झाबुआ~गिद्ध दृष्टि......
जिले में सहकारिता को गंदा करने वाले ही भाजपा की लुटिया डुबोयेगे.....................
घर का भेदी लंका ढहाए- क्या भाजपा संगठन को अपने ही भूतपूर्व जिलाध्यक्ष की बात पर ऐतबार नही है ...........???
16 करोड़ का गबन ढाई करोड़ में सिमटा....................
झाबुआ। संजय जैन~~
भाजपा शासनकाल में जिले के सहकारिता क्षेत्र में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार तथा अनियमितता को आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पार्टी की सेहत के लिए नुकसानदेह बताते हुए पार्टी के भीतर ही अब गंभीर आवाजे उठने लगी है। जिले में भाजपा संगठन के जिलाध्यक्ष सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे नेता दौलत भावसार ने प्रदेश के सहकारिता मंत्री अरविंद भदौरिया, प्रमुख सचिव सहकारिता विभाग,भोपाल आयुक्त एवं पंजीयक सहकारिता विभाग भोपाल, संयुक्त आयुक्त सहकारिता विभाग इंदौर के साथ ही राज्य भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के प्रमुख को लिखे इस आशय के पत्र में जिले की आदिम जाति देवझिरी, थोक उपभोक्ता भंडार झाबुआ आदि संस्था में प्रशासक के रूप में पदस्थ सहकारिता निरीक्षक के कारगुजारियों का विस्तार से वर्णन किया है और बताया है कि जिले के भाजपा नेताओं की नजदीकियों का फायदा उठाकर उक्त सहकारिता निरीक्षक सहकारिता क्षेत्र में किसानों के लाभांश की मलाई काटकर क्षेत्र में सहकारिता आंदोलन को पलिता लगाने वाले कर्मचारियों का भरपूर साथ दे रहे है।
क्या है मामला.........
देवझिरी सहकारी संस्था के निरीक्षक ने 16 करोड के कथित घोटाले के आरोपियों को बचाने के लिए अपने रसुख और टीकडम का जोरदार उपयोग कर अपनी जांच रिपोर्ट में घोटाले के आंकडे को 16 करोड से घटाकर जादूई आंकड़े ढाई करोड पर ला कर खड़ा कर दिया। इतना ही नही अपने राजनैतिक आंकाओं की क्षत्रछाया का भरपुर दोहनकर इस निरीक्षक ने जिले की कई सहकारी संस्थाओं के प्रभारी प्रशासक का दायित्व हथियाकर इस संस्था के लाभांश को दीमक की तरह चाटने और उन्हें खोखला बनाने वालों पर कार्यवाही कराये जाने की बजाय उन्हें बचायाए जिससे कई सवाल खडेे हो रहे है।
प्रदेश के सहकारिता मंत्री से की मांग.................
दौलत भावसार ने प्रदेश के सहकारिता मंत्री से मांग की है कि उक्त निरीक्षक के कारनामों से जिले में पार्टी की छवि को भारी आघात लगा है साथ ही सहकारिता से किसानों का मोह भंग हो गया है। अतः इनके संपूर्ण कार्यकाल की जांच परिवर्तन पार्टी के हित मे निदेशालय से कराई जाना बेहद जरूरी हैं।
अतिशीघ्र निरीक्षक का करना होगा तबादला ..............
भावसार ने शिकायत पत्र में सहकारिता निरीक्षक अशोक जैन का स्थानांतरण कर उनके कार्यकाल के जांच की मांग की है। सहकारिता निरीक्षक जैन वर्षो से झाबुआ में ही पदस्थ है। इनकी पदस्थी ही झाबुआ में हुई है और झाबुआ के ही स्थायी निवासी है। उसकी पदस्थी नियम विरुद्ध मानी जा सकती है क्योंकि गृह नगर, जनपद एवं ब्लाक में कई साख समितियों में वे प्रशासक भी है। हाल ही में नेचुरल ग्रीन पार्क कालोनी निर्वाचन के दौरान आपत्तियों के निराकरण के दिन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के साथ जैन प्रशासन की उपस्थिति में 6.7 सदस्यों के साथ विवाद कर प्रोसिडिंग रजिस्टर ही छीनकर ले गये। जैन द्वारा उक्त चुनाव को प्रभावित किया गया है।उन्होंने कालोनीवासियों के मोबाइल एवं व्हाट्सएप ग्रुप पर ऑडियो के माध्यम से चुनाव को प्रभावित किया और निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान आरोपियों को बचाने का अक्षम्य कृत्य किया है।
भंडार में मिलीभगत से भ्रष्टाचार..................
