सरदारपुर~कागजी घोड़े दौड़ा रहे जिम्मेदार, सरदारपुर की जनता बेहाल; चार दिन बाद भी ढाक के तीन पात~~
*[सरदारपुर - श्रीमती भावना - सचिन बैरागी]~~
नगर परिषद सरदारपुर के वार्ड क्रमांक 12 पंचमुखी चौराहे से लाला चौपाटी तक में तकनीकी नियमों को ताक पर रखकर बनाए जा रहे नाली व पेवर्स निर्माण को लेकर खुलासा हुए चार दिन बीत चुके हैं, लेकिन जिम्मेदारों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। समाचार प्रकाशन के बाद भी अधिकारी कुंभकर्णी नींद सोए हुए हैं और मौके पर हालात जस के तस बने हुए हैं।
*बीच सड़क पर सामग्री, राहगीर हो रहे परेशान'-आसमान से गिरे, खजूर में अटके'~~
ठेकेदार की मनमानी का आलम यह है कि सड़क किनारे का घटिया पेवर्स कार्य तो रुका नहीं, बल्कि निर्माण सामग्री (रेत, गिट्टी और पेवर्स ब्लॉक) को बीच सड़क पर ही लावारिस छोड़ दिया गया है। पहले ही गलत लेवलिंग के कारण राहगीरों की सुरक्षा दांव पर थी, और अब इस बिखरी सामग्री ने कोढ़ में खाज का काम कर दिया है। वाहन चालक और पैदल यात्री अपनी जान हथेली पर रखकर निकलने को मजबूर हैं। यहाँ कभी भी कोई बड़ा हादसा 'आ बैल मुझे मार' की तर्ज पर घटित हो सकता है।
*सिर पर नवरात्रि पर्व, पर अधिकारियों की 'आँखों पर बंधी पट्टी'~~
आगामी दिनों में आस्था का महापर्व नवरात्रि प्रारंभ होने वाला है। इस मार्ग पर पर्व के दौरान श्रद्धालुओं और राहगीरों की भारी भीड़ उमड़ती है। ऐसे में बदहाल रास्ता और बिखरी पड़ी सामग्री त्योहार के रंग में भंग डालने के लिए तैयार खड़ी है। लेकिन, नगर परिषद के आला अधिकारी 'कबूतर के आँख बंद करने से बिल्ली नहीं भागती' वाली कहावत चरितार्थ कर रहे हैं। वे सोच रहे हैं कि जनता चुप है तो सब ठीक है, जबकि जनता का गुस्सा अब ज्वालामुखी की तरह फटने को तैयार है।
*'अंधेर नगरी, चौपट राजा': कब जागेगा प्रशासन~~
चार दिन पहले तकनीकी खामियों की पोल खुलने के बाद उम्मीद थी कि प्रशासन 'सुबह का भूला अगर शाम को घर लौट आए तो उसे भूला नहीं कहते' की तर्ज पर काम रुकवाकर तकनीकी सुधार करवाएगा। मगर यहाँ तो 'उलटा चोर कोतवाल को डांटे' जैसी स्थिति है। अधिकारी अपनी गलतियों पर पर्दा डालकर ठेकेदार को अभयदान दे चुके हैं।
नगर के जागरूक नागरिकों का कहना है कि अगर समय रहते इस अंधेरगर्दी पर लगाम नहीं कसी गई और बिखरी सामग्री नहीं हटाई गई, तो वे वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत करने से पीछे नहीं हटेंगे। अब देखना यह है कि जिला कलेक्टर और मुख्य नगरपालिका अधिकारी इस 'चिराग तले अंधेरे' को दूर करने के लिए कब एक्शन लेते हैं, या फिर जनता यूं ही राम भरोसे छोड़ दी जाएगी।

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