मनावर~ मोहनखेड़ा महातीर्थ के आधार स्तंभ ज्योतिषाचार्य मुनिराज जयप्रभविजयजी मः साः की 16 वी पुण्यतिथि मनाई~~     

मनावर = शीश कटने से भी गुरू मिल जाये तो भी कम है यह पहले की सोच थी, आज समय के साथ बदलाव आ गया है। मनुष्य बदल सकता है गुरू नही, यह मनुष्य का पुण्य ही है कि गुरू उसे राह दिखाते रहे। जीवन में इसीलिए गुरू के प्रति सर्मपण के भाव लेकर चलो। यह विचार मनावर स्थित राजेन्द्रसुरी जैन दादावाड़ी में मोहनखेड़ा महातीर्थ के आधार स्तंभ ज्योतिषाचार्य मुनिराज जयप्रभविजयजी मः साः की 16 वी पुण्यतिथि पर आयोजित भावांजलि सभा में शिष्य मुनि दिव्यचंद्रविजयजी ने व्यक्त किये। आपने कहा की परमात्मा के प्रति कौन क्या कह रहा है इससे उन्हे कोई लेना देना नही। परमात्मा के प्रभाव से ही सारे कार्य होते है। कोई भी कार्य करो तो इसमें पुण्य का भाव होना चाहिए। यदि पुण्य नही है तो गुरू वंदना भी नही कर पाओगे। सभा के पूर्व सचिन भंडारी ने गुरू वंदना की प्रस्तुत दी । अपेक्षा अश्विन खटोड़ ने गुरूवर तुम्हे प्रणाम स्तवन सुनाई। समाज के आकेश नवलखा, पुष्पा भंडारी, तथा रामेश्वर पाटीदार ने जयप्रभविजय के जीवन के बारे में संस्मरण बताये। उल्लेखनिय है की मोहनखेड़ा महातीर्थ के आधार स्तंभ व मनावर की दादावाड़ी के प्रेरणा स्त्रोत जयप्रभविजयजी ही थे। जयप्रभविजयजी की आरती की महाआरती ऊतारने की बोली प्रवीण रमेशचंद्र खटोड़ परिवार ने ली। कार्यक्रम में श्रीसंघ अध्यक्ष शेषमल खटोड़, ट्रस्ट के पारसमल नवलखा, सुमित खटोड़ तथा कैलाश काशमिया एवं भारी संख्या में समाज की महिला पूरुष मोजूद थे । गुणानुवाद सभा का संचालन राहुल खटोड़ ने किया । साथ ही आगामी 13 जनवरी को मुख्य आयोजन  गुरू महासप्तमी महोत्सव पर आयोजित नगर भोज के लाभार्थी संतोषकुमार डुंगरवाल परिवार द्वारा आयोजन को सफल बनने के लिये 3 जनवरी को दोपहर में सर्व समाज की बैठक रखी गई है l

Share To:

Post A Comment: