धार~ 3 लोक की सूचनाओं को पहुंचाने वाले सृष्टि के पहले संवाददाता थे महर्षि नारद~~

नारद जयंती को पत्रकार दिवस भी कहा जाता है, जयंती पर नारद से जुड़ी कुछ विशेष जानकारियां~~

धार। 7 मई को देवर्षि नारद जयंती मनाई जाएगी। धार में विश्व संवाद केन्द्र मालवा के द्वारा प्रतिवर्ष नारद जयंती कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। इस कार्यक्रम के माध्यम से भगवान नारद द्वारा तीनों लोकों में भ्रमण करके सूचनाओं का आदान-प्रदान की प्रक्रिया को सृष्टि के पहले पत्रकार के तौर पर स्थापित करने के लिए विमर्श किया जाता है। संवाद कार्यक्रम के तहत देवर्षि नारद के प्रति फैली सूचनाओं के माध्यम से लड़ाने-भिड़ाने वाली छवि को असत्य बताकर उनकी खुबियों के बारे में बताया जाता है। रविवार को जयंती पर धार में कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें वरिष्ठ पत्रकार शक्तिसिंह परमार व लेखक अरविंद पंडित अपने विचार प्रकट करेंगे एवं पत्रकारों से चर्चा करेंगे।
तीन शब्दों से होती है पहचान
नारद जयंती पर देवर्षि नारद से जुड़ी हुई जानकारियों को पत्रकार व ज्योतिषाचार्य अशोक शास्त्री ने विशेष रूप से उल्लेखित करते हुए बताया कि नारायण नारायण नारायण...यह शब्द सुनते ही हमारे मन में छवि बनती है देवर्षि नारायण की जो हाथ में वीणा लिए भगवान विष्णु का नाम लेते हुए एक जगह से दूसरे जगह भ्रमण करते रहते हैं। नारद मुनि को एक संचारकर्ता के रुप में जाना जाता है। संचार जीवन के लिए बहुत आवश्यक है। संचार के माध्यम से ही एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से जुड़ सकता है। यदि जीवन में संचार ना हों तो जीवन शून्य हो जाएगा। आज मनुश्य के पास संचार के कई साधन उपलब्ध है। रेडियो, टेलिविजन, समाचार पत्र, एवं इंटरनेट के जरिए आज एक क्षण में सारी दुनिया की खबर एक साथ पता चल जाती है, किंतु धरती पर और परलोक में सर्वप्रथम संचार करने का श्रेय नारद मुनि को ही जाता है।
उन्हें सृष्टि का पहला संवाददाता कहा जाता है। जो अपना काम एक पत्रकार के रुप में पूरी लगन, ईमानदारी के साथ संपूर्ण करते थे।
संचार की जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका
संचार हर व्यक्ति के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। संचार के कुछ माध्यमों से विचारों, और जानकारी को एक-दूसरे के साथ साझा करना संभव है। पूर्व-ऐतिहासिक काल से संचार प्रक्रिया प्रचलित रही है। न केवल इंसान बल्कि पौधे और जानवर भी अपनी भाषा में संवाद करते हैं। नारद मुनि को संचार का अग्रणी माना जाता है। देवर्षि नारद ने इस लोक से उस लोक में परिक्रमा करते हुए संवादों के आदान-प्रदानद्व ाारा पत्रकारिता का प्रारंभ किया। इस प्रकार देवर्षि नारद पत्रकारिता के प्रथम पुरुष भी हैं। जो इधर से उधर घूमते हैं तो संवाद का सेतु ही बनाते हैं। दरअसल देवर्षि नारद भी इधर और उधर के दो बिंदुओं के बीच संवाद का सेतु स्थापित करने के लिए संवाददाता का कार्य करते हैं।
ब्रह्मदेव के है मानस पुत्र
नारद जी के जन्म के उपलक्ष्य में ही नारद जयंती मनाई जाती है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार नारद मुनि का जन्म सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी की गोद से हुआ था। देवताओं के ऋषि, नारद मुनि की जयंती प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ महीने की कृष्णपक्ष द्वितीया को मनाई जाती है। उन्हें ब्रह्मदेव के मानस पुत्र के रूप में भी जाना जाता है। कहा जाता है कि कठिन तपस्या के बाद नारद को ब्रह्मर्षि का पद प्राप्त हुआ था। नारद बहुत ज्ञानी थे और इसी वजह से राक्षस हो या देवी-देवता सभी उनका बेहद आदर और सत्कार करते थे। देवर्षि नारद को महर्षि व्यास, महर्षि वाल्मिकी और महाज्ञानी शुकदेव का गुरु माना जाता है। कहते हैं कि नारद मुनि के श्राप के कारण ही भगवान राम को देवी सीता से वियोग सहना पड़ा था। नारद मुनि, ब्रह्मा के सात मानस पुत्रों में से एक है। उन्होंने कठिन तपस्या से ब्रह्मर्षि पद प्राप्त किया था। वे भगवान विष्णु के अनन्य भक्तों में से एक माने जाते है।
शास्त्रों का प्रकांड विद्धान
नारद मुनि ब्रह्मदेव के मानस पुत्र के रूप में अवतीर्ण हुए जो नारद मुनि के नाम से चारों और प्रसिद्ध हुए। देवर्षि नारद को श्रुति-स्मृति, इतिहास, पुराण, व्याकरण, वेदांग, संगीत, खगोल-भूगोल, ज्योतिष और योग जैसे कई शास्त्रों का प्रकांड विद्वान माना जाता है। नारद मुनि भगवान विष्णु को अपना आराध्य मानते थे। उनकी भक्ति करते थे इसलिए नारद जयंती के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का पूजन करें। इसके बाद नारद मुनि की भी पूजा करें। गीता और दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। इस दिन भगवान विष्णु के मंदिर में भगवान श्री कृश्ण को बांसुरी भेट करें। अन्न और वस्त्र का दान करें। इस दिन कई भक्त लोगों को ठंडा पानी भी पिलाते हैं। ऋषि नारद आधुनिक दिन पत्रकार और जन संवाददाता का अग्रदूत है, इसलिए दिन को ‘पत्रकार दिवस’ भी कहा जाता है और पूरे देश में इस रूप में मनाया जाता है।  
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