झाबुआ~जेंटलमैन बन गया मेंटल मेंन - अति का अंत...........................
नवागत कलेक्टर ने गिराया पहला विकेट-प्रभारी पीआरओ सुधीर कुशवाह को तत्काल प्रभाव से मुक्त कर अपने मूल पद पर किया स्थानांतरित...
शायद ले डूबा उनको चाटुकारिता और भेदभावपूर्ण रवैया -अधिकतर पत्रकार खेमे में हर्ष.......
पीआरओ खबर के साथ एक या अधिकतम दो मुख्य फ़ोटो भेजे और यदि अधिकारी की सहमति हो तो एकाध वीडियो क्लिप.........................
कल गुरुवार को नवागत कलेक्टर सुश्री तन्वी हुड्डा ने पहला विकेट गिरा दिया। कलेक्टर की अनुशंसा से एडीएम श्री मुजाल्दे ने आदेश पारित कर वीणा रावत को तत्काल प्रभाव से ज़िला सूचना एवं प्रसारण अधिकारी बनाया और प्रभारी पीआरओ सुधीर कुशवाह को तत्काल प्रभाव से अपने मूल पद पर स्थानांतरित कर दिया।
अधिकतर पत्रकार खेमे में हर्ष.....................अति का अंत
कलेक्टर ने आते से ही कितनी बारीकी से प्रभारी पीआरओ सुधीर कुशवाहा की हरकतों को देखा होगा और त्वरित आदेश पारित किया होगा। उनकी इस कार्यशैली से साफ जाहिर है कि चापलूसों और दलालों के दिन अब लद चुके है या तो वे समय रहते संभल जाए या सुधर जाए। कल का यह आदेश तो तत्कालीन कलेक्टर के अकल्पनीय तबादला होने जैसा ही सभी को लग रहा है,जिसके बारे में प्रभारी पीआरओ ने कभी कल्पना में भी नही सोचा होगा। अधिकतर पत्रकारों में हर्ष इसलिए देखा जा रहा है कि जब से वे आये थे तब से वे उनकी चापलूसी की आदत के चलते वे कुछ ही मीडिया समूहों को सूचना देते थे और दूसरे मीडिया वालों को भनक भी नही लगने देते थे। उनके इस भेदभावपूर्ण रवैये के चलते प्रशासन और प्रेस-जगत के बीच एक गहरी खाई बन गयी थी। नवागत कलेक्टर के इस निर्णय ने इस खाई को लगभग आज खत्म ही कर दिया है। प्रेस-वार्ता वाले दिन कुछ समय पहले ही प्रेस जगत को सूचना देना, उनको नजरअंदाज करना, प्रेस प्रवेश-पत्र में भेदभाव करते हुए कार्यक्रम के एक दिन पहले जारी करना,जो पत्रकार पीआरओ सूची में नही निजी स्वार्थ के चलते उनका सहयोग करना और व्यवस्था में भारी कमी रखना,उपरोक्त सारी उनकी आदत बन गयी थी। पुराने लोग कह भी गए है अति का अंत होता है और हुआ भी वही। अब नई पीआरओ वीना रावत को उपरोक्त गलतियों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। जिससे ऐसी गलतियों की पुनरावृत्ति उनके कार्यकाल में न हो।
नए पीआरओ को विशेष रूप से शायद यह सब करना चाहिए,ऐसा मेरा मानना...........................
नवागत पीआरओ को विशेषकर किसी भी खबर के साथ सिर्फ एक या अधिकतम दो मुख्य फ़ोटो और यदि अधिकारी की सहमति हो तो एकाध वीडियो क्लिप भेजना चाहिये,ना की तत्कालीन प्रभारी पीआरओ की तरह ढ़ेरो 8 से 10 फ़ोटो और 4 से 6 वीडियो क्लिप,जिसमे अधिकतर वे ही प्रदर्शित रहते थे। इस बात का उनके कैमरामैन को आगे से विशेष ध्यान रखना होगा की खबर के सिर्फ अधिकतम दो मुख्य फ़ोटो ही,वह आपको देवेऐसा आप सुनिश्चित अवश्य करे। इसके अलावा जिले के पत्रकारों की सही सूची,पीआरओ ग्रुप में सूची नुसार सदस्य,पीआरओ ग्रुप के अलावा अन्य ग्रुप में खबर ना भेजे,अधिकारियों की बैठक में समय से उपस्थित रहे, खबरों में उपस्थिीतो की सूची में खुद का नाम न लिखे,सांसद, विधायक,जिला पंचायत अध्यक्ष और साथ मे एक दो मुख्य नेता का नाम ही भेजे।बिना जांचे-परखे खबरों का ना भेजे,जैसे पिछले दिनों खबर में गलती हुई थी की पेटलावद शहीद चौक को लायंस उद्यान लिख दिया गया था। अभी हाल ही में नवागत कलेक्टर के स्वागत के फोटोज़ में खुद का गुलदस्ता देते हुए फ़ोटो को तत्कालीन पीआरओ ने प्रमुखता से खबर के साथ भेजा और सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था,जबकि काफी सीनियर अधिकारियों ने भी कलेक्टर का स्वागत किया था। उपरोक्त सारी बातों का नए पीआरओ को विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है,ऐसा मेरा मानना है.....आगे उनका विवेक.......
**** बॉक्स खबर ****
जेंटलमैन बन गया मेंटल मेन,गुलाबी बिल्डिंग की आवाज-त्वरित निर्णय का राज...........................
तत्कालीन प्रभारी पीआरओ सुधीर कुशवाह को तत्काल उनके मूल स्थान पर स्थानांतरित क्यों किया गया....? जब इस राज को हमारी टीम ने गुलाबी बिल्डिंग के अंदर खंगाला तो बड़ी ही रोचक जानकारी कलेक्टोरेट (गुलाबी बिल्डिंग) में कार्यरत अदने से पीड़ित कर्मचारियों ने नाम ना की छापने की बात पर हमे बतायी। किसी ने कहा खुद को बड़ा साहब समझने वाले को,नए कुशाग्र कलेक्टर ने एकदम सही पहचाना और एक झटके में अर्श से फर्श पर पटक दिया। आगे कर्मचारी ने बताया की वो तो कलेक्टर साहब के स्वागत के फोटो में खुद को बहुत आगे रख प्रचारित किया था ,तो सुना है की साहब ने उसी वक्त उनकी लू उतार दी थी। किसी ने बताया की खुद का परिचय साहब को पीआरओ बताकर किया,जबकि थे प्रभारी इस बात पर भी उन्हें अच्छी खासी फटकार सुनने को मिली। अंत मे एक ने बताया कलेक्टर साहब इनसे नाराज तो थे ही,लेकिन बिना इजाजत और सूचना के एक प्रभावी के साथ उसकी चापलूसी करने साहब के पास अतिउत्साह के चलते पहुच गए। इस बात का परिणाम यह रहा की विगत दिनों से जमे हुए बारूद को चिंगारी मिल गयी और धमाका हो गया। परिणाम उन्हें रवाना कर दिया जहाँ से वे आये थे,सम्मान के साथ। रोज वे जो जेंटलमैन बनकर घूमते थे ,अब पक्का मेंटल मेन बनकर परिसर में घूमते हुए दिखेंगे।परिसर में अब भी 1 से 2 और ऐसे जेंटलमैन हैं, बस या तो वे संभल जाए या सुधर जाए। ऊपर वाले के यहाँ देर है पर अंधेर नही है जी।
***




Post A Comment: