झाबुआ~ 12 वें विधायक को चुनने के लिए सुबह 7 बजे से ही सभी मतदान केंद्रों पर ईवीएम की बिप बजने लगी-जो भी जीतेगा,वह झाबुआ का पहली बार विधायक बनेगा~~
थांदला विस में सबसे अधिक,झाबुआ विस में सबसे कम हुआ मतदान-दिमाग पर भारी पड़ने वाली 3 दिसंबर,अगले 5 साल के नेतृत्व का फैसला ईवीएम की मैमोरी में कैद ....चुनाव झाबुआ के इतिहास का एक ऐतिहासिक चुनाव हो सकता है -मतदाता ~~
झाबुआ। संजय जैन~~
पिछले तीन माह से विधानसभा झाबुआ 193 के चुनाव को लेकर चल रहे परिदृश्य का पटाक्षेप कल शुक्रवार 17 नवंबर को प्रात: 7 बजे से सायंकाल 6 बजे तक मतदान केन्द्रों पर मतदान संपन्न होने के साथ ही अब परिणाम ईवीएम में बंद हो चुके है । प्रातः: 7 बजे से सभी मतदान केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतदान केन्द्रों पर मॉक पोलिंग की औपचारिकता के साथ ही मतदान प्रारंभ हुआ। प्रात: 7 बजे से 9 बजे तक मतदान केन्द्रों पर अवश्य ही कतारे दिखाई दी किंतु प्रात: 10 बजे के बाद से करीब करीब सभी मतदान केन्द्रों पर इक्का दुक्का मतदाता ही मतदान करने जाते देखे गये। चुनाव के लिए जिले में कल मतदान शांतिपूर्ण संपन्न हुआ।
अनुमन यही हाल ग्रामीण अंचलों में भी दिखाई दिया। दोपहर 11 बजे के बाद से जब ग्रामीण अंचलों का लोकतंत्र टीम ने भ्रमण किया तो मतदान केन्द्रो पर पूर्व में संपन्न हुए चुनावों की तरह लम्बी कतारे दिखाइ्र दी। ग्रामीण अंचलों में मतदान दिन भर चलता रहा । निर्वाचन आयोग द्वारा गुजरात सहित राज्य के बाहर मजदूरी के लिये गये श्रमिकों को लाने के लिये किये गये प्रयास नाकाफी साबित हुए और गत चुनावों की तरह इस बार पलायन पर मजदूरी के लिये गये श्रमिकों ने मतदान में भाग नहीं लिया। इक्का दुक्का लोग ही बाहर से मतदान के लिये आये। जिससे मतदान के प्रतिशत पर नकारात्मक प्रभाव भी देखा गया।
जो भी जीतेगा,वह झाबुआ का पहली बार विधायक बनेगा.......
इस चुनाव में 8 प्रत्याशी मैदान में थे,जिसमें मुख्य रूप से मुकाबला कांग्रेस के प्रत्याशी डॉ.विक्रांत भूरिया,भाजपा के प्रत्याशी भानु भूरिया के बीच ही दिखाई दिया। वही भाजपा के बागी धनसिंग बारिया निर्दलीय बाप पार्टी के गब्बर सिंह भी मैदान में उतरे किन्तु है। इस चुनाव में मुख्य मुकाबला कांग्रेस एवं भाजपा के बीच ही रहा है। 8 में से 1 प्रत्याशी को झाबुआ का 12वे विधायक को विधानसभा में भेजने की तैयारी ईवीएम की मेमोरी में कैद हो गयी है । इस बार झाबुआ को नया विधायक मिलना है। जो भी चुनाव जीतेगा,वह झाबुआ का पहली बार विधायक बनेगा। चुनाव झाबुआ के इतिहास का एक ऐतिहासिक चुनाव हो सकता है।
डॉ.विक्रांत भूरिया ने किये माता के दर्शन.....
