आद्य शंकराचार्य जयंती पर विशेष ~~

*देश की चार पीठों के जरिए सनातन परंपरा को एक सूत्र में बांधने वाले आदि शंकराचार्य की जयंती*~~

सनातन परंपरा में आदि शंकराचार्य जी को भगवान शिव का अवतार माना जाता है , जिनका जन्म 788 ई. में केरल के कलादी गांव में हुआ था । मान्यता है कि आदि शंकर के माता-पिता यानि शिवगुरु और विशिष्ठा देवी बहुत दिनों तक नि:संतान थे , लेकिन जब उन्होंने भगवान शिव की साधना की तो महादेव ने स्वयं प्रकट होकर उनके घर में जन्म लेने का उन्हें वरदान दिया । इसके बाद आदि शंकर का जन्म वैशाख मास के शुक्लपक्ष की पंचमी तिथि को हुआ । इस साल आदि शंकर की जयंती 25 अप्रैल 2023 को मनाई जाएगी. आइए आदि शंकरचार्य की जयंती पर उनके जीवन से जुड़ी बड़ी बातों को विस्तार से जानते हैं ।
          डाॅ. अशोक शास्त्री के अनुसार इस साल आदि शंकराचार्य का 1235 वां जन्मोत्सव मनाया जाएगा । हिंदू मान्यता के अनुसार जिस वैशाख मास के शुक्लपक्ष की पंचमी तिथि को आदि शंकर का जन्म हुआ था । 25 अप्रैल 2023 को प्रात:काल 09:39 बजे तक रहेगी. ऐसे में उदया तिथि के अनुसार शंकराचार्य जयंती का पावन पर्व आज 25 अप्रैल 2023 को मनाया जाएगा ।
          डाॅ. अशोक शास्त्री ने बताया कि आदि शंकराचार्य ने सनातन परंपरा को एक सूत्र में पिरोने के लिए देश के चारों कोनों में चार मठों की स्थापना की । जिसमें दक्षिण में श्रृंगेरी मठ , पूर्व में गोवर्धन मठ , पश्चिम में शारदा मठ और उत्तर में ज्योतिर्मठ स्थापित किया । आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित इस पावन पीठों पर उनकी परंपरा से जुड़े आचार्य जुड़े हुए हैं , जिन्हें शंकराचार्य कहकर संबोधित किया जाता है ।
          धर्म की रक्षा के लिए बनाए अखाड़े
          डाॅ. अशोक शास्त्री ने कहा कि आदि शंकराचार्य ने वेद और वेदांत के जरिए सनातन परंपरा को देश के कोने-कोने में फैलाने का काम किया । आदि शंकर ने अपने प्रवचन एवं भक्ति स्तोत्रों के जरिए लोगों को ब्रह्म का सही ज्ञान कराया । आदि शंकराचार्य ने सत्य सनातन धर्म की रक्षा के लिए दशनामी संन्यासियों के अखाड़े बनाए और उन्हें वन , अरण्य , पुरी , आश्रम , भारती , गिरि , सरस्वती आदि के नाम दिए । आदि शंकराचार्य ने अपना पूरा जीवन लोगों को धर्म का सही ज्ञान देने में लगा दिया । आदि शंकर कहना था कि सबसे उत्तम तीर्थ मनुष्य का मन होता है । जिस किसी ने इसे शुद्ध कर लिया उसे कहीं जाने की आवश्यकता नहीं होती है । हिंदू मान्यता के अनुसार 32 वर्ष की अवस्था आदि शंकर ने समाधि ले ली थी ।
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