झाबुआ गिद्ध -दृष्टि ~~~
  
किसान मान रहे-गेहूं के डंठल जलाने से खेतों की बढ़ती है उर्वरा शक्ति, हकीकत-नष्ट हो जाते हैं उपजाऊ तत्व~~

80 फीसदी कटाई हार्वेस्टर मशीन से-प्रशासन की ढील, आग लगाने वाले किसानों पर नहीं किया जाता मामला दर्ज~~

झाबुआ। संजय जैन~~



ग्रामीण अंचल में इन दिनों नरवाई में आग लगाई जा रही है। आग ने कई किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खेतों में लगे भूसे के कूप के अलावा लोगों के आशियाने भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। नरवाई जलाने के पीछे एक ओर किसान जहां उसे खेतों के लिए फायदा मान रहे हैं। वहीं कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक इससे खेतों में पैदावार काफी हद तक प्रभावित होती है।

प्रशासन अभी तक अलर्ट नही...........................
अंचल में गेहूं की कटाई के बाद खेतों में खड़ी नरवाई से कई किसान जहां भूसा बना रहे हैं वहीं कुछ ऐसे किसान भी हैं जो अपने फायदे के लिए उसमें आग भी लगा रहे हैं। अभी तक 5000 हेक्टेयर से ज्यादा नरवाई आग की चपेट में आकर जल चुकी है। इसके बाद भी प्रशासन अभी तक अलर्ट नहीं हो पाया है यही वजह है कि नरवाई में आग लगाने वाले एक भी किसान पर किसी तरह का कोई प्रकरण नहीं बनाया गया है। जिले मे मात्र तकरीबन 20 फीसदी गेहूं की कटाई हाथों से की हाथो से की जाती है। जबकि शेष 80 फीसदी कटाई हार्वेस्टर मशीन से की जाती हैै। जिसके चलते खेतों में खड़ी नरवाई से किसान भूसा बना रहे है। वहीं कई किसान आग भी लगा रहे हैं।  

खेतों में आग लगाने के पीछे यह होता है कारण...................
किसान नरवाई को गहरी जुताई न करते हुए जलाने के पीछे किसान मानते है कि जलाने का तरीका सस्ता है। किसानों के मुताबिक नरवाई को जलाने में खेत की सफाई में समय एवं श्रम की बचत होती है। इसके साथ ही गहरी जुताई की आर्थिक बचत भी हो जाती है। जिससे खेतों में बख्खर या हल चलाते समय नरवाई समस्या न बने। इसके अलावा किसानों का यह भी मानना है कि नरवाई की राख से खेतों की उर्वरा शक्ति में बढ़ोतरी होती है। लेकिन सच्चाई यह है कि आग लगाने से खेतों में उपज कम होती है।

आग नहीं लगाने से यह होता है फायदा .................
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार नरवाई को जलाने के स्थान पर स्ट्रिपर यंत्र -भूसा बनाने की मशीन से भूसा बनाना चाहिए या फिर रोटावेटर आदि यंत्र का उपयोग कर मिट्टी में मिला देना चाहिए। मिट्टी में मिलाने से फसल अवशेष सड़कर कार्बनिक पदार्थ में बदल जाते हैं। जिससे मिट्टी की उर्वरक शक्ति में वृद्ध होती है। नरवाई की आग कई परिवारों की गृहस्थी भी उजाड़ रही है। पहले भी कई भूसा के कूप जलकर राख हो चुके हैं।

खेतों को पहुंचता है नुकसान..........................
नरवाई को जलाने से भूमि की उर्वरा शक्ति के रूप में मौजूद तत्व आग के साथ जलकर भूमि की उर्वरा शक्ति का क्षय हो जाता है। आग के कारण उपजाऊ भूमि पर आग लगने से ऊपरी परत जलकर ईटों के अवशेष की तरह कड़क हो जाती है। किसानों को चाहिये कि वह गहरी जुताई करें, जिससें नरवाई भूमि में दबकर खाद का रूप ले लेगी। नतीजन खेतों की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए अलग से खाद की अधिक आवश्यकता नहीं रहेगी।

खेतों के बैक्टीरिया नष्ट होते हैं .......................
किसानों को नरवाई में आग नहीं लगाना चाहिए,क्योंकि इससे खेतों के लाभकारी बैक्टीरिया नष्ट होते हैं। साथ ही उर्वरा शक्ति भी कम हो जाती है। इसका सीधा असर पैदावार पर पड़ता है।
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आईएस तोमर-कृषि वैज्ञानिक,झाबुआ

नरवाई जलाने वालों पर कार्रवाई करेंगे............................
खेतों की नरवाई में आग लगाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। यदि कोई इसमें आग लगाता है तो उसके खिलाफ पुलिस थाने में मामला दर्ज कराए जाने के निर्देश दिए गए है।
............................सुनील झा-एसडीएम,झाबुआ




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