कांग्रेस प्रत्याशी डा.विक्रांत भूरिया ने प्रात: कालिका माता के सपरिवार दर्शन करने के बाद मतदान केन्द्र क्रमांक 93 गोपाल कालोनी पर जाकर अपना मतदान किया। इनके साथ उनके पिता कांतिलाल भूरिया,माता कल्पना भूरिया,पत्नी डा. शीना भूरिया थीे। वही भाजपा प्रत्याशी भानु भूरिया ने अपने गृह ग्राम दोतड विकासखंड रानापुर में प्रातः: 7-30 बजे अपने मताधिकार का उपयोग किया।
चुनावी अभियान में जिले भर मे नेताओं का रहा जमावड़ा.....
इस चुनाव में जितनी राजनीतिक सरगम्रिया दिखाई दी उतनी पूर्व में पहले नहीं दिखाई दी। कांग्रेस प्रत्याशी डा.विक्रांत भूरिया के पक्ष में वातावरण को बनाने के लिये पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने आकर अथक परिश्रम किया। वही भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आकर भाजपा के पक्ष में वातावरण बनाने में कोई कसर बाकी नहीं रखी। कांग्रेस ने जहां शिवराज के 18 साल के कुशासन को लेकर ठीकरा फोड़ा तो भाजपा ने 10 माह की कमलनाथ सरकार द्वारा किसानों, महिलाओं,युवाओं के साथ किये गये छल को मुद्दा बना कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर वोट मांगें ।
मतदान रहा धीमा...
दोनों ही दलों ने एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने में कोई कसर बाकी नहीं रखी। कल शुक्रवार 17 नवंबर को हुए मतदान के दौरान लोगों में पहले की तरह मतदान को लेकर उत्साह दिखाई नहीं दिया । प्रात: मतदान जरूर तेजी से हुआ किन्तु दोपहर में मतदान की गति धीमी ही रही ।
11 घंटे में अगले 5 साल के नेतृत्व का फैसला ईवीएम की मेमोरी में कैद ....
झाबुआ के 2 लाख 4 हजार 892 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया। मतदान की गति प्रात: 7 से 11 बजे तक 30.43 प्रतिशत मतदान हुआ। प्रातः: 7 से दोपहर 1 बजे तक कुल 48.27 प्रतिशत मतदान हो चुका था। दोपहर 3 बजे तक मतदान का प्रतिशत 62.95 प्रतिशत रहा। मतदाताओं ने अपने मतों का प्रयोग कर उम्मीदवारों की किस्मत को ईवीएम में कैद किया। इस विधानसभा चुनाव में महिलाएं भी पुरूष के मुकाबले मतदान करने में लगभग बराबरी पर रही। मतदान सामग्री के साथ सभी मतदान कर्मी केंद्रों पर पहुंच गए थेैं। सुबह 7 बजे से मतदान शुरू हो गया जो शाम 6 बजे तक चला। 11 घंटे में अगले 5 साल के नेतृत्व का फैसला ईवीएम की मेमोरी में कैद हो गया है । जिसका परिणाम 3 दिसंबर को आ जायेगा।
-सट्टे बाजार में कयास ......
इस विधानसभा चुनाव को लेकर भी दिनभर कयासों का बाजार गर्म रहा। सट्टा बाजार में कांग्रेस के डा.विक्रांत भूरिया का भाव 50 पैसे तथा भाजपा के भानू भूरिया का भाव 60 पैसे बताया गया ओर निर्दलीयो की किसी ने भी जीत होना नही बताया। इस तरह हमेशा केी तरह सट्टा बाजार ने भी पूर्वानुमान को बल दिया है कि इस बार चुनाव में भाजपा तथा कांग्रेस में कड़ा मुकाबला है।
सुरक्षा की माकूल व्यवस्थाओं के बीच हुआ मतदान.....
शांतिपूर्ण मतदान कराने के लिए निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार पुलिस बल की पर्याप्त मात्रा में सुरक्षा हेतु माकूल व्यवस्था दिखाई दी। मतदान कर्मियों के साथ-साथ पुलिस बल भी शामिल रहा। सेक्टरों में पुलिस के वाहन भी लगातार निगरानी करते रहें। जिससे मतदान के दौरान कोई कानून व्यवस्था भंग नहीं हुई और ना ही मतदान केन्द्रों में व्यवधान उत्पन्न हुआ।
दिखाई दिये काम करते हुए मजदूर.....