प्राप्त जानकारी अनुसार जिला थोक उपभोक्ता सहकारी भंडार के अशोक जैन को नियम विरुद्ध अधिकारियों की सांठगांठ से प्रशासक बना रखा है। प्रशासक वरिष्ठ अधिकारी,आर या डीआर होना चाहिए। जैन के रहते यहा बहुत अधिक आर्थिक भ्रष्टाचार हो रहा है। संस्था की राशि का गबन करने वाले कर्मचारियों से राशि वसूल कर उनके विरुद्ध सख्त कार्यवाही कराये जाने की बजाय उनका बचाव करने की चर्चाएं आम लोग करते दिखाई दे रहे है। इस संस्था में पूर्व में भी आधा दर्जन से अधिक कर्मचारियों पर राशि वसूली के नोटिस जारी हुए थे, लेकिन संस्था उन कर्मचारियों से राशि वसूल कर पाई या नही ये अभी तक स्पष्ट नही हुआ है। जबकि इस संस्था को सबसे अधिक आय गैस एजेंसी से होती है। सहकारी समिति की आय बढ़ाने की बजाय संस्था की राशि का आगे भी गबन होता रहेगा तो अन्य कर्मचारियों के हौसले भी और भी बुलंद होते रहेगे। इसलिए जांचकर्ता अधिकारियों को बारीकी से मामले की जांच कर भ्रष्टों को बेनकाब करना होगा, जिससे संस्था प्रगति के पथ पर अग्रसर हो।
16 करोड़ का गबन ढाई करोड़ में सिमटा.................
शिकायत पत्र में बताया गया कि हाल ही में आदिम जाति सेवा सहकारी संस्था देवझिरी में भारी मात्रा में गबन हुआ है। बताया गया कि करीब 16 करोड के गबन का प्रमाण स्वयं अशोक जैन द्वारा प्रमाणित किया गया है लेकिन उन्होंने अंत में करीब ढाई करोड का गबन प्रमाणित कर सिद्ध कर दिया । जिसमें 3 कर्मचारियों को दोषी सिद्ध कर एफआईआर कराई । जिसमें एक मृत प्रबंधक भी शामिल है। उक्त करोड़ों की राशि के गबन का दोषी कौन है...? जिसमें गोलमाल कर गबन में शामिल कर्मचारियों को बचाया जा रहा है।
धारा 60 के तहत जांच हो चुकी है...........
गौरतलब है कि उक्त संस्था की धारा 60 के तहत जांच हो चुकी है, उसमें भी अनेक अनियमितता पाये जाने की बाते सामने आई है। जैन द्वारा उक्त मामले में आधी जांच कर दोषी कर्मचारियों को बचाया गया है। 16 करोड़ के गबन को ढाई करोड़ का गबन सिद्वकर दोषी कर्मचारियों को बचाया गया, जो आज भी नौकरी कर रहे हैं, जबकि उनकी सेवाएं समाप्त भी कर दी गई थी।जिनकों प्रशासक जैन ने वरिष्ठ अधिकारियों की मिलीभगत से पुनः नौकरी दे दी गयी है।
क्या भाजपा संगठन को अपने भूतपूर्व जिलाध्यक्ष पर एतबार नही....?
हाल ही में एक शाखा पर्यवेक्षक निरीक्षण देखने आए,जहां सभी कार्यरत कर्मचारियों पर आर्थिक गबन उजागर भी हुआ है। जिसमें एक कर्मचारी ने रसीद कट्टे चुराकर सदस्यों से फर्जी ऋण वसूली की जाने की भी पत्र में उल्लेख किया है। भावसार ने पत्र के माध्यम से जहां जहां अशोक जैन प्रशासक रहे उनके कार्यकाल की जांच कर जैन का तबादला जिले से कहीं बाहर कर मामले की बारीकी से जांच की मांग की गयी है जिसकी जांच प्रभावित ना हो। उन्होंने सहकारिता मंत्री को यह भी बताने का प्रयास किया है कि इसमें गहरे राजनैतिक तार भी जुडे है। जिससे निसंदेह हमारी पार्टी की छवि बेहद धुमिल भी हो रही है। अब देखना यह है कि सत्ताधारी दल के नेता द्वारा उठाई गई आवाज पर गबन कर्ता और जिम्मेदारों के विरुद्ध कोई कार्यवाही होती है या गबन कर्ता और जिम्मेदारों की पीठ थपथपाकर उनका हौसला और बुलंद किया जाता है या क्या यह मान लिया जाय की भाजपा संगठन को अपने ही भूतपूर्व जिलाध्यक्ष की बात पर ऐतबार ही नही है।....? यह तो शायद आगे आने वाला वक्त ही बताएगा।
फ़ोटो 01.शिकायत कर्ता पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष दौलत भावसार,निरीक्षक अशोक जैन और सहकारिता मंत्री को भेजा गया पत्र


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