खंडवा~परियोजना के चीफ इंजीनियर वीके कैलासिया जानकारी देते हुए बौखलाए.~~
हम कुछ नहीं कर रहे हैं कहकर काटा फोन~~
हर वर्ष की गर्मी में उड़ती है राखड़ .~~
सिंगाजी परियोजना के जवाबदार राखड़ को थमने के लिए निकालते है लाखों रुपए के टेंडर~~
फिर भी समस्या हर वर्ष की गर्मी में जस की तस~~
बीड़ :- रवि सलुजा ~~
खंडवा जिले के ग्राम दोगालिया में मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी विद्युत इकाई जहां से 2520 मेगावाट का विद्युत उत्पादन किया जा रहा है प्रथम फेस की 1200 मेगावाट की दो इकाईया व द्वितीय फेस की 1320 मेगावाट की दो इकाइयाओ का निर्माण करके बिजली उत्पादन कर रही है यह प्रदेश की सबसे बड़ी विद्युत परियोजना है जिसे संत सिंगाजी विद्युत उत्पादन के नाम से जाना जाता है परंतु 5 से 6 वर्ष के अधिक समय से यह संचालित विद्युत इकाइयों से होने वाले उत्पादन से निकलने वाली राखड़ को परियोजना के ही पिछले हिस्से में राखड का तालाब बनाकर एकत्र किया जाता है प्रथम फेस और द्रितिय फेस दोनो इकाइयों के उत्पादन से निकलने वाली राख को एकत्र करने के लिए अलग अलग दो तालाब बनाए गए हैं जिसे प्रथम फेस से निकलने वाली राख को बने तालाब मे इकट्ठा किया जाता है जिसे अभी राखड़ का उडना बंद हो चुका . वह द्रितिय फेस से निकलने वाली राख को दो नंबर के राखड तालाब पर एकत्र किया जाता है जिससे लगातार राखड उड़ रही है बने हुए राखड़ तालाब के नजदीक कुछ गांव भी मौजूद है गांव भगवानपुरा दिनकरपुरा सिंधखाल,सातमोहनी, सहित अन्य गांव इस परियोजना की चंद किलोमीटर की दूरी पर निवासरत है ग्रामीण राजेश पिता साहेब सिंह ने बताया की हर वर्ष के गर्मी का सीजन शुरुआत होते ही तेज हवाओं के चलते राखड़ तालाब में एकत्र होकर रखी राखड़ के उड़ने का सिलसिला शुरू हो जाता है फिलहाल राखड़ के उड़ने से गांव में रह रहे पुरुष महिलाएं व बच्चे बहुत ही परेशान है गांव में बने छोटे मकान जिसमें अपने जीवन यापन कर के ग्रामीण अपना गुजर-बसर कर रहे हैं रह रहे ग्रामीणों का मूल व्यवसाय कृषि है जो अपने खेतों में फसल को लगाकर अपने जीवन यापन करके अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं परंतु सबसे बड़ी मुख्य बात यह है कि इस राखड़ से सभी ग्रामीण बहुत परेशान है लगातार 5 से 6 वर्षों के बीच राखड़ को रोकने के लिए ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से मध्य प्रदेश पांवर जेनरेटिंग कंपनी को कई बार आवेदन देकर गुहार भी लगाई है परंतु मध्य प्रदेश पांवर जेनरेटिंग कंपनी के मैनेजमेंट द्वारा सिर्फ मात्र आश्वासन देकर हर - हर वर्ष इतिश्री कर ली है पर उड़ने वाली राखड़ का कोई हल सही ढंग से नहीं निकल पाया ग्रामीण इस वर्ष 2020 के अप्रैल मे माह से शुरुआत हुई राखड़ के उड़ने की शुरुआत हुई और यह सिलसिला फिर प्रतिदिन शुरू हो गया तेज हवाओं के चलते राखड़ के उड़ने की गति इतनी तेज हो जाती है कि घर से बाहर निकलना तक दुश्वार हो जाता है परंतु हर बार सिर्फ आश्वासन देकर ही मध्य प्रदेश पांवर जेनरेटिंग कंपनी के अधिकारी अपनी ओर से पल्ला झाड़ लेते हैं
*राखड़ को उड़ने से रोकने के लिए पानी मुरूम के निकालते हैं लाखों के टेंडर*