निर्वाचन आयोग ने वैसे तो चुनाव के लिये अवकाश घोषित किया हुआ है किन्तु भ्रमण के दौरान लोकतंत्र टीम को सड़क किनारे गैती ,फावड़ा, तगारी लिये हुए, काम करते हुए मजदूर दिखाई दिये जो निश्चित ही प्रशासन एवं निर्वाचन आयोग की अनदेखी को साबित करता है ओर निर्वाचन आयोग द्वारा जारी निर्देशों को प्रशासनिक अधिकारी किस तरह धत्ता बता रहे है यह इससे साबित हो चुका है।
थांदला विस में सबसे अधिक तथा झाबुआ विस में सबसे कम हुआ मतदान...............
जिले में कुल 981 मतदान केन्द्र हैं। इसमें शहरी क्षेत्र में 34 व ग्रामीण क्षेत्र में 947 केंद्र हैं। कुल 981 मतदान केन्द्र शासकीय भवनों में भवनों को बनाए गए हैं। प्रोजेक्ट पापुलेशन वर्ष 2023 के अनुसार जिले में कुल 8 लाख 33 हजार 360 मतदाता हैं। इसमें पुरुष 4 लाख 15 हजार 732, महिला मतदाताओं की संख्या 4 लाख 17 हजार 599 तथा अन्य 29 शामिल हैं। जिले में 18 से 19 आयु वर्ग के अर्थात नए मतदाताओं की संख्या 11 हजार 559 है। थांदला में जिले की तीनों विधानसभा में सबसे अधिक मतदान का प्रतिशत 86.95 थांदला में रहा तथा झाबुआ में सबसे कम मतदान 65.61 प्रतिशत रहा पेटलावद में 79.39 प्रतिशत मतदान हुआ। जिले का औसत मतदान का प्रतिशत 76.72 रहा। पिछले चुनाव की तुलना में औसत मतदान 1.5 प्रतिशत कम हुआ है।
*हल* ढूंढने के उद्देश्य से मतदान,करारा सबक वाला ***
आपको बता दे कि आचार संहिता के चलते किसी भी प्रत्याशी का नाम जिसे झाबुआ विधानसभा के मतदाताओं द्वारा हमें खुले आम बताया,हम वह नाम आज नहीं लिख सकते है। जब लोकतंत्र टीम ने मत देकर झाबुआ विधानसभा के मतदान केन्द्रो से बाहर आते मतदाताओं के मन को टटोला तो उनका कहना था कि अधिकतर लोगों का कहना था कि हमने अब तक जितनो को भी चुनकर विधानसभा में भेजा था,उन उम्मीदवारों ने आज तक हमारी समस्याओ का कोई *हल* नही निकला है। लेकिन आज इस चुनाव के माध्यम से हमने हमारी समस्याओ का *हल* ढूंढने के उद्देश्य से आज मतदान किया है।
अधिकतर लोगों का कहना था कि जिसने जैसा बोया था,उसको हम इस चुनाव में वैसा ही फल देने का पूरा मन बनाकर आये थे। जबकि हम जिस पार्टी को पहले से ही वोट देते आ रहे थे उसको इस बार वोट नहीं दिया है। जिसका हमें कोई दुख भी नहीं है। यह झाबुआ जिले के हित में ही है। गौरतलब है कि अधिकतर लोगो ने एक समान ही अपनी प्रतिक्रिया दी। कुछ लोगों का कहना था कि यह विधानसभा चुनाव झाबुआ के इतिहास का एक ऐतिहासिक चुनाव होगा। जिसे कई सालो तक लोग नहीं भूल पायेंगे कुछ लोगों का कहना था कि हमने तो विकास के मुद्दो को प्राथमिक रखकर मतदान किया है। बीजेपी नेताओं ओर कांग्रेसी नेताओं के जीत के दावों के विपरीत कस्बा मतदाताओं का रुख तो समझ में आ रहा है,लेकिन ग्रामीण मतदाताओं की रहस्यमय चुप्पी समझ से परे है।








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