झाबुआ~आम हुआ -आम..........देश में अच्छी पैदावार और आवक के चलते दाम पिछले साल के मुकाबले आधे दाम पर मिल रहे~~

140 रुपए वाला बादाम इस साल 70,तो सिंदूरी मिल रहा 60 रुपए किलो~~

झाबुआ। संजय जैन~~


फलों का राजा कहे जाने वाला आम पिछले साल खास था, वह इस साल आम हो गया है। क्योंकि मांग के अनुरूप आवक होने के साथ भाव पिछले साल के मुकाबले आधे हैं। पिछले साल अप्रैल में इस समय जो बादाम आम 140 रुपए किलो में बिक रहा था, वह आज 70 रुपए किलो में उपलब्ध है। तोतापरी भी 60 से 65 रुपए किलो में बिक रहा है। पिछले साल सबसे ज्यादा महंगा हापुस 450 रुपए किलो में भी आसानी से नहीं मिल रहा था, वह आज 220 से 240 रुपए किलों में मिल रहा है।

आवक पर्याप्त होने और मांग कम होने से भाव में गिरावट .................................
व्यापारियों के अनुसार आम की आवक पर्याप्त होने और मांग कम होने से भाव में गिरावट है। जबकि उतर प्रदेश से आने वाला लंगड़ा व दशहरी आम की आवक तो अभी शुरू ही नहीं हुई है। गर्मी के साथ ही आम की मांग बढ़ जाती है। रमजान माह में मांग अच्छी रहने के बावजूद फलों का राजा आम प्रत्येक वर्ग की पहुंच में रहा।

पिछले साल सभी के भाव दोगुना थे....................
पिछले साल मांग के मुकाबले आवक कम होने से आम काफी महंगा होकर खास बना हुआ था। हालात यह था कि हापुस आम तो बाजार में दिखाई ही नहीं दे रहा था। क्योंकि 17 अप्रैल 2022 को इसके भाव 450 रुपए किलो से ज्यादा थे और व्यापारी मांग पर ही मंगा रहे थे। इस साल ऐसा नहीं है और बाजार में हापुस प्रमुख दुकानों पर मिल रहा है। इस साल हापुस आसानी से 220 से 230 रुपए प्रति किलो के भाव में मिल रहा है। फल-सब्जी मंडी में इस समय बादाम 70 रुपए प्रति किलो, तोतापरी 60 रुपए, केसर 120 रुपए ,सिंदूरी-लाल पट्टा 100 रुपए किलो में मिल रहा है। जबकि पिछले साल इन सभी के भाव दोगुना थे।

लंगड़ा,नीलम-दशहरी का इंतजार..................
थोक-खेरची व्यापारिर्यो ने बताया कि शहर में केरल,उप्र,महाराष्ट्र और गुजरात से आम आते हैं। सीजन शुरू होने के साथ आम की आवक शुरू हो गई थी। यूपी से दशहरी, लंगड़ा किस्म के आम तो जूनागढ़-गुजरात से केसर आम की आवक होती है। फिलहाल लंगड़ा, नीलम, दशहरी किस्म के आम नहीं आ रहे हैं। यदि किसी के पास है तो वह केवल ऑर्डर पर ही मंगा रहा है। इनकी आवक अगले माह तक शुरू होगी।

बेंगलुरु, केरल से ज्यादा आ रहा आम...........................
फल व्यापारियों के अनुसार इस साल गर्मी ने देर से दस्तक दी है। अभी.भी ऐसी गर्मी नहीं है, जैसी पिछले सालों में अप्रैल माह में थी। फिलहाल बैंगलुरू,केरल सहित अन्य जगह से ज्यादा आम आ रहे हैं। पूरे रमजान माह में भी इस साल आम की आवक मांग के अनुरूप ठीक रही, इससे भाव ज्यादा नहीं बढ़े। हालांकि प्रारंभ में भाव कुछ ज्यादा थे लेकिन गर्मी कम होने के साथ अन्य फलों की भी आवक होने के कारण भाव कम हो गए।

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