झाबुआ~सीएम हेल्पलाइन होगी हेल्पलेस-अधिकारी अब सीधे रिजेक्ट कर सकेंगे शिकायतें,बतानी होगी उन्हें 1 वजह~~
तय किए गए चार आधार जनता की शिकायत के निराकरण को असंभव करार देने के लिए~~
ताकतवर सिस्टम के खिलाफ जनता के हाथ में दो बड़े हथियार थे। पहला आईटीआई कानून,जिसे अब बहुत कमजोर कर दिया गया है। दूसरा सीएम हेल्पलाइन, जिसे कमजोर करने की तैयारी है। अब अधिकारी किसी भी शिकायत को सीधे रिजेक्ट कर सकेंगे। इसके लिए उन्हें चार में से कोई एक वजह बताना होगी। मसलन सीएम हेल्पलाइन में अगर आप कहीं नाली या सड़क निर्माण की बात उठाते हैं तो उसे इस आधार पर रिजेक्ट किया जा सकेगा कि इसके लिए बजट नहीं है। जनता के आवेदनों को नामंजूर करने के लिए सबसे व्यापक आधार नीतिगत निर्णय होगा। यह एक ऐसा शब्द है,जिसे कहीं भी फिट किया जा सकता है। इसके अलावा न्यायालयों में लंबित मामला,बताकर भी आवेदन खारिज किए जा सकते हैं।
एक और अहम हथियार,प्रशासनिक सिस्टम को दिया गया है...........
लक्ष्य से अधिक आवेदन यानी अगर आप पीएम आवास के लिए सीएम हेल्पलाइन पर आवेदन देते हैं तो उसे सिर्फ यह कहकर रिजेक्ट कहा जा सकता है कि इस योजना में लक्ष्य से अधिक आवेदन आ चुके हैं। सोमवार को टीएल मीटिंग में कलेक्टर ने सीएम हेल्पलाइन के बिंदु पर विस्तृत चर्चा की। उसमें ही यह बात सामने आई। उन्होंने कहा कि सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर 15 अप्रैल 2023 तक दर्ज लेकिन लंबित सभी शिकायतें पृथक से प्रदर्शित की जाएंगी।
अधिकारियों के पास समय ही नहीं .....................................
दरअसल चुनावी साल में सरकार एक के बाद एक लोक लुभावन योजनाएं ला रही है। इनके क्रियान्वयन में पूरा का पूरा अमला लगा दिया जाता है। मसलन लाड़ली बहना योजना के चलते अप्रैल में प्रशासनिक सिस्टम लगभग ठप रहा। सभी लोग इसी काम में लगा दिए गए। इसके अलावा विकास यात्राओं में भी इसी तरह अधिकारी लगाए गए। अब इस यात्रा के दूसरे चरण की तैयारी की जा रही है। ऐसे में अधिकारियों के पास सीएम हेल्पलाइन पर आने वाले आवेदनों के निराकरण का समय ही नहीं बचता। नतीजा यह है कि पेंडेंसी बढ़ती जा रही है।



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