***** खबर का असर ***** त्वरित...................  

झाबुआ~खबर * ड्रेस और किताबों के नाम मची लूट * संज्ञान में आते ही कलेक्टर ने जारी किया प्रभावशाली आदेश

हर्ष ही हर्ष पालकों में -तत्कालीन कलेक्टर बोरकर की याद दिला दी...............

इस आदेश से मुझे कुछ भी फर्क नही पड़ा..................जितेंद्र सिंह राठौर

झाबुआ। संजय जैन~~



कलेक्टर तन्वी हुडडा को जिले में ड्रेस और किताबो के नाम पर मच रही लूट के बारे मे,शक्रवार 10 अप्रैल को इसी एक मात्र अख़बार में प्रकाशित समाचार से संज्ञान में आते ही उन्होंने स्कूल संचालकों,पुस्तक-प्रकाशकों और विक्रेताओं के एकाधिकार को समाप्त करने के उद्देश्य से एक प्रभावशाली आदेश 13 अप्रैल गुरुवार को जारी किया।

आदेश में लोक कल्याण का उद्देश्य सबसे प्राथमिकता पर...........................
पूरे जिलेभर में निजी स्कूलों के संचालकों द्वारा छात्रों और पालकों को निर्धारित दुकानों से ही गणवेश,जुटे,टाई,किताबें और कॉपियां आदि खरीदने के लिये मजबूर कर बाध्य किया जा रहा है। जो की एक अक्षम्य अपराध की श्रेणी में आता है। आदेश में लोक कल्याण का उद्देश्य सबसे प्राथमिकता पर रख,उपरोक्त लूट पर तुरंत अंकुश लगाने हेतु आदेश में नियामक बोर्ड की विधिक रूप से अधिकृत एजेंसी एनसीईआरटी,मप्र पाठ्य पुस्तक निगम आदि के द्वारा प्रकाशित पुस्तकों के अतिरिक्त अन्य प्रकाशकों की पुस्तकों को पूर्णत: प्रतिबंधित कर दिया है। साथ ही अनावश्यक सामग्री जो निर्धारित पाठ्यक्रम से सम्बंधित नही है,उसको किसी भी हाल में खरीदने हेतु सेट में समावेश नही किया जा सकेगा।

समय उपलब्ध नही था-उल्लंघन करने पर धारा 188 के तहत कार्यवाही की जाएगी......................    
यह आदेश जन साधारण की सुविधा हेतु तत्काल प्रभावशील कर दिया है। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि प्रशासन के पास इतना समय नही था कि जनसामान्य व सभी पक्षों को उक्त सूचना की तामीली की जा सके। अत: यह आदेश धारा 144/2 के अंतर्गत एक पक्षीय रूप से पारित कर दिया गया। उक्त आदेश के उल्लंघन करने पर भा.द.वि. की धारा-188 के तहत कार्यवाही की जाएगी।
 
इस आदेश से मुझे कुछ भी फर्क नही पड़ा...............................
नवागत कलेक्टर के उपरोक्त आदेश से तो लगता है की झाबुआ की बागडोर अब बहुत अर्शे के बाद सही हाथों में आ गयी है। गत 2 वर्षों से मैं नगर की एकमात्र अंग्रेजी माध्यम की बुनियादी स्कूल की कमजोर बुनियाद और असुविधाओं के बारे में सतत लिखित में शिकायत करता रहा,लेकिन प्रशासन हर बार की तरह धृतराष्ट्र की तरह आंखे मूंदे बैठा रहा। यहाँ तक की एक नशेड़ी की लाश भी गत वर्ष स्कूल में मिली थी। तब भी जिले के अधिकारी आंखे मूंदे बैठे रहे। जबकि इस घटना के पहले से मैंने डीपीसी रालूसिंघ सिंगार और जिला शिक्षा अधिकारी ओपी बनडे को कई बार स्कूल के हालात और असुविधाओं के बारे में अवगत भी कराया था। हमेशा की तरह दोनों अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते रहे,डीपीसी कहते रहे की यह स्कूल तो डीईओ को देखना चाहिए और डीईओ कहते रहे की यह स्कूल तो डीपीसी को देखना चाहिए। अंत: पिछले वर्ष ही प्रशासन की ऐसी दयनीय स्थिति को देखते हुए,मैंने मेरी बालिका का नाम इस स्कूल से कटवाकर निजी स्कूल केशव इंटरनेशनल में उसका दाखिला करवा दिया। हालांकि क लेक्टर के उपरोक्त आदेश से मुझे और मेरे जैसे कई पालकों को कोई फर्क नही पड़ा है क्योंकि इस स्कूल की तरह ही कई स्कूलों में अग्रिम राशि जमा करवाकर बाले-बाले ही पुस्तको का वितरण स्कूलों में कर दिया जाता है। शायद उपरोक्त आदेश में ऐसे स्कूलों की करामात रोकने हेतु कुछ भी निर्देश जारी नही किये है।
...................जितेंद्र सिंह राठौर-पालक,झाबुआ

