धार~संरक्षित होगा घंटाघर.... परिसर में जी प्लस 1 का शॉपिंग कॉम्पलेक्स भी बनेगा~~
डीपीआर के लिए तीन फर्मों के आए आवेदन, पार्किंग प्लान भी प्रोजेक्ट में शामिल~~
धार ( डाॅ. अशोक शास्त्री )।
पिछले दो दशक से बंद रियासत कालीन धार के घंटा घर की दशा सुधरने वाली है। ना सिर्फ इसकी इमारत संरक्षित होगी बल्कि घड़ी की सुईयां भी चलने लगेगी। दरअसल नगरपालिका अपने इस पुराने कार्यालय भवन को लेकर शॉपिंग कॉम्पलेक्स का प्लान बना रही है। इसमें घंटाघर को मुख्य रूप से संरक्षित करने के लिए फोकस रखा जा रहा है। परिसर की शेष भूमि को कॉम्पलेक्स के रूप में विकसित किया जाएगा। भू-प्रबंधन के तहत हो रहे इस काम में पार्किंग को भी सम्मिलित किया जाएगा।
तीन फर्मों ने दिखाई रूचि
घंटाघर की घड़ी करीब दो दशक से बंद है। वहीं एक दशक से अधिक समय से वर्किंग वूमन होस्टल की बिल्डिंग में नपा का कार्यालय संचालित होने से यह इमारत लगभग विरान हो गई है। चुनाव के दौरान पोलिंग बुथ बनाए जाते है। ऊपर के हिस्से को स्टोर के रूप में उपयोग किया जाता है। इस बिल्डिंग और परिसर में शॉपिंग कॉम्पलेक्स बनाने के लिए एक दशक पहले से विचार चल रहा है। डीपीआर बनाने के लिए कंसलटेंसी फर्म को पहली मर्तबा आमंत्रित किया गया है। तीन फर्मों ने डीपीआर के लिए रूचि दिखाई है। नवीन परिषद् का गठन होने के बाद फर्म फायनल कर दी जाएगी। निश्चित अवधि में डीपीआर तैयार होगी और आगामी वर्ष में काम शुरु होने की संभावनाएं भी है।
इंग्लैंड की घड़ी लगी है
धार का रियासतकालीन घंटाघर की पत्थरों से बनी इमारत खुबसूरत बिल्डिंग है। इसमें लगी घड़ी के चलने की व्यवस्था भी उस दौर की तकनीकी का एक बेहतरीन उदाहरण है। दरअसल घड़ी की सुईयां ‘वजन’ आधारित प्रक्रिया से चलती है। घड़ी चलाने के लिए वजनी स्तंभनुमा वस्तु लटकाई गई है। यह धीरे-धीरे एक सप्ताह में नीचे आती थी। इसके नीचे आने और दूसरी और के संतुलन से घड़ी की लोहे की सुईयां घूमती थी। हफ्ता पूरा होते ही कर्मचारी वजन को फिर ऊपर कर देता था। इस तरह घड़ी नियमित रूप से चलती थी। घड़ी के बंद होने के बाद सुधारने के लिए दक्ष कारीगर नहीं मिल पाए। कई मर्तबा दूसरे राज्यों से कारीगर बुलाए गए, लेकिन नियमित व्यवस्था नहीं बन पाई। नतीजे में राज धरोहर दशकों से बंद है। एक दौर में पूरा शहर इससे समय देखता था। जिनके पास घडिय़ां आ गई थी वे समय मिलाते थे।
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