*क्या है सोमवती अमावस्या*
हिंदी मास के अनुसार हर मास में अमावस्या आती है । लेकिन जब किसी भी माह में सोमवार के दिन अमावस्या तिथि पड़ती है तो उसे, सोमवती अमावस्या कहते हैं। इस संदर्भ में प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डाँ. पं. अशोक शास्त्री ने विस्तृत चर्चा करते हुए बताया कि इस वर्ष सोमवती अमावस्या 4 फरवरी को है। इस दिन व्रत उपवास व पवित्र नदियों, सरोवरों में स्नान और दान का विशेष महत्व है। यह तिथि पितृ दोष के निवारण में भी सहायक है। इस दिन को गंगा स्नान का बड़ा महत्व है। जो मनुष्य गंगा स्नान को नहीं जा सकते, वे अपने घर में हीं पानी में गंगा जल मिला कर तीर्थों का आह्वान करते हुए स्नान कर सकते हैं। इस दिन मौन रहकर स्नान करने से सहस्त्र गौ दान के समान पुण्य की प्राप्ति होती है। कुरुक्षेत्र के ब्रह्मा सरोवर में स्नान करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है।
*चार ग्रहों का दुर्लभ योग* ज्योतिषाचार्य डाँ. पं. अशोक शास्त्री के अनुसार सोमवती मौनी अमावस्या पर सूर्य, चंद्र, बुध, केतु मकर राशि में गोचर रहेंगे। इस तरह चर्तुग्रही युति में महोदय योग बन रहा है। यह संयोग बेहद दुर्लभ और यह शुभ माना जाता है। यह योग सूर्य चंद्र की मकर राशि में मौजूद स्थिति पर केंद्रित है। साथ ही श्रवण व व्यतिपात नक्षत्र इस योग को ओर भी खास बनाते हैं। इस दिन भगवान नारायण और भगवान शिव की पूजा विशेष फलकारी होती है। इस दिन भगवान विष्णु और शिव को पंचामृत स्नान कराने के साथ उन्हें चंदन, पुष्प, पुष्पमाला, फल, श्रीफल, जनेऊ, मिष्ठान्न, धूप, दीप आदि अर्पित करना चाहिए।
ये बन रहे शुभ योग मौनी अमावस्या पर श्रवण नक्षत्र होने से सर्वार्थसिद्धि योग बन रहा है। ज्योतिषाचार्य डाँ.अशोक शास्त्री के अनुसार व्यतिपात योग के होने से यह महोदय नामक योग का निर्माण भी कर रहा है। शास्त्रीय मान्यता के अनुसार एक करोड़ सूर्य ग्रहण के बाद स्नान और दान करने से जो पुण्य प्राप्त होता है, वह इस योग में एक बार संगम, गंगा, यमुना, नर्मदा, शिप्रा आदि पवित्र नदियों में स्नान करने से प्राप्त हो जाता है।
*ये करें उपाय* - डाँ.अशोक शास्त्री के मुताबिक सोमवती अमावस्या के दिन भगवान सूर्य को जल देना चाहिए, इससे गरीबी और दरिद्रता दूर होती है । - 108 बार पीपल की परिक्रमा करें। - शिव व नारायण के मंत्र जाप, सिद्धि साधना एवं दान कर मौन व्रत को धारण करने से पुण्य प्राप्ति और भगवान का आशीर्वाद मिलता है। - इस दिन पितरों के तर्पण का कार्य भी किया जाता है । - सोमवार को भगवान शिव का वार है, अत: सोमवती अमावस्या को शिव एवं हनुमान जी की पूजा करने से कठिनाईयाँ दूर होती है । - इस दिन पीपल के वृक्ष की पूजा व पेड़ की जड़ में दीपक जलाना चाहिए तथा शनि देव की भी पूजा करनी चाहिये। इससे शनि देवता शुभाशीष प्रदान करते हैं।

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