                         *** बॉक्स खबर ***
पालकों में हर्ष ही हर्ष-तत्कालीन कलेक्टर बोरकर की याद दिला दी..........................
जब इस आदेश के बारे में लोगों की प्रतिक्रिया जानने के लिए हमारी टीम ने नगर का भ्रमण किया तो अधिकतर पालकों का कहना था की नवागत कलेक्टर ने तत्कालीन कलेक्टर चंद्रशेखर बोरकर की यादों को ताजा कर दिया है। उनके इस आदेश से अब आगे लग रहा है की आगे शिक्षा माफियाओं,शराब माफियाओं,खनिज माफियाओं,अवैध धंधे के सफेद पॉश कारोबारियों,भृष्ट अधिकारियों, तथाकथित स्वार्थी समाजसेवियों और मुख्यत: भु-माफियाओं को भूमिगत हो जाना पड़ेगा या तो समय रहते वे संभल जाय और या तो सुधर जाय,नही तो उनको बुल डोजर का सामना भी करना पड़ सकता है ऐसा हमारा मानना है। कुछ लोगो का कहना था कि देर से आये लेकिन दुरुस्त आये की तर्ज पर उपरोक्त आदेश असक्षम पालको के लिए वरदान तो साबित अवश्य हुआ है,लेकिन जिन्होंने कर्ज लेकर अपने बच्चों के लिए पुस्तके खरीद ली है वे बेचारे अब क्या करेंगे....? अब उन्हें तो इस आदेश की कॉपी दुकानदार को दिखाकर अपनी राशि वापस मांगना चाहिए, यदि दुकानदार आना कानी करता है तो उसकी लिखित में शिकायत कलेक्टर या जिला शिक्षा अधिकारी को देना चाहिए और इसकी सूचना मीडिया को भी प्राथमिकता से देना चाहिए।

खबर का असर-त्वरित...................  
गोरतलब है की इसी एक मात्र अख़बार ने शनिवार 8 अप्रैल को * ड्रेस और किताबो के नाम मची लूट * नामक शीर्षक से प्रमुखता से समाचार प्रकाशित कर प्रशासन का ध्यान पूर्ण रूप से आकर्षित किया था। जिसके बाद प्रशासन तुरंत हरकत में आया और त्वरित निर्णय लेकर इस लूट को रोकने हेतु,मात्र 3 दिन में ही आदेश जारी भी कर दिया। वैसे लोगो की इस बात से मैं सहमत भी हु कि उनको तत्कालीन कलेक्टर बोरकर की याद आ गयी है। मेरे पत्रकारिता के जीवन मे मैंने कुछ ही दृढ़ इक्छा शक्ति रखने और त्वरित निर्णय वाले कलेक्टरों को देखा है,जिसमे शायद एक ये नवागत कलेक्टर भी जुड़ जाएंगे। मेरा अनुभव कहता है की अब समाचार लिखने के बाद त्वरित निर्णय पर एक अलग ही संतोष,सम्पूर्ण ज़िले की मीडिया को अवश्य प्राप्त होगा। मेरा आमजन और मेरे पाठकों से निवेदन है की यदि उपरोक्त आदेश का कोई भी पालन नही करता है तो एक जिम्मेदार नागरिक बनकर लिखित में शिकायत प्रशासन को अवश्य करे। आप मुझे मेरे मोबाइल नंबर 9425101357 पर भी संपर्क कर सकते है।
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सख्त निर्देश जारी किए है..........................
कलेक्टर महोदया ने गुरुवार 13अप्रैल को आदेश जारी किया है। जिसके चलते निर्धारित दुकानों से ड्रेस और पुस्तके खरीदने हेतु पालकों को कोई भी निजी स्कूल बाध्य नही कर सकेगा। यदि कोई इस आदेश का उल्लंघन करते पाया गया तो उसकी मान्यता रद्द करने तक की भी कार्यवाही की जाएगी।
.................ओपी बनडे-जिला शिक्षा अधिकारी,झाबुआ


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