झाबुआ~गुजरात से आ रहे मजदूरो को सांसद के प्रयासो से मिली बसो की सुविधा~~
कांग्रेस भी श्रेय लेने की होड में नही रह रही पीछे ~~
संजय जैन झाबुआ~~
झाबुआ। कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए देश भर मे लगाए गए लॉक डाउन के कारण मध्यप्रदेश के कई लोग गुजरात मे फंसे थे। इनमे बडी संख्या मे झाबुआ जिले का आदिवासी मजदूर वर्ग भी था जो पलायन कर गया था। अंतरप्रांतीय सीमा सील होने के कारण ये अपने घरों तक नहीं पहुंच पा रहे थे। प्रदेश सरकार
के निर्णय के बाद जिला प्रशासन ने यह प्रतिबंध आज शाम से हटा लिया है। मजदूरों की घर वापसी का श्रेय भाजपा सांसद गुमानसिंह डामोर ओर कांग्रेस विधायक कांतिलाल भूरिया दोनो ही ले रहे है। वैसे गुजरात एवं अन्य राज्यो मे फंसे मजदूरो को उनके घर तक पहुचाने के लिये तथा व्यवस्था होने तक उसी स्थान पर इन मजदूरो
को व्यवस्थित तरिके से रखने के लिये सासद गुमानसिह डामोर ने उन राज्यो के मुख्यमंत्री सहित प्रदेश के मुख्यमत्री शिवराजसिंह चौहान को भी पत्र लिखकर विस्तृत सुझाव दिये थे जिसका परिणाम यह हुआ कि मुख्यमंत्री ने पिटोल बैरियर पर व्यापक परिवहन
व्यवस्था करने के लिये जिला प्रशासन को निर्देश दिये ओर उसी के परिणामस्वरूप 70 से अधिक बसो के माध्यम से शुक्रवार को इन ग्रामीण मजदूरो को उनके घरो तक पहुचाने की व्यवस्था हो सकी है। ेगुजरात मे फंसे मप्र के मजदूरों का आना शुरूगुजरात मे फंसे मप्र के मजदूरों का आना शुरू। भाजपा-कांग्रेस मे श्रेय लेने
की होड। गुजरात से मध्यप्रदेश की सीमा मे प्रवेश की छूट के बाद गुजरात के कई शहरों से बसों के द्वारा मजदूरों का शनिवार शाम से ही आना प्रारंभ हो चुका है। कलेक्टर प्रबल सिपाहा, पुलिस अधीक्षक विनीत जैन, एसडीएम अभयसिंह खरारी सहित कई
विभागों के अधिकारी गुजरात-मध्यप्रदेश की सीमा स्थित पिटोल चोकी पर पहुंच गए थे। भाजपा सांसद गुमानसिंह डामोर व कांग्रेस विधायक कांतिलाल भूरिया ने भी बार्डर पर पहुंचकर मजदूरों से मिलकर उनके हाल जाने।जिला मुख्यालय से 12 किमी दूर इंदोर -अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग 47 स्थित पिटोल बार्डर पर शनिवार शाम से मजदूरों का आना शुरू हो गया है। पलायन कर गुजरात
गई आदिवासी मजदूरों व अन्य लोगो को गुजरात की बसों द्वारा यहां तक छोडा गया। इनमें बडी संख्या मे महिलाएं, पुरूष, बच्चे ओर बुजूर्ग शामिल थे। कलेक्टर प्रबल सिपाहा ने बताया कि मध्यप्रदेश के लोग जो गुजरात मे फंसे थे उनके प्रवेश की छूट दी गई है। जो लोग गुजरात से आ रहे है इनकी स्केनिंग की जा रही है।
इसके लिए डाक्टरों की टीम काम कर रही है। इन्हें भोजन के पेकेट पीने का पानी दे रहे है। कलेक्टर ने कहा कि सभी को अपने गंतव्य तक पहुंचाने के लिए प्रशासन ने वाहनों की व्यवस्था कि है। जो झाबुआ जिले के है उन्हें तूफान वाहन से ओर जो दूर के रहने वाले है उनको बसों से उनके घरों तक पहुंचाएंगे। गुजरात मध्यप्रदेश की बार्डर पर मोजुद अनुविभागीय अधिकारी अभयसिंह
खरारी ने जानकारी देते हए बताया कि गुजरात से अभी तक 58 वाहनों मे लगभग 2500 मजदूर आ चुके है। इनकी थर्मल स्केनिंग कराके भोजन पेकैट देने के बाद यहां से उनको अपने गंतव्य तक पहुंचा रहे है।कांग्रेस विधायक कांतिलाल भूरिया ने कहा कि बहुत समय से गुजरात मे फंसे मजदूर परेशान हो रहे थे। झाबुआ, अलिराजपुर ओर रतलाम जिले के करीब एक लाख लोग
गुजरात, राजस्थान , महाराष्ट्र मे फंसे थे। लगातार उनके फोन आ रहे थे। प्रदेश सरकार सुनने को तैयार नहीं थी। फिर मुझे कलेक्ट्रेट मे धरना देना पडा ओर हमने मांग कि की जितने भी हमारे आदिवासी मजदूरी पर गए है सरकार के खर्चे से उनको यहां पहुंचाया जाए। उस दबाव को सरकार ने आखिर मे माना ओर सभी
मजदूरों का आना शुरू हो गया है। ओर उनको घरों तक पहुंचाने का काम चल रहा है। हम लोगो ने दबाव बनाया ओर सरकार को झुकना पडा। सब लोग आ रहे है ओर अपने परिवार के साथ सुख शांति से रहेंगे। यह हमारी पहल थी ओर हम इस पहल मे कामयाब हुए है। इसीलिए हम उनका स्वागत करने के लिए पिटोल आए है। सभी के हमने हाल चाल पुछे। सभी अपने घरों की ओर जा रहे है। यह प्रयास हमारा सफल हो रहा है।
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झाबुआ~गुजरात से आ रहे मजदूरो को सांसद के प्रयासो से मिली बसो की सुविधा~~
कांग्रेस भी श्रेय लेने की होड में नही रह रही पीछे ~~
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