धार~10 साल बाद बाजार बैठक का ठेका, सरकारी बोली से कम में गया फिर भी फायदे में नपा~~

बाजार बैठक ठेका जाने के बाद स्ट्रीट वेंडर्स की संख्या पर सवाल उठे, 1500 के लगभग सड़कों पर व्यापार करते है, कार्ड बने है 5 हजार से अधिक~~

धार ( डाॅ. अशोक शास्त्री ) । 

नगरपालिका में करीब 10 साल बाद धार नगर का बाजार बैठक और पशु पंजीयन का ठेका लिया गया है। ठेका देने के बाद नगरपालिका को अभी तक कर्मचारियों के माध्यम से की जा रही बाजार शूल्क वसूली से अधिक आय मिल गई है। वहीं वसूली काम में जुटे नपा के कर्मचारी वसूली दायित्व से मुक्त हो गए है। इन कर्मचारियों का उपयोग निकाय अब अन्य कार्यों में भी कर सकेगा। हालांकि ठेके को लेकर सवाल भी खड़े हो रहे है। दरअसल आंकलित सरकारी ठेका बोली राशि से कम में टेंडर गया है। इसके बावजूद निकाय घाटे में नहीं है।
सरकारी बोली अधिक रहती थी
ेअभी तक नगरपालिका में बाजार बैठक का ठेका इसलिए नहीं लिया जाता था कि सरकारी बोली निकाय द्वारा की जाने वाली वार्षिक वसूली से कई गुना अधिक रहती थी। अधिक सरकारी बोली राशि को लेकर निकाय पर आरोप भी लगते थे कि निकाय ठेका ना देने के लिए जानबुझकर इस तरह अधिक राशि की मांग करती है, जिससे कोई ठेका ही नहीं लें। इस मर्तबा भी बाजार बैठक के लिए 3 बार निविदा जारी की गई। प्रथम बोली करीब 20 लाख की आंकलित की गई थी। एक भी टेंडर नहीं आया। उसके बाद राशि कम की गई। अंतिम राशि करीब 14 लाख रुपए तय की गई। जिसमें 12 लाख के लगभग में बाजार बैठक वसूली का ठेका लिया गया है। गत वर्ष निकाय में करीब 10 लाख रुपए की वसूली की थी। इसके पूर्व के वर्ष में 4-5 लाख रुपए की आय की गई थी। कुल मिलाकर सरकारी बोली से कम में ठेका जाने के बावजूद निकाय को बचत हुई है।
30 प्रतिशत कार्डधारी ही सक्रिय
बाजार बैठक का ठेका जारी होने के बाद ठेकेदार कितनी वसूली कर पाते है। यह महत्वपूर्ण रहेगा। दरअसल शहर में करीब 5 हजार के लगभग स्ट्रीट वेंडर्स कार्ड जारी हुए है। इन्हें वास्तविक संख्या माना जाए तो करीब 50 हजार रुपए रोज की वसूली होना चाहिए। इस तरह 1 महीने में ही पूरे साल की वसूली हो जाती है। हालांकि ऐसा नहीं है। करीब 50 प्रतिशत के लगभग स्ट्रीट वेंडर्स कार्ड गलत तरीके से जारी कराए गए है। वेंडर्स कार्ड बनने के बाद ऋण सहित खाद्यान्न पर्ची एवं अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने का रास्ता खुल जाता है। यही कारण है कि रिकार्ड में भले ही 5 हजार स्ट्रीट वेंडर्स है, लेकिन सड़क पर 30-40 प्रतिशत ही सक्रिय रूप से कार्यरत है।
कार्डों की जांच होना चाहिए
शहर में स्ट्रीट वेंडर्स कार्ड की भौतिक जांच होना चाहिए। इससे एक बड़ी गड़बड़ी सामने आ जाएगी। उल्लेखनीय है कि 2018 में बड़े पैमाने पर संबल योजना के कार्ड बनवा लिए गए थे। जिन्हें बाद में जांच के बाद निरस्त भी किया गया था। कलेक्टर जयश्री कियावत के कार्यकाल में एसडीएम (आईएएस) नीरज सिंह ने बीपीएल राशन कार्डों की जांच की थी। 500 से अधिक राशनकार्ड सिर्फ मुख्यालय पर ही निरस्त किए गए थे।
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