धार~प्रदर्शन नियति ना बन जाए-कहां से दें हर माह वेतन, चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि में 40 प्रतिशत का कटौत्रा~~

भाजपा पार्षदों-सीएमओ ने कर्मियों के साथ की बैठक, सफाईकर्मियों की हड़ताल समाप्त, एक माह का वेतन जारी  ~~

सरकारी कटौत्रा कर्मियों पर भारी, मामला मार्च माह की चुंगी क्षतिपूर्ति राशि ना आने से वेतन वितरण का~~

बढ़ता जा रहा है योजनाओं का बोझ, चार-पांच महीने बगैर वेतन कैसे चलाए कर्मचारी घर~~

धार ( डाॅ. अशोक शास्त्री )। 

नगर निकायों में राज्य शासन द्वारा चुंगी क्षतिपूर्ति के एवज में दी जाने वाली राशि में कटौत्री कर्मचारियों पर भारी पड़ रही है। इस राशि से निकायों में वेतन जारी किया जाता था। कटौत्रा होने से नियमित वेतन देने में दिक्कतें हो रही है। इसके चलते निकाय भी परेशान है। वहीं कर्मचारियों को वेतन के लिए हड़ताल-प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है। ताजा मामला धार नगरपालिका से जुड़ा हुआ है। जहां बीते चार-पांच महीने का वेतन बकाया होने के चलते सफाई अमले ने हड़ताल कर दी। इस मामले में वेतन ना देने के कारणों की पड़ताल की गई तो पता चला कि निकाय को मिलने वाली चुंगी क्षतिपूर्ति में पिछले 4-5 महीने से लगभग 40 प्रतिशत का कटौत्रा किया जा रहा है। हालत यह है कि अप्रैल् आधे से अधिक समाप्त हो चुका है। मार्च माह की चूंगी क्षतिपूर्ति राशि करीब डेढ़ करोड़ निकाय को प्राप्त नहीं हुई है।  
पेंशन, अंशदान में भी दिक्कतें
नगरपालिका धार राजस्व बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, किंतु चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि में कटौती ने दिक्कतें बढ़ा दी है। करीब सवा करोड़ रुपए अनुमानित क्षतिपूर्ति मिलता था। जिसमें पिछले 6 महीने में लगातार कटौत्रा किया जा रहा है। शासन से मिलने वाली राशि से कटौत्रे से वेतन के अतिरिक्त पेंशन, अंशदान जैसे कार्यों में भी दिक्कतों हो रही है। सर्वाधिक दिक्कतें आऊटसोर्स कर्मचारियों के सामने है। करीब साढ़े 8 हजार के वेतन में काम करते है। चार से पांच महीने की तनख्वाह बकाया होने से घर चलाना मुश्किल हो रहा है। इसे सीधे-सीधे कर्मचारियों के शोषण के तौर पर देखा जा रहा है। इस मामले में आऊटसोर्स कर्मियों के टेंडरिंग प्रक्रिया में भी सुधार होना चाहिए। टेंडर लेने वाली कंपनी अपने कर्मियों को वेतन समय पर दें। यह सुनिश्चित होना चाहिए। निकाय से भले ही उसे देरी से भुगतान हो।
कर्मियों के समर्थन में कांग्रेस का ज्ञापन  
नगरपालिका में दैनिक वेतन सफाई कर्मचारी एवं आऊटसोर्स कर्मियों ने वेतन ना मिलने की दिक्कतों के चलते मंगलवार को अचानक काम बंद का ऐलान कर दिया। बुधवार सुबह कचरा संग्रहण की गाड़ियां शहर में नहीं घूमी। शहर में साफ-सफाई नहीं हुई। कर्मचारियों के समर्थन में कांग्रेस के पार्षद व प्रतिनिधियों ने वेतन देने की मांग को लेकर एसडीएम को आवेदन सौंपा। जिसमें बताया कि वेतन नहीं मिलने के कारण बच्चों की फीस, बीमारियों में इलाज किराना एवं अन्य खर्च के लिए सफाई कर्मियों के पास पैसा नहीं होने के कारण उनकी हालत बद से बदतर हो रही है। आवेदन सौंपने के दौरान नपा में नेता प्रतिपक्ष करीम कुरैशी, पार्षद ईश्वरसिंह ठाकुर, पार्षद प्रतिनिधि अजय सिंह ठाकुर, रईस शेख, लियाकत पटेल, बंटी डोड, बरसात सिसौदिया, मनीष कन्नौज शामिल थे।  
बॉक्स-1
भाजपा पार्षद-सीएमओ की कर्मियों के साथ बैठक, हड़ताल समाप्त
स्वच्छता अभियान को लेकर निकाय में युद्ध स्तर पर काम चल रहा है। ऐसी स्थिति में वेतन की मांग को लेकर एक दिन की कामबंदी ने विपक्ष को मौको दे दिया। वहीं भाजपा परिषद् भी कटघरे में खड़ी हो गई। इन स्थितियों को देखते हुए भाजपा पार्षदों और सांसद-विधायक प्रतिनिधियों ने हड़ताली कर्मियों के प्रतिनिधि मंडल के साथ सीएमओ निशिकांत शुक्ला की मौजूदगी में बैठक की। इस दौरान आरोप-प्रत्यारोप के साथ सुलह का रास्ता भी निकल गया। सीएमओ निशिकांत शुक्ला ने 1 महीने की तनख्वाह बुधवार को कर्मियों के खाते में जमा करा दिए। वहीं 1 माह का वेतन 15 दिनों के भीतर खातों में डलवाने का आश्वासन भी दिया है। जिसके बाद दोपहर में कर्मियों ने कामबंदी खत्म की और व्यवस्थाएं सुचारू हो गई है। बैठक में अध्यक्ष प्रतिनिधि महेश बोड़ाने, सांसद प्रतिनिधि जितेन्द्र अग्रवाल, विधायक प्रतिनिधि शिव पटेल, पार्षद रवि मेहता, पार्षद विपुल चौपड़ा, पार्षद प्रतिनिधि संजय मकवाना, पार्षद लक्ष्मण पटेल आदि मौजूद थे।
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