*बड़ी खट्टाली~एक महीने तक चलने वाला बरकतों का महीना रमजान ए मुबारक आज से शुरू हो गया*~~
*मुस्लिम समाज के वरिष्ठों ने कहा रमजान में लोग घरों में ही रहा कर इबादत करें*~~
बड़ी खट्टाली। इससे पहले लोगों ने शुक्रवार की शाम को रमजान के चांद का दीदार किया। चांद देखते ही बच्चे में खुशी माहौल दिखा। औरतो और मर्दो ने अपनी निगाह चांद की और कर दुआ पढ़ी अल्लाह का शुक्र अदा किया। उसके बाद लोगों ने अपने घरों में ईशा की नमाज पड़ी फिर घरों में ही पहली तरावीह हुई। उसके बाद लोगों ने अपने अपने स्तर से अमन-चैन व कोरोना महामारी बीमारी खत्म होने की दुआ मांगी।
अजान से पहले समाजजनों ने उठे और सहरी करी और इसके साथ ही पहले रोजे की शुरुआत हो गई। रमजान का चांद देखते ही बरकतों का महीना रमजान शुरू होता गया और ईद का चांद देखकर खत्म होता है। इस महीने में सुयोंदय से सूर्यस्त तक रोजा रखा जाता है और रात में विशेष नमाज अदा की जाती है। जिसे तरावीह कहते हैं। लेकिन देशभर में लॉकडाउन के चलते समाजजनों ने इस बार रोजा इफ्तार, व नमाज तराबीह व अन्य इबादत अपने-वअपने घरों में रहकर ही कर रहे हैं। साथ ही यह भी बताया के इस महीने के खत्म होने पर ईदुल फितर का त्योहार मनाया जाएगा। इस पूरे माह मुस्लिम समाजजनों रोजा तरावीह और कुरआन की तिलावत की पाबंदी करते हैं। यह महीना इस्लाम का सबसे पाक महीनों मैं शुमार किया जाता है। रमजान महीने में रोजा, नमाज, जकात, फितर, सदका आदि करने की सलाह दी गई है। लॉकडाउन के बीच अपने घरों में इबादत कर अमन चैन की दुआ कर रहे हैं। रमजान के महीने को तीन हिस्सों में बांटा गया है हर हिस्सों में दस-दस दिन आते हैं। हर दस दिन के हिस्से को अशरा कहते है। जिसका मतलब अरबी में 10 दिन है। इस तरह इसी महीने मैं पूरा कुरान नाजिल हुआ जो इस्लाम की पाक किताब है। रोजा रखना हर मुसलमान के लिए जरूरी बताया गया है रोजा सिर्फ भखे, प्यासे रहने का नाम नही बल्कि गलत काम से बचना भी है।
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अलीराजपुर
*बड़ी खट्टाली~एक महीने तक चलने वाला बरकतों का महीना रमजान ए मुबारक आज से शुरू हो गया*~~
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