हरदा~ नगर का दुर्गात्सव अपने अनूठे पंडालो के निर्माण,~~

सौंदर्य और कलाकृति के लिए समूचे प्रदेष मे पहचाना जाता है~~

लेकिन यहां पर युवाओ द्वारा माता की भक्ति भी अनूठी और अद्वितीय की जाती है~~

नवरात्रि उत्सव प्रारंभ होने से लेकर दषहरे तक प्रत्येक दिन युवाओ द्वारा विभिन्न शहरो से चुने हुए फूलो की मालाकार बनाकर दुर्गा प्रतिमाओ को भेंट करते है~~

अंकुश विश्वकर्मा हरदा~~

खिरकिया। नगर का दुर्गात्सव अपने अनूठे पंडालो के निर्माण, सौंदर्य और कलाकृति के लिए समूचे प्रदेष मे पहचाना जाता है, लेकिन यहां पर युवाओ द्वारा माता की भक्ति भी अनूठी और अद्वितीय की जाती है। नवरात्रि उत्सव प्रारंभ होने से लेकर दषहरे तक प्रत्येक दिन युवाओ द्वारा विभिन्न शहरो से चुने हुए फूलो की मालाकार बनाकर दुर्गा प्रतिमाओ को भेंट करते है, जिससे उनकी भक्ति देखते ही बनती है। पूरे 9 दिन नंगे पैर उपवास रखकर युवाओ द्वारा रात रात भर फूल एकत्रित किए जाते है, जिसके बाद दिन भर बैठकर मालाओ को निर्माण किया जाता है। जिसके बाद वापस से फूल चुनने के लिए युवा निकल जाते है। माता की भक्ति करने की अनूठी परंपरा वर्षो से चली आ रही है। 55 वर्ष पूर्व प्रारंभ हुई यह अनूठी भक्ति आज के युवाओ द्वारा बरकरार रखे हुऐ है। इमली मोहल्ला समिति के मुन्ना मिस्त्री, गेंदालाल कैथवास द्वारा यह परंपरा प्रारंभ की गई थी। अब माला निर्माण का पूनीत कार्य मे 6 से 7 मंडलो द्वारा किया जाता है। प्रत्येक मंडल में 40 से 50 सदस्य है। यह अब परंपरा बनती जा रही है। नगर में दुर्गात्सव की स्थापना से ही मालाओं का निर्माण प्रारंभ हो जाएगा। जिसके बाद प्रतिदिन मालाओ को शोभायात्रा के रूप मे बैंडबाजो के माध्यम से भ्रमण कर पंडालो पर लेकर माताजी को भेंट किया जाएगा। 
रात मे फूल चुनते, और दिन मे बनाते है माला 
श्रृद्धालु रात में विभिन्न स्थानों से फूल एकत्र करते है और दिन में माला बनाने के कार्य में जुट जाते है, माला तैयार कर रात्रि में प्रतिदिन अलग अलग दुर्गा प्रतिमाओं को ढोल बाजों के साथ माला भेंट करते है, और फिर रात्रि में फूल बटोरने के लिए निकल जाते है, इस प्रकार यह रात दिन माता की भक्ति में जुटें रहते है। श्रृद्धालु रात में फूल चुनने के लिए हरदा जिला ही नही अपितु समीप के सिवनी, खातेगांव, इटारसी, छनेरा, टिमरनी, चारखेडा सहित आसपास के ग्रामीण क्षैत्रो मे फूल चुनने रात्रि में जाते है। पूर्व मे इन्हे रात्रि मे फूल तोडने पर पुलिस  द्वारा रोक लिया जाता था, लेकिन अब उन्हे थाने से पहचान कार्ड भी जारी किऐ जाते है। इन भक्तों में कई भक्त नंगे पैर भी होते है और अन्न ग्रहण भी नही करते है। वर्तमान मे इमली वाले बाबा आनंद नगर माला समिति, भीलट बाबा किसान मोहल्ला समिति, काली माता मंदिर समिति, रामनगर समिति सहित अन्य के द्वारा मालाओ का निर्माण किया जा रहा है।   
मालाओ को देते है शुभ आकृतियो का आकार 
सफेद फूलो की मालाऐ अमूल्य और अद्वितीय होती है। जिसकी बनावट अपने आप मे ही अलग होती है। जिसके लिए विभिन्न शुभ आकृतियों, स्वरूप की मालाऐं मंडलों द्वारा बनाई जाती है। मालाओं को स्वरूप विभिन्न शुभचिन्हो स्वास्तिक, कलश, शुभ लाभ, पगलिऐं, त्रिशुल सहित अन्य चिन्हो पर आधारित भी होता है। माला भी ऐसी बनाई जाती है कि जिसें बाजार में किसी भी मूल्य पर नही खरीदी जा सकती। पूर्व मे माला समितियो द्वारा नगर के पंडालो पर मालाए भेंट की जाती थी, लेकिन अब हरदा, होषंगाबाद सहित अन्य शहरो तक समिति सदस्यो द्वारा अपने खर्चो पर माताजी का मालाए भेंट की की जा रही है।

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