धार~आधुनिक भारत में स्वामी जी के विचार आज भी प्रासंगिक है- द्विवेदी ~~
स्वामी विवेकानंद जी की 159 वी जयंती पर जिला स्तरीय कार्यशाला हुई ~~
मध्यप्रदेश जन अभियान परिशद धार द्वारा स्वामी विवेकानंदजी की 159 वीं जयंती का आयोजन आजीविका भवन माण्डू रोड धार में रखा गया । मुख्य अतिथि विभाष उपाध्याय, उपाध्यक्ष मप्र जन अभियान परिशद, विशेष अतिथि सचिन कुमार घोश जिला न्यायाधीश एवं सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण धार एवं मुख्य वक्ता के रूप में सरदारसिंह तंवर, डॉ श्रीकान्त द्विवेदी विवेकानंद केन्द्र धार, संभाग समन्वयक इन्दौर अमित शाह, जिला समन्वयक नवनीत रत्नाकर मंचासीन रहे। सर्वप्रथम अतिथियों द्वारा सरस्वती पूजन, माल्यार्पण, पूजन, एवं अतिथियों का स्वागत श्रीफल द्वारा किया गया। अतिथियों के स्वागत पश्चात श्री रत्नाकर, जिला समन्वयक द्वारा दुर्गा स्त्रोत का पाठ किया गया। स्वागत उद्बोधन मनीष कुमार शर्मा विकासखंड समन्वयक कुक्षी ने दिया।
युवा भारत को जाने व समझे
मुख्य वक्ता श्री द्विवेदी ने संबोधित करते हुए कहा कि हम आज 159 साल में उनको याद कर रहे है। उनमें कुछ विशेष बात होगी । निरंतर मानवता का पाठ पढ़ाने वाले व्यक्ति केवल नरेन्द्र नहीं थे। उनका स्वस्थ्य मन, स्वस्थ तन, एवं उत्तम विचारो से दुनिया की मानव जाति के लिए उपकार का कार्य किया गया। आधुनिक भारत में स्वामी जी के विचार आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने ने युवा से आव्हान किया की वे भारत को जाने एवं समझे। श्री तंवर ने भी संबोधित कियाा। श्री घोष ने संबोधित करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद की यात्रा नरेन्द्र से विवेकानंद बनने का सफर आसान नहीं था।
स्वामी जी के संकल्प को आगे लेकर जाए
मुख्य अतिथि श्री उपाध्याय ने संबोधित करते हुए रामायण प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि जटायू सीताहरण के समय असफल हो जाते है, लेकिन जटायू का जीवन सफल भले ना हो लेकिन सार्थक जरूर हुआ। इस समय जो संसार को प्राप्त है उसे हमारे चारो युग एवं 4 वेद में पूर्ण रूप से हमारे लिए उपलब्ध है। सतयुग में रामायण, द्वारपर युग में गीता, त्रेतायुग में कलयुग में सूर्य के प्रकाश के रूप में हमें विवेकानंद जी के विचारो के रूप में प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि स्वामी जी के बारे काफी बाते है जिसे हम सीमा में बांध नही सकते। अत: आप स्वामीजी के संकल्प को हम आगे लेकर जाएंगे। आभार संभाग समन्वयक अमित शाह ने माना। संचालन नवनीत जैन, राजवाडा चौक सेवा समिति ने किया। कार्यक्रम के अंत में वंद्े मातरम किया गया।



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