धार~विनिंग केंडिडेट होना चाहिए उम्र का कोई काई मायना नहीं, सरकार नंबरों से ही बनती है- विजयवर्गीय~~
प्रवास संवाद कार्यक्रम के तहत धार जिले में भाजपा के नेताओं से की मुलाकात~~
पत्र परिषद् में कहा- हम राहुल का सम्मान करते है, लोकतंत्र से स्वयं को बड़ा मानने की उनकी मानसिकता का विरोध है~~
पूरी भाजपा विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुट गई है। चुनाव के पूर्व रूठे और घर बैठे नेताओं से संवाद और विमर्श कर समन्वय बनाने की कोशिशे शुरु हो गई है। इसको लेकर अलग-अलग जिलों में प्रवास संवाद कार्यक्रम के माध्यम से प्रभावशाली व वरिष्ठ नेता पूर्व पदाधिकारियों, पूर्व जनप्रतिनिधियों सहित वरिष्ठजनों से मेल-मिलाप कर रहे है। कार्यक्रम के तहत देश के वरिष्ठ नेता और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय शुक्रवार को धार पहुंचे थे। श्री विजयवर्गीय ने यहां पत्रकारों से चर्चा की और उनके सवालां के जवाब दिए। श्री विजयवर्गीय ने कहा कि हम हर पोलिंग बुथ पर कार्यकर्ताओं की टीम बना रहे है। पोलिंग सशक्तिकरण का कार्य पूरे देश में चल रहा है। उद्देश्य इसका यही है कि बूथ जीतेंगे तो चुनाव जीतेंगे। हमारा बूथ पर कार्यकर्ता सक्रियता से खड़ा हुआ है और उसकी क्षमता है वह बूथ से चुनाव जीता देगा तो हम आराम से चुनाव जीत जाएंगे। उन्होंने प्रवास संवाद कार्यक्रम को पार्टी का नियमित कार्यक्रम बताया। उन्होंने कहा कि विमर्श करना और मुद्दो पर चर्चा करना यही कार्यक्रम का उद्देश्य है।
जीतने वाला 70 का तो भी चलेगा
पत्र परिषद् में श्री विजयवर्गीय ने पत्रकारों के सवालों के जवाब पर कहा कि पार्टी जीतने वाले उम्मीदवारों को ही अवसर देगी। विनिंग केंडिडेट कौन है यह महत्व रखेगा। सरकार भी आखिर नंबरों से ही बनती है। जीतने वाला 70 का हो तो भी मौका मिलेगा और युवा हो तो भी मिलेगा। उम्र का कोई मायना नहीं है। जहां तक युवाओं का अवसर मिलने की बात का सवाल है, प्रत्येक चुनाव में भाजपा कम से कम 25 प्रतिशत युवाओं को अवसर देने का प्रयास करती है।
विश्वास छोटा पर प्रभावशाली
प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को लेकर किए गए एक सवाल पर श्री विजयवर्गीय ने कहा कि उनका कसूर ही कसूर है। उन्होंने जनता को किए गए कोई भी वादे नहीं निभाए। ना कर्ज माफी हुई और ना ही बेरोजगारी भत्ता युवाओं को दिया गया। उन्होंने बदले की भावना से कार्रवाई की। किसी का घर तोड़ा तो किसी की दुकान हटवाई। विश्वास एक छोटा किंतु प्रभावशाली शब्द है। आज लोगों को भाजपा में विश्वास है। मोदी में विश्वास है। भाजपा की रीति-नीति में विश्वास है। यह सब हमने अपने काम से हासिल किया है, जो कांग्रेस हासिल नहीं कर पाई।
लोकतंत्र से बड़ा बनने की उनकी कोशिश
राहुल गांधी को लेकर किए गए एक सवाल पर उन्होंने कहा कि हम उनका सम्मान करते है। वे नेहरू खानदान के प्रपौत्र है, किंतु कोई व्यक्ति अपने आप को लोकतंत्र की जितनी व्यवस्थाएं है उससे ऊपर समझने लगे वह गलत है। क्या राहुल गांधी लोकसभा से बड़े व्यक्ति है। लोकसभा के बिल को फाड़ने का अधिकार रखते है। क्या वह न्याय पालिका से बड़े है। क्या राहुल गांधी जितनी भी संवैधानिक संस्थाएं है क्या उनसे बड़े है। लोकतंत्र से स्वयं को बड़ा समझने की उनकी मानसिकता का हम विरोध करते है।


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