*बुरहानपुर~~ताज़ियों के विर्सजन के साथ दस दिवसीय मोहर्रम पर्व का समापन*~~
बुरहानपुर (मेहलक़ा अंसारी )
मोहर्रम से इस्लामी नया साल प्रारंभ होता है तथा हक़ और सच्चाई के लिए सैयदना इमाम हसन और इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों ने अपनी जान की क़ुर्बानीकी देकर न केवल इस्लाम धर्म की रक्षा की बल्कि इतिहास के पन्नों पर अपना नाम अंकित कर गए। उन की शहादत की याद में यह पर्व मनाया जाता है। मोहर्रम के चांद के साथ इस का आगाज़ होता है तथा यौमे आशुरा (10 मोहर्रम) पर इसका समापन होता है। इस दौरान यहां रीति रिवाज और परंपरा अनुसार जहां अखाड़े, अलम, ताज़िया, सवारी आदि के आयोजन होते हैं, वहीं धर्म ज्ञान की अभिवृद्धि के लिए सुन्नी मदरसों और संगठनों के तत्वावधान में 10 दिवसीय प्रवचन श्रृंखला का आयोजन किया जाता है। एक अन्य दीनी संगठन के तत्वावधान में मस्जिद नवाब अब्दुल रहीम में 10 दिवसीय प्रवचन श्रृंखला का आयोजन करने की पहल विगत कई वर्षों से प्रारंभ की गई है। बोहरा और शिया समुदाय के तत्वावधान में भी अपनी परंपरा अनुसार "गमी" मनाने की परंपरा है। बोहरा समाज में भी प्रतिदिन वाज़ के आयोजन भी किए जाते है, शिया समाज भी अपनी परंपरा अनुसार मातमी जुलूस निकालता है और अपने अपने अंदाज़ में हजरत ईमाम हसन और इमाम हुसैन और 72 शहीदों को याद करते हैं।चूंकि गणपति पर्व और और मोहर्रम पर्व एक साथ आने से शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए ज़िला प्रशासन और पुलिस प्रशासन ने विशेष सतर्कता बरती। अखाड़े, अलम, सवारियों को अनुमति देने में भी सख्ती बरती गई। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की निगरानी में आज पीपल घाट, नागझिरी पर अनेक ताज़ियों के विसर्जन के साथ इस प्रोग्राम का समापन हुआ। ताज़ियों का मेला अचानक आई बारिश के कारण प्रभावित रहा।

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