करने या अनाधिकृत व्यक्ति से वाहन चलवाने का दोषी पाया जाता है तो उसे ड्राइवर नहीं रखना चाहिए।
14-यदि कोई ड्राइवर वर्ष में एक बार भी ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन जैसे ओवर स्पीड, नशे में वाहन चलाना या खतरनाक तरीके से वाहन चलाने का दोषी पाया जाता है तो उसे ड्राइवर नहीं रखना चाहिए।
15-स्कूल बसों और लोक परिवहन यानों में स्पीड गवर्नर अनिवार्य रूप से होना चाहिए।
16-स्कूल बसों में दो कैमरे अनिवार्य रूप से चालू स्थिति में हों, जिसमें एक कैमरा आगे की ओर तथा एक कैमरा पीछे की ओर होना आवश्यक है।
17-स्कूल बस में जीपीएस सिस्टम अनिवार्य रूप से चालू हालत में लगा हुआ होना चाहिए।
18-स्कूल बस में सफर करने वाले छात्र-छात्राओं की लिस्ट नाम, पता, ब्लड ग्रुप और बस स्टॉप, जहां से छात्र-छात्राओं को पिकअप और ड्रॉप किया जाना है,की सूची ड्राइवर अपने पास रखेगा।




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