झाबुआ ~पहला चुनाव जिसमे मतदाता और कार्यकर्ता दोनों दिखे उदासीन-ऐसे में भारत आदिवासी पाटी र्का चुनाव में उतरंने से बिगड़ गए है सम्पूर्ण चुनावी समीकरण-प्रमुख दलों की आँखों की नींद उडी~~ 

जिले में बाप पार्टी के तीनो विधानसभा प्रत्याशी कहीं बन न जाय बाप -प्रमुख दलों में फैल गया असमंज,हो गया मुकाबला त्रिकोणीय ~~

झाबुआ। ब्यूरो चीफ -संजय जैन~~



 विधानसभा चुनाव में भारत आदिवासी पार्टी (बाप) का प्रदेश की कई आदिवासी सीटों पर फ़िल्मी स्टाइल में जोरदार आगमन से प्रमुख दलों को असमंज की स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया है। यदि राजनैतिक पंडितो की बात करे तो बाप पार्टी की चुनाव में सहभागिता के कारण उनका गणित पूरी तरह से गड़बड़ा गया है। उनका कहना है की अब जिले में दोनों प्रमुख दलों में मुकाबला फिफ्टी फिफ्टी पर आ चूका है।

बाप पार्टी के प्रत्याशी कही बाप न बन जाय.................................

गौरतलब है की बाप पार्टी ने झाबुआ में गब्बर सिंह की एंट्री के साथ,थांदला में माजू डामोर और पेटलवाद में शिक्षित बालू सिंह गामड़ जो की इंजीनियर है,को क्रमश: तय रणनीति के साथ अपना उम्मीदवार बना कर चुनाव के मैदान में उतारा है। जिले के अलावा प्रदेश की आदिवासी बाहुल्य सीट जिसमे सैलाना,बागली,बदनावर,बड़वानी और राजपुर में भी अपने प्रत्याशी को चुनाव में उतारा है। जिसके कारण उपरोक्त सीटों में से सैलाना, बागली, झाबुआ, थांदला और पेटलावद में मुकाबला त्रिकोणीय हो गया हैै। जानकारों का कहना है की उपरोक्त सीटों पर हार जीत का अंतर काफी कम रहेग,साथ ही जिले में बाप पार्टी के तीनो विधानसभा प्रत्याशी कही बाप न बन जाय। बाप पार्टी की इस अकल्पनीय एंट्री ने दोनों ही प्रमुख दलों की आँखों की नींद उडा कर रख दी है,साथ ही उनकी जीत की राह का रोड़ा भी बन चुकी है। अब देखना यह है की 3 दिसम्बर को किसके सर पर ताज सुशोभित होगा .....?

बाप पार्टी इस उद्देश्य से चुनाव में उतरी................

बाप पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव जितेंद्र असलकर का कहना है कि आदिवासी अधिकतर अपने अधिकारों से वंचित रहते है। उन्हें उनका पूरा हक और सम्मान नहीं मिलता है। इन्हीं मुद्दों को ध्यान में रखते हुए हमने भारत आदिवासी पार्टी का गठन किया है। हमारा मुख्य उद्देश्य हमारे आदिवासी भाइयो को पूरा मान सम्मान और जल,जंगल,जमीन का संपूर्ण हक़ दिलाना है।
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