सोचने योग्य एक बात यह है कि संत सिंगाजी थर्मल पांवर परियोजना दोगालिया से प्रतिवर्ष गर्मी में राखड़ को उड़ने से रोकने के लिए पानी का छिड़काव किया जाता है इस पानी के छिड़काव के लिए लाखों रुपए के टेंडर निविदा निकाली जाती है और इस राखड़ को दबाने के लिए पानी का छिड़काव करके मुरूम की परत बिछाई जाती है पर यह लाखों रुपए के टेंडर प्रतिवर्ष निकालने के बावजूद भी राखड़ ना उडे ऐसा कोई हल अभी तक 6 वर्षों में निकल कर सामने नहीं आया जानकारी के अनुसार बताया जाता है कि निकालें ग ए टेंडरों में भी सांठगांठ करके सिंगाजी परियोजना के जवाबदार अपना स्वार्थ सिद्ध कर लेते हैं और इस जाकर तालाब में अभी तक जबसे सिंगाजी परियोजना निर्माण हुई है तब से बने तालाब में कई करोड़ों रुपए राखड़ को उड़ने से बचने के लिए खर्च किए जा चुके हैं पर हमेशा सिंगाजी परियोजना का प्रबंधन सिर्फ प्रयास की बातें ही करता है और कुछ भी बात कहने को तैयार नहीं होता है राखड उड़ने के पूरे मामले में क्षेत्रीय विधायक नारायण पटेल से चर्चा की तो उन्होंने बताया कि मैंने शनिवार को ही क्षेत्र का दौरा किया दौरा करते हुए में ग्राम भगवानपुरा समर्थन मूल्य गेहूं केंद्र पहुंचा तो वहां भी राखड के उड़ने का प्रकोप दिखाई दिया कुछ ग्रामीण मेरे पहुंचने पर वहां एकत्र हुए और उन्होंने इस राखड़ को उड़ने से रोकने के बचाव में बातें करी तभी मैंने मौके से ही भगवानपुरा केंद्र में खड़े होकर पुनासा एस डीएम ममता खेड़े को फोन पर अवगत कराया और राखड़ उड़ने की बात बताई एसडीएम महोदय ने कहा कि मैं जल्द ही परियोजना पहुंच राखड़ को रोकने के इंतजाम करवाती हूं वही विधायक पटेल ने बताया की यह प्रदुशण विभाग की लापरवाही है उन्होंने समय रहते राखड़ को उठने से रोकने के इंतजाम नहीं किए प्रदूषण विभाग को भी जल्द परियोजना पहुंचकर राखड़ को उडने से रोकने का इंतजाम करना चाहिए इस पूरे मामले को मैं खंडवा कलेक्टर को भी अवगत कराऊंगा और साथ ही सरकार से भी मांग करूंगा कि सिंगाजी परियोजना से उड़ रही राखड़ का कोई स्थाई हल निकाला जाए...
इनका कहना:--
सिंगाजी परियोजना के राखड़ तालाब से उड रही राखड को रोकने के बारे में चर्चा करी तो सिंगाजी परियोजना के चीफ इंजीनियर वी के कैलासिया अपनी बौखलाहट से कहते हुए उन्होने कहां की हम कुछ नहीं कर रहे हैं कुछ नहीं कर रहे हैं करके फोन को डिस्कनेक्ट कर दिया तो इस पूरे मामले से अवगत होता है कि यह मीडिया को कुछ भी कहने से बच रहे हैं और इस उड़ने वाली राखड़ से भले ही ग्रामीण कितनी भी संकट से क्यों ना गुजर रहा हो उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता.
इनका कहना :-
हमने परियोजना के जवाबदार चीफ इंजीनियर परियोजना पीआरओ को निर्देशित किया है की उड़ने वाली राखड़ को जल्द रोका जाए जिससे ग्रामीण बहुत परेशान है वही परियोजना के चीफ इंजीनियर वीके कैलासिया से बात हुई उन्होने बताया कि हमारे पास इनस्पिकलर इंस्ट्रूमेंट आने में कुछ देरी हो गई है परंतु इन स्प्रिंकलर इंस्ट्रूमेंट जल्दी हमारे पास आ रहे हैं उसे लगा दिया जाएगा जिससे राखड़ को उड़ने से निजात मिल सकेगी ..
ममता खेडे पुनासा एस डी एम
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खंडवा~परियोजना के चीफ इंजीनियर वीके कैलासिया जानकारी देते हुए बौखलाए.~~
हम कुछ नहीं कर रहे हैं कहकर काटा फोन~~
हर वर्ष की गर्मी में उड़ती है राखड़ .~~
सिंगाजी परियोजना के जवाबदार राखड़ को थमने के लिए निकालते है लाखों रुपए के टेंडर~~
फिर भी समस्या हर वर्ष की गर्मी में जस की तस~~
बीड़ :- रवि सलुजा ~~

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