धार~अध्यक्ष निर्वाचन: नजरे नपाध्यक्ष ‘मुकुट’ पर, अगले सप्ताह जारी होगी अधिसूचना ~~
नवनिर्वाचित पार्षदों में आपसी मेल-जोल बढ़ाने के लिए भाजपा घूमाने ले जा रही है धार के 18 पार्षदों को ~~
जिले के नगर निकाय चुनाव के परिणामों की घोषणा को पूरा एक सप्ताह बीत गया है। अभी तक प्रथम सम्मेलन व अध्यक्ष के निर्वाचन को लेकर अधिसूचना जारी नहीं हो पाई है। एक-एक दिन दोनों दलों के लिए भारी हो रहा है। दरअसल 9 निकायों में 6 में कांग्रेस पार्षद बहुमत में है। वहीं 3 स्थानों पर भाजपा के पास पर्याप्त पार्षद संख्या है। कुक्षी, धरमपुरी, पीथमपुर जैसे निकायों में बहुमत के नजदीक भाजपा का विजयी रथ रूक गया था। इन स्थानों पर पार्षदों के ‘हृदय परिवर्तन’ की आशंकाएं प्रबल हो गई है। इसके कारण अब राजनैतिक दल अपने-अपने पार्षदों की निगाहबंदी उन्हें घूमने ले जाने के बहाने कर रहे हैं। नपाध्यक्ष का ‘मुकुट’ किसके सिर पर होगा। इसको लेकर शहर में चौपालों पर आम चर्चा होने लगी है। अलग-अलग निकायों में अध्यक्ष के चेहरे के रूप में 2 से 5 नाम सामने आ रहे हैं। पार्टी फीडबैक जुटा रही है।
कांग्रेस-भाजपा दोनों के टूर
इधर 23 जनवरी को नगर निकाय के वार्ड परिणाम घोषित होने के बाद से पीथमपुर के कई पार्षद जीतने के बाद से टूर पर है। वहीं अब धार नगरपालिका क्षेत्र के भाजपा समर्थित 18 पार्षदों को पार्टी घूमाने ले जा रही है। सूत्रों की माने तो बहुमत से अधिक पार्षद होने के बावजूद धार के पार्षदों को घूमाने ले जाने के पीछे मुख्य रणनीति अध्यक्ष पद के संभावित चेहरों को अन्य पार्षदों के साथ मेल-जोल बढ़ाने के उद्देश्य से की जा रही है। यहां पर मुख्य दावेदारों में पार्षद श्रीमती अनीता रमाकांत मुकुट, पार्षद श्रीमती बोड़ाने, श्रीमती टीना विपिन राठौर, श्रीमती आशा शिव पटेल का नाम प्रमुखता से सामने आया है।
छवि खराब करने से बचेगी भाजपा
पीथमपुर के 31 वार्डों के परिणामों में कांग्रेस ने बार्डर लाईन 17 के साथ पार्षदों की बहुमत संख्या जुटा ली है। यहां पर भाजपा के 13 पार्षद चुनाव जीते है। निर्दलीय सुधा चौधरी ने जीत हासिल की है। यह वैचारिक रूप से भाजपाई है। इनकी गणना के साथ 14 की संख्या लेकर भाजपा 17 पार्षदों के बहुमत आंकड़ा जुटाने की कोशिश में लगी है। अब यह कवायद धीमी दिख रही है। विधानसभा चुनाव के पूर्व भाजपा खरीद फरोख्त वाली छवि से बचना चाहेगी। हालांकि पिछले कई समय से पीथमपुर में सत्ता में काबिज पार्टी के नेताओं का मोह छूट नहीं रहा है। कांग्रेस के आंतरिक झगड़ों पर नेताओं की नजर है।
इसलिए इनका नाम सामने आया
जीतने के पहले चर्चित हो गए-धार नपाध्यक्ष के चेहरे की चर्चा में श्रीमती अनीता मुकुट का नाम चुनाव परिणाम आने से पहले ही चर्चित हो गया था। दरअसल श्रीमती मुकुट सीधे तौर पर भाजपा की सक्रिय कार्यकर्ता कभी नहीं रही थी। उनके पति डॉ रमाकांत मुकुट संघ विचारधारा के होकर हिन्दू संगठन की गतिविधियों में संलग्न रहे। ऐसे में जब उन्हें वार्ड क्रमांक 4 से उम्मीदवार बनाया गया तो उसके मायने खोजे गए। इसके बाद यह बात सामने आई कि इंदौर में जिस तरह भाजपा ने अचानक सक्रिय राजनीति से दूर पुष्पमित्र भार्गव को महापौर बनाकर नेताओं की आपसी खींचतान को खत्म करने की कोशिश की है। संभवत: श्रीमती मुकुट को भी इसी कारण टिकिट दिया गया है।
चित्र है 1धार10 - श्रीमती अनीता मुकुट, पार्षद
