झाबुआ~लाड़ली बहना-अपात्रता की जांच का इस योजना में कोई प्रावधान नहीं,चुनावी साल में नाराजगी मोल नहीं लेना चाहती सरकार...................
झाबुआ। संजय जैन। प्रदेश की बेटियों के लिए जहां प्रदेश सरकार लाड़ली लक्ष्मी योजना चला रही थी। वहीं अब प्रदेश की महिलाओं के लिए चुनावी साल में शिवराज सरकार ने 5 मार्च को लाड़ली बहना योजना को लॉन्च कर दिया था। जिले में 2 लाख पात्र महिलाओं को लाभ देने का लक्ष्य था। योजना के तहत जिले में अब तक 1.89 लाख से अधिक महिलाओं के पंजीयन हो चुके हैं। इनमें से 1.55 लाख से ज्यादा महिलाओं की डीबीटी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं। झाबुआ जिला रजिस्ट्रेशन के मामले में इंदौर संभाग में अव्वल बना नंबर पर है।
अपात्रता की जांच का इस योजना में कोई प्रावधान नहीं................
सरकार महिलाओं को एक हजार रुपए हर महीने देगी,यानी पांच साल में महिलाओं के खाते में 60 हजार रुपए आएंगे। यह राशि महिलाओं के अकाउंट में सीधे डाली जाएगी। लाड़ली बहना इनमें कितनी महिलाएं पात्रता के दायरे में आती हैं और कितनी नहीं, इसकी जांच का इस योजना में कोई प्रावधान नहीं है। शायद चुनावी साल में सरकार नाराजगी मोल नहीं लेना चाहती है। लाड़ली बहना योजना के लिए पंजीयन का रविवार को आखिरी दिन था।
इन महिलाओं को मिलेगा लाभ............
लाड़ली बहना योजना के तहत ऐसी महिलाएं जो विवाहित हों। इसमें विधवा,तलाकशुदा एवं परित्यक्ता शामिल है और जिनकी उम्र 23 साल से 60 साल हो। परिवार की सालाना आय 2.50 लाख रुपए हो अथवा आयकरदाता न हो,को योजना का लाभ मिल सकेगा।
ये नहीं ले सकेंगे योजना का लाभ ............
शासकीय विभाग,उपक्रम,मंडल,स्थानीय निकाय में नियमित,स्थाई कर्मी,संविदा कर्मी,सेवानिवृत्ति उपरांत पेंशन प्राप्त करने वाली महिलाएं। वर्तमान अथवा भूतपूर्व सांसद,विधायक,भारत सरकार अथवा राज्य सरकार के बोर्ड,निगम,मंडल,उपक्रम के अध्यक्ष,संचालक,सदस्य। स्थानीय निकायों में निर्वाचित जनप्रतिनिधि,पंच एवं सरपंच को छोड़कर। परिवार की वार्षिक आय ढाई लाख रुपए से अधिक नहीं होना चाहिए और न ही उस परिवार को कोई सदस्य सरकारी या सरकारी उपक्रम का कर्मचारी होना चाहिए। संयुक्त रूप से 5 एकड़ से अधिक कृषि भूमि,पंजीकृत चार पहिया वाहन,ट्रैक्टर न हो। महिला जो स्वयं भारत सरकार,राज्य सरकार की किसी भी योजना के अंतर्गत प्रतिमाह राशि एक हजार रुपए या उससे अधिक प्राप्त कर रही हो तो लाभ नहीं मिलेगा।
जांच करने का अधिकार नहीं..................
योजना का क्रियान्वयन करने वाले महिला बाल विकास विभाग को यह अधिकार नहीं है कि वह स्वत संज्ञान लेकर पात्रता या अपात्रता की जांच करे। महिला बाल विकास विभाग के जिला अधिकारी आरएस बघेल ने बताया कि हम दो स्थितियों में जांच कर सकते हैं। पहला तो तब,जब कोई आपत्ति दर्ज कराए। दूसरे सरकार खुद ही रेंडम आधार पर चयन करके कुछ मामलों की जांच के निर्देश दे सकती है।
गुप्त रूप से दावे-आपत्ति नहीं कर सकते ..........
इस योजना में दावे आपत्ति दर्ज करने का काम मंगलवार 2 मई से शुरू हो गया हैं। इसमें खास बात यह है कि जो आपत्ति दर्ज कराएगा,उसे अपना नाम और मोबाइल नंबर देना होगा। यानि कोई अपना नाम गुप्त रखकर शिकायत दर्ज नहीं करा सकता है। आपत्तियां 15 मई तक पोर्टल या सीएम हेल्पलाइन पर ली जाएंगी। कोई चाहे तो सीधे जनपद में जाकर भी शिकायत दर्ज करा सकता है। हालांकि पहले दिन कोई आपत्ति नहीं आई। इस बात की संभावना कम ही है कि इसमें अधिक आपत्तियां आएं।
देना होगा अपना नाम और मोबाइल नंबर ..............
योजना के तहत पात्रता की शर्तें स्पष्ट हैं। इसमें स्वघोषणा के आधार पर पंजीयन किया गया है। अब अगर किसी अपात्र महिला ने आवेदन किया है तो इसमें हम तभी कुछ करेंगे,जब कोई आपत्ति दर्ज कराए। जो आपत्ति दर्ज कराएगा,उसे अपना नाम और मोबाइल नंबर देना होगा।
....................................आरएस बघेल-जिला कार्यक्रम अधिकारी-महिला एवं बाल विकास विभाग-झाबुआ
इस योजना में कोई जाति बंधन नहीं है। जिले के सभी वर्ग की महिलाओं को योजना का लाभ मिलेगा। योजना के तहत जिले में अब तक 1.89 लाख से अधिक महिलाओं के पंजीयन हो चुके हैं,उनके डीबीटी करने का काम मई में भी जारी रहेगा।
........................................अमन वैष्णव-सीईओ,जिला पंचायत-झाबुआ





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