समाज भाजपा के लिए पालेबंद हुआ- अध्यक्ष पद के मजबूत चेहरे के तौर पर कभी कांग्रेस का गढ़ रहे क्षेत्र से चुनाव जीती वार्ड क्रमांक 2 की भाजपा पार्षद नेहा महेश बोड़ाने को देखा जा रहा है। इनके एवं क्षेत्र की दो अन्य सीटों पर भाजपा से चुनाव लड़े पार्षद उम्मीदवारों के लिए पहली मर्तबा समाज पूरी तरह पालेबंद दिखा। कांग्रेस से भी समाज के लोग चुनाव लड़े थे, किंतु समाज के बड़े तबके ने वैचारिक रूप से भाजपा को समर्थन दिया। इस क्षेत्र में यूं भी भाजपा के पास प्रभावशाली नेतृत्व नहीं है। युवा-शिक्षित नवनिर्वाचित पार्षद श्रीमती बोड़ाने को अध्यक्ष चेहरा बनाकर भाजपा इस क्षेत्र को फूलमाली समाज के क्षेत्र की तरह अभेद भाजपाई गढ़ बना सकती है। समाज के करीब 14 से 15 हजार वोटर है।
चित्र है 1धार11- श्रीमती नेहा बोड़ाने, पार्षद
समर्पित और विश्वसनीय चेहरा है राठौर- अध्यक्ष पद के उम्मीदवारों के रूप में वार्ड क्रमांक 12 से निर्वाचित पार्षद श्रीमती टीना विपिन राठौर को आंका जा रहा है। पेशे से शिक्षिका श्रीमती राठौर यूं तो साधारण गृहणी है, लेकिन राजनैतिक मैदान में उतरने के पहले समाज की गतिविधियों में सक्रिय रही है। राठौर समाज का 90 प्रतिशत समुदाय भाजपा समर्थित रहा है। इस चुनाव में पार्टी से जीते 1 मात्र पार्षद श्रीमती राठौर है। उनके पति विपिन राठौर मंडल अध्यक्ष और पूर्व में पार्षद रह चुके है। दो कार्यकाल के मध्य उन्होंने जनप्रतिनिधि के तौर पर बेहतर काम किया। इसका परिणाम रहा कि उनकी पत्नी उसी वार्ड से चुनाव जीती है। मंडल अध्यक्ष के तौर पर संगठन के हर निर्णय को उन्होंने कर्तव्यनिष्ठ बनकर पालन किया है। उनके राजनैतिक केरियर को पहला अवसर पूर्व केन्द्रीय मंत्री विक्रम वर्मा व धार विधायक नीना वर्मा ने दिया था। कुल मिलाकर उन्हें एक समन्वयकारी चेहरे के तौर पर देखा जा रहा है।
चित्र है 1धार12- श्रीमती टीना राठौर, पार्षद
कामकाज का अनुभव, चरित्र बेदाग- वार्ड क्रमांक 28 से निर्वाचित पार्षद श्रीमती आशा शिव पटेल को भी सशक्त अध्यक्ष चेहरे के तौर पर देखा जा रहा है। उनके पति शिव पटेल एक अनुभवी नेता है। पूरा परिवार भाजपा के प्रति समर्पित रहा है। श्री पटेल ने पार्षद और विधायक प्रतिनिधि रहते हुए एक बेदाग चरित्र के साथ राजनैतिक जीवन निकाला है। नेतृत्वकर्ता के तौर पर वे क्षेत्र में भाजपा के लिए सतत काम करते है। समन्वयकारी चेहरा है। विधायक खेमे से होने के बावजूद भाजपा जिलाध्यक्ष के नजदीकी लोगों में माने जाते है। वर्तमान में गुटबाजी में उलझी भाजपा में मुख्यालय के दो खेमों में बराबर से विश्वसनीय होने के कारण उन्हें सामंजस्यकारी माना जा रहा है।
चित्र है 1धार13- श्रीमती आशा शिव पटेल
राजनीति में कुछ भी संभव
धार नगरपालिका अध्यक्ष पद ओबीसी महिला के लिए आरक्षित है। अध्यक्ष आरक्षण के बाद और चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के पूर्व से बाजारी चर्चाओं में श्रीमती ज्योति कालीचरण सोनवानिया का नाम भी भावी अध्यक्ष के तौर पर माना जाता था। राजनैतिक परिस्थितियां बदली और फिलहाल वह दौड़ में है, किंतु पीछे माना जा रहा है। हालांकि राजनीति में कुछ भी संभव है। इधर एक नाम जिसकी चर्चा नहीं की जा रही है। वार्ड क्रमांक 9 से निर्वाचित श्रीमती अनीता हुकुम लश्करी भी बड़े नेताओं की नजर में है। एक तीर से दो निशाने किए जा सकते है। लश्करी का नाम आगे बढ़ाया जा सकता है। इसके पीछे की रणनीति यह रहेगी कि जिलाध्यक्ष इसी समुदाय से है। वह विरोध करते हैं तो छवि प्रभावित होगी। समर्थन करते है तो श्रेय नाम बढ़ाने वालों को जाएगा।





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